
मालदा | 15 अप्रैल 2026: पूर्व रेलवे के मालदा मंडल में भारत रत्न की 135वीं जयंती पूरे सम्मान और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, मालदा में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके बाद उन्होंने डॉ. आंबेडकर के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को नमन किया। इस दौरान उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी श्रद्धा के साथ पुष्पांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को स्मरण किया।
अपने संबोधन में मंडल रेल प्रबंधक ने कहा कि डॉ. आंबेडकर का भारतीय संविधान निर्माण में योगदान अतुलनीय है। उन्होंने समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए जीवनभर संघर्ष किया और न्याय, समानता एवं अधिकारों की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने यह भी कहा कि बाबा साहेब का जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और उनकी शिक्षाएं वर्तमान समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।
इस कार्यक्रम में अपर मंडल रेल प्रबंधक अमरेन्द्र कुमार मौर्य, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुपा घोष, विभिन्न विभागों के शाखा अधिकारी, कर्मचारीगण तथा एससी-एसटी एसोसिएशन और यूनियनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से डॉ. आंबेडकर के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मालदा मंडल के साथ-साथ अन्य स्थानों पर भी जयंती कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में जमालपुर लोको शेड में 14 अप्रैल 2026 को डॉ. आंबेडकर की जयंती गरिमामय वातावरण में मनाई गई। यह कार्यक्रम वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (डी) कृष्ण कुमार दास के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें एईई/टीआरडी और लोको शेड के कर्मचारियों ने भाग लिया।
जमालपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भी अधिकारियों और कर्मचारियों ने डॉ. आंबेडकर के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके सामाजिक न्याय, समानता और राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया। वक्ताओं ने उनके विचारों को अपनाने और समाज में समानता व समरसता स्थापित करने का संकल्प दोहराया।
मालदा मंडल के विभिन्न स्थानों पर आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से बाबा साहेब के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। साथ ही, रेलवे परिवार के सभी सदस्यों ने न्याय, समानता और सामाजिक समरसता के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
यह आयोजन न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम रहा, बल्कि एक ऐसा अवसर भी बना, जहां लोगों ने डॉ. आंबेडकर के विचारों को आत्मसात करने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।


