
पटना, 18 जून 2025 – बिहार का प्रसिद्ध मिथिला मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना चुका है। हाल ही में सुधा डेयरी के माध्यम से मखाना की पहली खेप अमेरिका भेजी गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि बिहार का यह सुपरफूड अब वैश्विक पटल पर जगह बना रहा है। यह उपलब्धि राज्य सरकार की योजनाओं, किसानों की मेहनत और मखाना को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं की सतत कोशिशों का परिणाम है।
10 वर्षों में दोगुना हुआ रकबा और उत्पादकता में आई तेजी
- 2012 में मखाना की खेती जहां 13 हजार हेक्टेयर भूमि में होती थी,
- 2025 तक यह बढ़कर 35,224 हेक्टेयर हो चुकी है।
- उत्पादकता भी 16 क्विंटल/हेक्टेयर से बढ़कर 28 क्विंटल/हेक्टेयर हो गई है।
इस वृद्धि का मुख्य श्रेय मुख्यमंत्री बागवानी मिशन, मखाना विकास योजना और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के वितरण को दिया जा रहा है।
किसानों के लिए बना आजीविका का मजबूत आधार
वर्तमान में बिहार के करीब 25 हजार किसान मखाना की खेती से जुड़े हुए हैं। इसके लिए:
- उन्नत बीजों की आपूर्ति
- भंडारण गृह निर्माण पर अनुदान
- तकनीकी प्रशिक्षण
- मार्केटिंग के लिए मखाना महोत्सव जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
मिथिला मखाना को मिला GI टैग, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
20 अगस्त 2022 को ‘मिथिला मखाना’ को GI टैग मिलने के बाद इसके बाजार मूल्य और पहचान में बड़ा इजाफा हुआ। अब यह केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक ब्रांड बन रहा है। इसके निर्यात को और गति देने के लिए मखाना बोर्ड के गठन की प्रक्रिया जारी है, जो क्षेत्र विस्तार, प्रोसेसिंग, यांत्रिकीकरण और निर्यात को समेकित रूप से बढ़ावा देगा।
10 से 16 जिलों तक बढ़ा उत्पादन क्षेत्र
मखाना उत्पादन अब राज्य के 16 जिलों में विस्तारित किया गया है। प्रमुख 10 जिलों में यह पहले से प्रमुख रूप से उगाया जाता है:
- दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया
- अब इन जिलों के साथ फुलपरास, बेनीपट्टी, त्रिवेणीगंज, बनमनखी, बेतिया और मोतिहारी को भी जोड़ने की योजना है।
राजस्व में 4.57 गुना की वृद्धि
2005 से पहले मखाना से होने वाली मत्स्य/जलकर राजस्व मात्र 3.83 करोड़ रुपये थी। अब यह बढ़कर 2023-24 में 17.52 करोड़ रुपये हो गई है – यानी 4.57 गुना वृद्धि। यह स्पष्ट करता है कि न केवल किसानों की आमदनी बढ़ी है, बल्कि राज्य सरकार को भी आर्थिक लाभ मिला है।
कृषि विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही गति रही, तो बिहार बहुत जल्द मखाना आधारित उद्योग में आत्मनिर्भर हो सकता है। प्रसंस्करण इकाइयों और वैल्यू एडेड उत्पादों जैसे मखाना स्नैक्स, चॉकलेट, फ्लेवर मिक्स आदि से ग्रामीण उद्यमिता को भी बल मिलेगा।
बिहार का मखाना अब सिर्फ मिथिला तक सीमित नहीं, बल्कि दुनिया के बाजारों में अपने पैर पसार रहा है। सरकार, किसान और संस्थाओं के सहयोग से यह क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण रोजगार में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है।


