
मालदा, 19 मई 2026: पूर्व रेलवे के मालदा मंडल द्वारा मंगलवार को मालदा टाउन रेलवे स्टेशन पर क्षय रोग यानी टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने और संभावित मरीजों की पहचान के उद्देश्य से विशेष जागरूकता एवं स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया गया। इस अभियान में बड़ी संख्या में यात्रियों, रेलकर्मियों और आम लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को टीबी जैसी गंभीर बीमारी के शुरुआती लक्षणों, बचाव और समय पर इलाज के महत्व के प्रति जागरूक करना था।
यह कार्यक्रम मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन तथा मंडल रेलवे अस्पताल, मालदा की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुपा घोष के पर्यवेक्षण में आयोजित किया गया। रेलवे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल के तहत यह अभियान “100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान” का हिस्सा था।
मालदा टाउन रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थल पर आयोजित इस शिविर का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी संदेश पहुंचाना था। रेलवे स्टेशन पर हर दिन हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है, इसलिए जागरूकता कार्यक्रम के लिए इसे उपयुक्त स्थान माना गया। कार्यक्रम के दौरान यात्रियों को टीबी के शुरुआती संकेतों और समय पर जांच की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा जिला टीबी केंद्र के समन्वय से आयोजित इस शिविर में चिकित्सा दल ने यात्रियों और रेलकर्मियों की स्वास्थ्य जांच भी की। स्क्रीनिंग के दौरान उन लोगों की पहचान करने पर विशेष ध्यान दिया गया, जिनमें टीबी से जुड़े लक्षण दिखाई दे रहे थे।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में अधिक पसीना आना और भूख कम लगना जैसे लक्षण टीबी के संकेत हो सकते हैं। शिविर में आए लोगों को बताया गया कि अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
इस अभियान का संचालन सहायक मंडल चिकित्सा अधिकारी डॉ. अथिरा प्रतापन और मालदा जिला टीबी कार्यक्रम समन्वयक की देखरेख में किया गया। स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने यात्रियों से सीधे बातचीत कर उन्हें टीबी के कारण, संक्रमण के तरीके और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान विशेष स्वास्थ्य शिक्षा सत्र भी आयोजित किए गए। इन सत्रों में लोगों को बताया गया कि टीबी पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और नियमित दवा सेवन बेहद जरूरी है। डॉक्टरों ने यह भी समझाया कि बीच में दवा छोड़ देने से बीमारी गंभीर हो सकती है और संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को खांसी शिष्टाचार और श्वसन स्वच्छता के महत्व के बारे में भी जागरूक किया। उन्होंने बताया कि खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढंकना, साफ-सफाई का ध्यान रखना और भीड़भाड़ वाले स्थानों में सतर्क रहना संक्रमण को रोकने में मदद करता है।
कार्यक्रम के दौरान टीबी जागरूकता से जुड़े पंपलेट और सूचना सामग्री भी वितरित की गई। इन पंपलेट्स में बीमारी के लक्षण, बचाव के उपाय, जांच केंद्रों की जानकारी और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया गया था। रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और आम लोगों ने इन जानकारियों में काफी रुचि दिखाई।
शिविर में शामिल लोगों ने चिकित्सा दल से टीबी से जुड़ी अपनी शंकाओं और भ्रांतियों पर भी चर्चा की। कई लोगों ने बीमारी के फैलने के तरीके, इलाज की अवधि और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल पूछे। डॉक्टरों ने सभी सवालों के जवाब देकर लोगों को सही जानकारी देने की कोशिश की।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि आज भी समाज में टीबी को लेकर कई तरह की गलतफहमियां मौजूद हैं। कई लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं या सामाजिक झिझक के कारण समय पर जांच नहीं कराते। यही वजह है कि जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी भारत समेत दुनिया के कई देशों में अब भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। हालांकि सरकार द्वारा लगातार अभियान चलाने और मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने से स्थिति में सुधार आया है, लेकिन जागरूकता की कमी अभी भी बड़ी समस्या है।
रेलवे प्रशासन का मानना है कि रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने से अधिक लोगों तक संदेश पहुंचता है। यात्रियों के साथ-साथ रेलवे कर्मचारी भी इससे लाभान्वित होते हैं। यही कारण है कि पूर्व रेलवे समय-समय पर स्वास्थ्य और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।
मालदा मंडल की ओर से कहा गया कि यह अभियान सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। रेलवे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों को टीबी के प्रति जागरूक किया जाए ताकि बीमारी की समय पर पहचान और इलाज सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम में शामिल यात्रियों ने भी इस पहल की सराहना की। कई लोगों ने कहा कि रेलवे स्टेशन पर इस तरह के शिविर लगने से आम जनता को बड़ी सुविधा मिलती है। कुछ यात्रियों ने कहा कि उन्हें पहले टीबी के लक्षणों और बचाव के तरीकों की पूरी जानकारी नहीं थी, लेकिन इस शिविर से उन्हें काफी उपयोगी जानकारी मिली।
पूर्व रेलवे और मालदा मंडल द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान जनस्वास्थ्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम जारी रहेंगे ताकि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े और गंभीर बीमारियों की रोकथाम संभव हो सके।
फिलहाल मालदा टाउन रेलवे स्टेशन पर आयोजित यह टीबी जागरूकता एवं स्क्रीनिंग शिविर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से लोगों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और समय पर जांच व इलाज के लिए लोग आगे आएंगे।


