
- भागलपुर जिले के पीरपैंती थाना क्षेत्र में चर्चित दोहरे हत्याकांड और अपहरण के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी धर्मराज सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।
- जून 2025 में हुए इस सनसनीखेज वारदात के बाद से ही आरोपी पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था।
- भागलपुर पुलिस की विशेष टीम ने वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान के आधार पर शाहकुंड थाना क्षेत्र से मुख्य अभियुक्त को दबोचने में सफलता पाई है।
- इस मामले में पुलिस अब तक कुल 6 अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है, जबकि अन्य की तलाश में छापेमारी जारी है।
भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।
पीरपैंती में पुलिस की बड़ी कार्रवाई और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
भागलपुर जिले में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के बीच पीरपैंती पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पीरपैंती थाना अंतर्गत हुए चर्चित हत्याकांड के मुख्य आरोपी धर्मराज सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) भागलपुर के कड़े निर्देशों के बाद जिले में अवैध हथियारों, शराब और वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष गश्ती और छापेमारी अभियान चलाया जा रहा था। इसी क्रम में पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कांड संख्या 261/2025 का मुख्य आरोपी धर्मराज सिंह ठिकाने बदल-बदल कर छिप रहा है। पुलिस ने मानवीय सूचना और तकनीकी साक्ष्यों का मिलान करते हुए शाहकुंड थाना क्षेत्र में घेराबंदी की और आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर लिया। धर्मराज सिंह की गिरफ्तारी को इस पूरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
जून 2025 का वह खौफनाक अपहरण और हत्याकांड का मामला
इस पूरे मामले की जड़ें साल 2025 की एक दर्दनाक घटना से जुड़ी हैं। 12 जून 2025 को पीरपैंती थाना क्षेत्र के परशुरामपुर गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया था, जब बमशंकर सिंह के पुत्र बंटी कुमार सिंह का अचानक अपहरण कर लिया गया। बंटी कुमार के लापता होने के बाद उनके पिता बमशंकर सिंह ने थाने में लिखित आवेदन देकर अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कांड संख्या 261/2025 दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। अपहरण की इस घटना ने पूरे इलाके में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया था और पुलिस पर अपराधियों को जल्द पकड़ने का भारी दबाव था। पुलिस की शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया था कि इस वारदात के पीछे किसी पेशेवर गिरोह का हाथ है, जिसने फिरौती या आपसी रंजिश के चलते इस घटना को अंजाम दिया था।
भवानीपुर गंगा घाट के किनारे बरामद हुआ था क्षत-विक्षत शव
अपहरण के बाद पुलिस और परिजन बंटी कुमार की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन कुछ ही दिनों बाद एक हृदयविदारक खबर सामने आई। अनुसंधान के दौरान पुलिस को भवानीपुर गंगा घाट के किनारे एक अज्ञात शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई। जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शिनाख्त की कार्रवाई की गई, तो वह शव अपहृत बंटी कुमार सिंह का ही निकला। गंगा के किनारे शव मिलने की घटना से इलाके में आक्रोश फैल गया और यह मामला अपहरण से हत्या में तब्दील हो गया। अपराधियों ने न केवल अपहरण किया था, बल्कि साक्ष्य छिपाने की नीयत से शव को नदी के किनारे फेंक दिया था। इस दोहरे हत्याकांड (अपहरण सह हत्या) ने पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर दी थी, जिसके बाद वरीय अधिकारियों ने मामले की कमान अपने हाथों में ले ली।
वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में गठित विशेष जांच टीम
वारदात की गंभीरता और जन आक्रोश को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक, भागलपुर ने मामले के उद्भेदन के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष टीम का गठन किया। इस टीम की निगरानी खुद पुलिस अधीक्षक (नगर) कर रहे थे, जबकि नेतृत्व अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) कहलगांव-02 और डीआईयू (DIU) की टीम को सौंपा गया था। पुलिस की इस विशेष टीम ने मामले की तह तक जाने के लिए हर संभव प्रयास शुरू किए। टीम ने न केवल स्थानीय स्तर पर मुखबिरों का जाल बिछाया, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान का सहारा भी लिया। मोबाइल लोकेशन, टावर डंप डेटा और संदिग्धों की कॉल डिटेल्स खंगालने के बाद पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे, जिससे इस हत्याकांड में शामिल गिरोह की कड़ियां एक-एक कर जुड़ने लगीं।
वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी साक्ष्यों से टूटी अपराधियों की कमर
आज के दौर में अपराधी भले ही कितने भी शातिर क्यों न हों, लेकिन तकनीकी साक्ष्य उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं। पीरपैंती पुलिस ने इस मामले में भी वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग किया। गठित टीम ने प्रारंभिक अनुसंधान के दौरान घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और संदिग्धों की गतिविधियों का तकनीकी विश्लेषण किया। इसी विश्लेषण के आधार पर मुख्य आरोपी धर्मराज सिंह, जो कि चौखंडी (थाना पीरपैंती) का निवासी है, की लोकेशन पुलिस को मिल गई। पुलिस ने पाया कि धर्मराज सिंह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने मोबाइल सिम और ठिकाने बदल रहा था। हालांकि, डीआईयू टीम और पीरपैंती पुलिस की संयुक्त रणनीति के सामने उसकी एक न चली और अंततः उसे शाहकुंड थाना क्षेत्र से दबोच लिया गया।
अब तक छह अपराधियों की हो चुकी है गिरफ्तारी और जेल रवानगी
इस हत्याकांड में शामिल अपराधियों के खिलाफ पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। धर्मराज सिंह की गिरफ्तारी से पहले ही पुलिस इस मामले में संलिप्त पांच अन्य अपराधियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है। उन पांचों अपराधियों से हुई पूछताछ में ही धर्मराज सिंह की मुख्य भूमिका का खुलासा हुआ था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, धर्मराज सिंह ही वह व्यक्ति था जिसने पूरी साजिश की रूपरेखा तैयार की थी। अब मुख्य आरोपी के पकड़े जाने के बाद पुलिस इस मामले में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल करने की प्रक्रिया तेज करेगी। पुलिस का लक्ष्य है कि स्पीडी ट्रायल के माध्यम से इन अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की जघन्य वारदात को अंजाम देने की जुर्रत न कर सके।
पीरपैंती पुलिस की छापेमारी टीम और सघन अभियान का विवरण
धर्मराज सिंह की गिरफ्तारी के लिए चलाए गए इस विशेष छापेमारी अभियान में पीरपैंती थाना और जिला पुलिस के कई अनुभवी अधिकारी शामिल थे। छापेमारी दल का नेतृत्व पु०नि० पंकज कुमार राउत (थानाध्यक्ष पीरपैंती) ने किया। उनके साथ पु०अ०नि० सुनील कुमार, पु०अ०नि० संगम कुमारी और डीआईयू टीम भागलपुर के सदस्य शामिल थे। इसके अलावा पीरपैंती थाना के सशस्त्र बल के जवानों ने भी इस पूरे ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस टीम ने रात के अंधेरे में शाहकुंड के संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी और बिना किसी खून-खराबे के मुख्य आरोपी को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया। थानाध्यक्ष पंकज कुमार राउत ने बताया कि आरोपी से पूछताछ के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिन पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
फरार अपराधियों की तलाश में दबिश और पुलिस की आगामी रणनीति
मुख्य आरोपी धर्मराज सिंह की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस चैन से नहीं बैठी है। पुलिस को सूचना है कि इस हत्याकांड में कुछ और चेहरे पर्दे के पीछे से शामिल थे या उन्होंने अपराधियों को पनाह दी थी। उन फरार अपराधियों और मददगारों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। वरीय पुलिस अधीक्षक ने साफ कर दिया है कि जब तक इस कांड का हर एक दोषी सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जाता, तब तक पुलिस की दबिश जारी रहेगी। भागलपुर पुलिस अब अपराधियों के आर्थिक स्रोतों और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके साथ ही, जिले के अन्य संवेदनशील इलाकों और छिनतई के हॉटस्पॉट्स पर भी गश्त बढ़ा दी गई है ताकि आम जनता के बीच सुरक्षा का भाव बना रहे।
जिले में अपराध नियंत्रण हेतु पुलिस का ‘जीरो टॉलरेंस’ संकल्प
भागलपुर पुलिस इन दिनों अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। चाहे वह अवैध शराब का कारोबार हो, हथियारों की तस्करी हो या फिर इस तरह के जघन्य हत्याकांड, पुलिस हर मोर्चे पर मुस्तैद नजर आ रही है। पीरपैंती की यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि भागलपुर पुलिस पुरानी फाइलों और पुराने केसों को भी उतनी ही गंभीरता से ले रही है जितनी कि वर्तमान की घटनाओं को। आम जनता से भी पुलिस लगातार अपील कर रही है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाने या पुलिस हेल्पलाइन पर दें। द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस मामले की कानूनी प्रक्रिया और आगे की गिरफ्तारियों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है, ताकि आप तक सबसे सटीक और विस्तृत जानकारी पहुंचती रहे।


