
नई दिल्ली: देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए गठित हाई पावर्ड टास्क फोर्स की कमान देश के जाने-माने उद्योगपति और तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि को सौंपी है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी में है। ऐसे में आइए जानते हैं कि नंदन नीलेकणि कौन हैं और उन्हें यह अहम जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई है।
इन्फोसिस के सह-संस्थापक, तकनीक की दुनिया का बड़ा नाम
नंदन नीलेकणि भारत की अग्रणी आईटी कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक और अध्यक्ष हैं। वर्ष 1981 में उन्होंने एन. आर. नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ मिलकर कंपनी की स्थापना की थी। भारतीय आईटी उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
आधार परियोजना के प्रमुख सूत्रधार
वर्ष 2009 से 2014 तक नंदन नीलेकणि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के संस्थापक अध्यक्ष रहे। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी।
उनके नेतृत्व में आधार परियोजना की शुरुआत हुई, जिसके माध्यम से देश के करोड़ों लोगों को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान मिली। आज आधार सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और डिजिटल लेनदेन का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।
शिक्षा और डिजिटल लर्निंग से भी गहरा जुड़ाव
नंदन नीलेकणि एकस्टेप फाउंडेशन के सह-संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं। यह संस्था तकनीक के माध्यम से बच्चों में बुनियादी साक्षरता और गणितीय दक्षता बढ़ाने के लिए काम करती है। जनवरी 2023 में उन्हें G20 डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ समूह का सह-अध्यक्ष भी बनाया गया था।
आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई
नंदन नीलेकणि का जन्म बेंगलुरु में हुआ। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही उनकी रुचि तकनीक और नवाचार में रही, जिसने उन्हें देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल किया।
राजनीति में भी आजमाई किस्मत
वर्ष 2014 में नंदन नीलेकणि ने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें भाजपा उम्मीदवार अनंत कुमार से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और बाद में एक साक्षात्कार में चुनाव लड़ने के फैसले को अपने जीवन की बड़ी गलतियों में से एक बताया।
कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
तकनीक और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में योगदान के लिए नंदन नीलेकणि को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें पद्म भूषण, जोसेफ शुम्पीटर पुरस्कार, फोर्ब्स एशिया बिजनेसमैन ऑफ द ईयर, टाइम 100, फॉरेन पॉलिसी टॉप 100 ग्लोबल थिंकर्स, निक्केई एशिया पुरस्कार, ईवाई लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और बिजनेस स्टैंडर्ड लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। वर्ष 2024 में टाइम पत्रिका ने उन्हें एआई क्षेत्र के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में भी शामिल किया।
चर्चित पुस्तकों के लेखक भी हैं
नंदन नीलेकणि कई चर्चित पुस्तकों के लेखक हैं। उनकी प्रमुख किताबों में Imagining India, Rebooting India: Realizing a Billion Aspirations और The Art of Bitfulness: Keeping Calm in the Digital World शामिल हैं। इन पुस्तकों में उन्होंने भारत के डिजिटल भविष्य, तकनीक और शासन व्यवस्था पर अपने विचार रखे हैं।
डिजिटल इंडिया की कई प्रमुख पहलों से जुड़ाव
आधार के अलावा नंदन नीलेकणि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल भुगतान प्रणाली और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) जैसी महत्वपूर्ण पहलों से भी जुड़े रहे हैं। बड़े पैमाने पर डिजिटल प्रणालियां विकसित करने का उनका अनुभव उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए मजबूत विकल्प बनाता है।
परीक्षा सुधारों की जिम्मेदारी क्यों मिली?
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करना चाहती है। सरकार का लक्ष्य परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। आधार जैसी विशाल डिजिटल प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू करने के अनुभव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नंदन नीलेकणि को परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता सौंपी है।
टास्क फोर्स में कौन-कौन शामिल हैं?
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली इस उच्चस्तरीय समिति में कई अनुभवी विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। इनमें इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व खुफिया ब्यूरो प्रमुख तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमृत लाल मीणा शामिल हैं।
यह समिति देश की परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा करेगी और परीक्षा सुरक्षा, संचालन, तकनीकी निगरानी तथा प्रशासनिक सुधारों पर अपनी विस्तृत सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगी।


