
पटना | शिक्षा विशेष रिपोर्ट: NEET (UG) 2026 और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर बिहार सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। द्वारा आयोजित परीक्षाओं की निगरानी और संचालन को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने राज्य स्तरीय समन्वय समिति का पुनर्गठन कर दिया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने 30 मार्च 2026 को आधिकारिक आदेश जारी किया।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
नई टीम, नई जिम्मेदारियां
समिति के पुनर्गठन में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिसमें केंद्र और राज्य स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया है—
- को NTA की ओर से नया नोडल अधिकारी बनाया गया है
- को राज्य सरकार की ओर से असैनिक नोडल पदाधिकारी की जिम्मेदारी मिली है
- (एसपी, मुख्यालय) को पुलिस प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया गया है
इन अधिकारियों की टीम परीक्षा से जुड़े हर पहलू—सुरक्षा, समन्वय और प्रबंधन—पर संयुक्त रूप से काम करेगी।
तकनीकी और शिक्षा विभाग का भी सहयोग
परीक्षाओं को तकनीकी रूप से सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए अन्य विभागों को भी जोड़ा गया है—
- (NIC) के वरिष्ठ आईटी अधिकारी को शामिल किया गया है
- शिक्षा विभाग की ओर से उच्च शिक्षा से जुड़े अधिकारी भी समिति में सदस्य बनाए गए हैं
इसका उद्देश्य परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डेटा सुरक्षा और डिजिटल सिस्टम को मजबूत करना है।
पेपर लीक पर लगाम लगाने की तैयारी
हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी के मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में यह नई समिति खासतौर पर—
- परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करेगी
- संदिग्ध गतिविधियों पर रियल-टाइम निगरानी रखेगी
- प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी
सरकार का दावा है कि इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है।
NEET (UG) 2026 पर विशेष नजर
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें लाखों छात्र शामिल होते हैं। बिहार में भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस परीक्षा में बैठते हैं।
नई समिति का गठन खास तौर पर NEET (UG) 2026 को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता को रोका जा सके।
पहले के आदेश रहेंगे लागू
सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति के पुनर्गठन के बावजूद पहले जारी दिशा-निर्देश और प्रावधान यथावत लागू रहेंगे। यानी नई टीम पुराने नियमों के साथ मिलकर काम करेगी, जिससे प्रशासनिक निरंतरता बनी रहे।
बिहार सरकार का यह कदम प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई समन्वय समिति के गठन से उम्मीद है कि इस बार परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या ये बदलाव वास्तव में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगा पाते हैं या नहीं।


