महिला आरक्षण कानून लागू करने की मांग को लेकर भागलपुर में ऐपवा का मार्च, बिना देरी कानून लागू करने पर जोर

भागलपुर में महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन (ऐपवा) की ओर से व्यापक विरोध मार्च निकाला गया। संगठन ने मांग की कि महिला आरक्षण कानून को जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों से अलग करते हुए वर्तमान संसद की सीटों के आधार पर बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया का इंतजार किए लागू किया जाए। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने यह भी मांग उठाई कि महिला आरक्षण के भीतर पिछड़ा, अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित समुदायों की महिलाओं के लिए भी उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

यह मार्च भागलपुर के स्टेशन चौक से शुरू हुआ और शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए घंटाघर चौक तक पहुंचा। रास्ते भर प्रदर्शनकारियों ने महिला अधिकारों, राजनीतिक भागीदारी और समान प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को लेकर नारे लगाए। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं ने मार्च में हिस्सा लिया और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। मुख्य बाजार और खलीफाबाग चौक से गुजरते हुए प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की मांग दोहराई।

घंटाघर चौक पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की जिला सचिव रेणु देवी ने कहा कि महिला आरक्षण कानून को लागू करने में लगातार हो रही देरी महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाती है। उनका कहना था कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ने के कारण इसके लागू होने में अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि संसद की वर्तमान संरचना के आधार पर ही कानून को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए ताकि महिलाओं को लंबे समय से प्रतीक्षित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके।

उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त भागीदारी देने का वादा वर्षों से किया जाता रहा है, लेकिन अब तक इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया। उनका आरोप था कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनाने के बजाय इसे महिलाओं के अधिकार और लोकतांत्रिक भागीदारी के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति गंभीर है तो उसे बिना किसी अतिरिक्त शर्त के इस कानून को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

सभा के दौरान महिला आरक्षण के भीतर सामाजिक न्याय का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि केवल महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पिछड़े, अतिपिछड़े, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित वर्गों की महिलाओं को भी उनके अनुपात के अनुसार प्रतिनिधित्व मिले। उनका कहना था कि इससे समाज के सभी वर्गों की महिलाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में समान अवसर मिल सकेगा और लोकतंत्र अधिक समावेशी बनेगा।

ऐपवा की जिला उपाध्यक्ष मनोरमा देवी ने अपने संबोधन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र-युवा आंदोलनों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर देशभर में आवाज उठाई जा रही है और इन आंदोलनों के साथ एकजुटता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के सामने रोजगार और शिक्षा से जुड़ी कई चुनौतियां मौजूद हैं, जिनका समाधान सरकार को प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।

उन्होंने जीविका दीदियों से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया और कहा कि कई स्थानों पर उन्हें काम से हटाए जाने की आशंका और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, यदि महिलाओं के रोजगार और आजीविका पर संकट आता है तो इसका सीधा असर उनके परिवारों और सामाजिक स्थिति पर पड़ता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संगठन इस मुद्दे पर भी लगातार आवाज उठाएगा और प्रभावित महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा।

मार्च में शामिल महिलाओं ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारों या योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना समय की जरूरत है। उनका मानना था कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ने से महिलाओं से जुड़े मुद्दों को अधिक मजबूती के साथ उठाया जा सकेगा और नीति निर्माण में उनकी भूमिका भी बढ़ेगी।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और समान राजनीतिक भागीदारी के पक्ष में कई नारे लगाए। बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और बड़ी संख्या में महिलाएं पूरे मार्च के दौरान अपनी मांगों के समर्थन में डटी रहीं। वक्ताओं ने कहा कि महिला आरक्षण केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता और लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम में संगठन की कई महिला कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। मार्च और सभा के दौरान रेणु देवी, मनोरमा देवी, मीरा देवी, उषा देवी, रानी देवी, रुबी देवी, अनखी देवी, गायत्री देवी, जयंती देवी, निक्कू देवी, सीता देवी, रेखा देवी, सविता देवी, मालती देवी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। इसके अलावा भाकपा (माले) के राज्य कमिटी सदस्य मुकेश मुक्त और कैलाश मंडल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

कार्यक्रम के समापन पर ऐपवा ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण कानून को बिना किसी देरी के लागू कराने, आरक्षण के भीतर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने और महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि जब तक महिला आरक्षण कानून प्रभावी रूप से लागू नहीं हो जाता और सभी वर्गों की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तब तक विभिन्न स्तरों पर आंदोलन और जनजागरण अभियान जारी रखा जाएगा।

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