ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा का बड़ा एलान: ‘बिहार कृषि ऐप’ और ‘फार्मर रजिस्ट्री’ से हाईटेक होगी खेती, हर किसान को मिलेगा डिजिटल पहचान पत्र

पटना/भुवनेश्वर, 19 मई 2026। बिहार के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और आधुनिक मानकों के अनुरूप सुसज्जित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ा नीतिगत रोडमैप धरातल पर उतारा है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित कृषि पर उच्चस्तरीय क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने प्रादेशिक खेती-किसानी को आधुनिकतम तकनीकों से एकीकृत करने की दूरगामी योजनाओं का एलान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के भीतर जारी ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अभियान और ‘बिहार कृषि ऐप’ का बढ़ता दायित्व आने वाले दिनों में कृषि क्षेत्र के भीतर एक अभूतपूर्व और युगांतरकारी डिजिटल क्रांति की प्रविष्टि कराएगा।

​इस व्यवस्था के तहत सूबे के प्रत्येक किसान को एक अनूठी डिजिटल पहचान (फार्मर आईडी) हस्तगत कराई जा रही है, जिससे बिचौलियों और कागजी ढिलाई की कड़ियों को पूरी तरह से ब्लॉक करते हुए सरकारी योजनाओं का सीधा वित्तीय लाभ (डीबीटी) पारदर्शी रूप से सीधे उनके बैंक खातों में प्रेषित किया जा सकेगा। रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन के ऐतिहासिक आंकड़ों को छूने के उपरांत, अब राज्य सरकार का पूरा फोकस दलहन (दालों) और तिलहन (तेल उत्पादक फसलों) के प्रक्षेप में बिहार को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित हो गया है।

भुवनेश्वर क्षेत्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री से फसल विविधीकरण हेतु सहयोग की मांग

​भुवनेश्वर में आयोजित इस महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान कृषि मंत्री ने देश के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के समक्ष बिहार के किसानों के हितों की रक्षा के लिए कई कड़े विधिक और नीतिगत प्रस्ताव पटल पर रखे। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि राष्ट्रीय बीज निगम और केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से बिहार को दलहन एवं तिलहन फसलों के सर्वोत्कृष्ट व उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीजों की आपूर्ति कड़ाई के साथ सुनिश्चित कराई जाए। इसके साथ ही, उन्होंने बदलते वैश्विक मौसम चक्र को देखते हुए फसल विविवीकरण (क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन) को बढ़ावा देने के लिए बजटीय अनुदानों और तकनीकी पैकेजों के संधारण का विशेष आग्रह किया।

​कृषि मंत्री ने बिहार में बीज अनुदान की दरों में समयबद्ध वृद्धि करने का रणनीतिक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया, ताकि राज्य के लघु और सीमांत कृषक आधुनिक संकर बीजों को बिना किसी आर्थिक अवसाद के सुगमता से क्रय कर सकें। उन्होंने रेखांकित किया कि बिहार सरकार परंपरागत धान-गेहूं के फसल चक्र से आगे निकलकर उद्यानिकी फसलों (हॉर्टिकल्चर), जैसे कि मखाना उत्पादन, फल और औषधीय पौधों की शुष्क बागवानी के माध्यम से किसानों की प्रति एकड़ शुद्ध आय को गुणात्मक रूप से बढ़ाने के लिए नीतिगत रूप से पूरी तरह कृतसंकल्प संधारित है।

खाद्यान्न उत्पादन में तीन गुना से अधिक की प्रखर वृद्धि और मौसम जनित अनुमान

​सूबे के कृषि विकास की सांख्यिकीय समीक्षा करते हुए विजय कुमार सिन्हा ने आंकड़ों के माध्यम से स्पष्ट किया कि वर्ष 2005 के तुलनात्मक विन्यासों की अपेक्षा आज बिहार का कुल खाद्यान्न उत्पादन तीन गुना से भी अधिक की प्रखर वृद्धि दर्ज कर चुका है। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2008 से अनवरत लागू किए जा रहे योजनाबद्ध ‘कृषि रोड मैप’ प्रक्रमों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर लाइव दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान समय में सूबे के भीतर चतुर्थ कृषि रोड मैप (2023-28) का अत्यंत प्रभावी और कड़ा क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।

​विगत वित्तीय वर्षों के उत्पादन आंकड़ों की विवरणी इस प्रकार है:

  • वित्तीय वर्ष 2024-25 (रिकॉर्ड उत्पादन): इस अवधि में बिहार के किसानों ने अपनी कार्यकुशलता के बल पर सूबे के इतिहास में सर्वाधिक 247.83 lakh metric ton खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन मुकम्मल किया था।
  • वित्तीय वर्ष 2025-26 (मौसम जनित विचलन): नवंबर माह में आए विनाशकारी मोथा चक्रवाती तूफान और मार्च के अंतिम सप्ताह में हुई अप्रन्याशित व असामयिक ओलावृष्टि व भारी वर्षा के कारण फसलों को आंशिक क्षति पहुंची। इसके बावजूद, जारी तृतीय पूर्वानुमान के संचयी विन्यासों के अनुसार कुल खाद्यान्न उत्पादन 226.71 lakh metric ton रहने का एक मजबूत अनुमान संधारित है।

