
पटना, 28 मार्च: बिहार में उच्च शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब राज्य के 360 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे। शिक्षा विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से तैयारी शुरू कर दी है और लक्ष्य रखा गया है कि इसी शैक्षणिक सत्र से इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू हो जाए।
सरकार का यह कदम खासतौर पर उन छात्रों के लिए राहत लेकर आएगा, जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए अपने प्रखंड से बाहर जाना पड़ता था। कई ऐसे प्रखंड हैं जहां अब तक एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है, जिससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को पढ़ाई में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
हर प्रखंड तक पहुंचेगी उच्च शिक्षा
शिक्षा विभाग के अनुसार, राज्य सरकार का उद्देश्य है कि हर प्रखंड स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसी के तहत उन 360 प्रखंडों की पहचान की गई है, जहां फिलहाल कोई डिग्री कॉलेज मौजूद नहीं है। इन सभी स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से नए महाविद्यालय स्थापित किए जाएंगे।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जमीन चयन, भवन निर्माण, शिक्षकों की नियुक्ति और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था को लेकर काम तेजी से चल रहा है। कोशिश है कि न्यूनतम संसाधनों के साथ भी पढ़ाई शुरू कर दी जाए, ताकि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो।
छात्रों को मिलेगा सीधा फायदा
इस योजना के लागू होने से लाखों छात्रों को अपने ही क्षेत्र में स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिलेगा। खासकर छात्राओं के लिए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि दूर-दराज के कॉलेजों में जाने की बाधाएं अब कम हो जाएंगी।
इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बिहार की शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा देगा। प्रखंड स्तर पर कॉलेज खुलने से उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और सकल नामांकन अनुपात (GER) में भी सुधार देखने को मिलेगा।
सरकार की इस पहल को ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास को गति दे सकता है।


