मैथिली को बड़ी पहचान: अब Central Board of Secondary Education के पाठ्यक्रम में मातृभाषा के रूप में होगी पढ़ाई

बिहार की प्रमुख भाषाओं में शामिल Maithili को बड़ी उपलब्धि मिली है। अब Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) के पाठ्यक्रम में मैथिली को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता मिल गई है। इसके तहत पहली कक्षा से लेकर माध्यमिक स्तर तक के छात्र मैथिली भाषा की पढ़ाई कर सकेंगे।

Samrat Choudhary ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ सकेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल बताया।

इस मांग को लेकर Gopal Ji Thakur ने 8 फरवरी 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan और शिक्षा राज्य मंत्री Jayant Chaudhary से मुलाकात कर मैथिली को सीबीएसई पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की थी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की पहल के बाद अब मैथिली को औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। मंत्री जयंत चौधरी ने पत्र में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 5 तक और संभव हो तो कक्षा 8 तक मातृभाषा में शिक्षा देने की सिफारिश की गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि National Council of Educational Research and Training (एनसीईआरटी) ने मैथिली सहित 121 भारतीय भाषाओं में प्राइमर तैयार किए हैं और एनसीईआरटी की पुस्तकों का अनुवाद भी मैथिली समेत 22 अनुसूचित भाषाओं में किया जा रहा है।

सीबीएसई के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 से माध्यमिक स्तर पर मैथिली विषय लागू होगा। इसका पाठ्यक्रम सीबीएसई की अकादमिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है।

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