सात निश्चय-3 के तहत 3446.45 करोड़ रुपये का बजट और एग्री-स्टैक का विन्यास

​कृषि मंत्री ने बजटीय स्वीकृतियों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि चतुर्थ कृषि रोड मैप और राज्य सरकार की सर्वोच्च नीति सात निश्चय-3 के अंतर्गत कृषक कल्याण प्रणालियों को गति देने के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 के वास्ते कृषि विभाग हेतु 3446.45 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट विधिक रूप से स्वीकृत किया जा चुका है। इस बजटीय आवंटन का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, कोल्ड स्टोरेज (गोदाम निर्माण), प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और फार्म ऑटोमेशन (खेती में स्वचालित मशीनों के समावेशन) पर खर्च किया जा रहा है।

​उन्होंने घोषणा की कि बिहार सरकार केंद्र सरकार के डिजिटल कृषि मिशन के मुख्य घटक “एग्री-स्टैक” (Agri-Stack) के सभी तकनीकी अवयवों को सूबे के भीतर पूरी कड़ाई से लागू करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। पूर्व में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने वर्षों से फाइलों के जाल में लंबित पड़े दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और भूमि सुधार से जुड़े परिमार्जन कार्यों को पूरी तरह से पोर्टल आधारित और ऑनलाइन प्रणालियों में स्थानांतरित कर गति प्रदान की थी। उसी मजबूत और पारदर्शी लैंड रिकॉर्ड डेटाबेस का सीधा फायदा आज कृषि विभाग के ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अभियान को मिला है, जिसने एक ऐतिहासिक सफलता का संरेखण तैयार किया है।

जून के अंत तक सभी किसानों की अनूठी डिजिटल पहचान: ‘बिहारी डिजिटल कृषि योद्धा’

​फार्मर रजिस्ट्री अभियान के अद्यतन धरातलीय आंकड़ों को प्रस्तुत करते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि बिहार में अब तक कुल 88.40 lakh से अधिक किसानों का सफलतापूर्वक ई-केवाईसी (e-KYC) संधारित किया जा चुका है। इसके साथ ही, लगभग 48.45 lakh कृषकों की विशिष्ट डिजिटल फार्मर आईडी का विनिर्माण पूर्ण कर लिया गया है। राज्य सरकार ने इस प्रक्रम को शत-प्रतिशत मुकम्मल करने के उद्देश्य से 12 मई से 30 जून 2026 तक एक विशेष महाअभियान चलाने का विधिक लक्ष्य निर्धारित किया है, ताकि सूबे का कोई भी वास्तविक किसान इस डिजिटल सुरक्षा कवच से वंचित न रह सके।

​इस डिजिटल क्रांति को ग्रामीण अंचलों में लोकप्रिय बनाने और किसानों के भीतर तकनीकी साक्षरता (डिजिटल लिटरेसी) का विस्तार करने के लिए पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर विशेष “युवा किसान प्रशिक्षण शिविरों” का आयोजन कड़ाई से किया जाएगा। इन शिविरों के माध्यम से आधुनिक कृषि ऐप्स, सॉइल टेस्टिंग और एआई प्रणालियों का कड़ा व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले ग्रामीण युवाओं को सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर “बिहारी डिजिटल कृषि योद्धा” के रूप में एक नई सांगठनिक पहचान और प्रमाण पत्र हस्तगत कराया जाएगा, जो गांवों में किसानों के लिए तकनीकी सलाहकार के रूप में लाइव कार्य करेंगे।

बिहार कृषि ऐप पर 80 लाख कृषकों को जोड़ने का लक्ष्य, एआई आधारित लाइव सलाह

​कृषि क्षेत्र में mobile governance की सफलता को रेखांकित करते हुए मंत्री ने सूचित किया कि सरकार द्वारा विकसित किए गए ‘बिहार कृषि ऐप’ पर वर्तमान समय तक लगभग 11.50 lakh किसान सक्रिय रूप से पंजीकृत होकर लाभ उठा रहे हैं। विभाग ने चालू वर्ष के अंत तक इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से सूबे के 80 lakh किसानों को सीधे जोड़ने का एक सुदृढ़ लक्ष्य संधारित किया है। यह एकल मोबाइल ऐप किसानों के लिए एक संपूर्ण डिजिटल कृषि संदर्शिका के रूप में कार्य कर रहा है, जिसके भीतर निम्नलिखित मुख्य आधुनिक तकनीकी सुविधाएं चौबीसों घंटे लाइव प्रेषित की जा रही हैं:

  • उर्वरक एवं बीज उपलब्धता: विभिन्न पैक्स (PACS) और सरकारी व निजी दुकानों पर यूरिया, डीएपी और संकर बीजों के अद्यतन स्टॉक की रीयल-टाइम विरणी।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card): खेतों की मिट्टी की तकनीकी जांच रिपोर्ट और उसके अनुकूल पोषक तत्वों के उपयोग का विन्यास।
  • मौसम चेतावनी और बाजार मूल्य: मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी तात्कालिक ओलावृष्टि व भारी वर्षा की चेतावनी तथा सूबे की विभिन्न कृषि उत्पाद बाजार समितियों (मंडियों) के दैनिक न्यूनतम व अधिकतम भावों का लाइव डेटा।
  • एआई आधारित कृषि सलाह: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) तकनीकों की मदद से फसलों में लगने वाले कीड़ों और असाध्य रोगों की फोटो अपलोड कर तुरंत उनके वैज्ञानिक उपचार और दावों की सटीक विधिक जानकारी।

​इसके समानांतर ही, आगामी खरीफ मौसम के दौरान राज्य सरकार द्वारा हाइब्रिड धान, संकर मक्का तथा विशेष रूप से सरसों और सोयाबीन जैसी उन्नत तिलहनी फसलों के रकबे को बढ़ाने की दिशा में कड़े नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं ताकि बिहार खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि के पथ पर निरंतर अग्रसर बना रहे।

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