22 साल पुराने रेप केस में महाराष्ट्र पुलिस की भागलपुर में दबिश, फरार आरोपी की तलाश में शाहपुर गांव में छापेमारी

भागलपुर/नाथनगर। कानून के हाथ लंबे होते हैं और वे अपराधी को पाताल से भी खींच लाते हैं—यह कहावत मंगलवार को भागलपुर जिले के नाथनगर थाना क्षेत्र में चरितार्थ होती नजर आई। बिहार के भागलपुर और महाराष्ट्र के नागपुर के बीच का फासला हजारों किलोमीटर का है, लेकिन अपराध और न्याय की कड़ी ने इन दोनों शहरों को एक बार फिर जोड़ दिया। महाराष्ट्र पुलिस की एक विशेष टीम ने नाथनगर के शाहपुर गांव में एक ऐसी छापेमारी की, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। यह कार्रवाई किसी नए अपराध को लेकर नहीं, बल्कि 22 साल पुराने एक जघन्य बलात्कार कांड के फरार मुख्य आरोपी की तलाश में की गई थी। नागपुर के सावनेर थाना क्षेत्र में वर्ष 2002 में जिस व्यक्ति ने कानून की धज्जियां उड़ाई थीं, वह दो दशकों तक खुद को सुरक्षित मानकर अपनी पहचान छिपाए बैठा था। लेकिन महाराष्ट्र पुलिस के अटूट धैर्य और तकनीकी सुरागों ने आखिरकार उसे उसके गांव शाहपुर तक ट्रैक कर लिया। हालांकि छापेमारी के दौरान आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहा, लेकिन पुलिस की इस दबिश ने यह साफ कर दिया है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, उसकी फाइल कभी बंद नहीं होती।

सावनेर कांड संख्या 333/2002: क्या है पूरा मामला?

​इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत आज से 22 साल पहले, सन 2002 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के सावनेर थाना क्षेत्र में हुई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उस समय सावनेर थाना कांड संख्या 333/2002 दर्ज किया गया था, जिसमें निलेश कुमार को मुख्य अभियुक्त बनाया गया था। निलेश पर एक महिला के साथ बलात्कार करने और उसे जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप थे। उस वक्त वारदात को अंजाम देने के बाद निलेश महाराष्ट्र पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गया था।

​2002 का वह दौर तकनीक के मामले में आज जैसा उन्नत नहीं था, जिसका फायदा उठाकर निलेश ने अपनी पहचान और ठिकाना पूरी तरह बदल लिया। नागपुर पुलिस ने उस समय काफी तलाश की, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ा। समय बीतता गया और मामला ठंडे बस्ते में जाता दिखा, लेकिन सावनेर पुलिस की ‘पेंडिंग फाइल्स’ में निलेश का नाम हमेशा दर्ज रहा। हाल के दिनों में महाराष्ट्र पुलिस ने पुराने और फरार अपराधियों की धरपकड़ के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया, जिसके तहत निलेश की कुंडली फिर से खंगाली गई। तकनीकी अनुसंधान और बिहार पुलिस के साथ साझा किए गए इनपुट्स के आधार पर यह पुष्टि हुई कि निलेश कुमार भागलपुर के नाथनगर इलाके के शाहपुर गांव में छिपा हो सकता है।

शाहपुर में छापेमारी: पुलिस की घेराबंदी और सन्नाटा

​मंगलवार की सुबह जब शाहपुर गांव के लोग अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे, तभी अचानक महाराष्ट्र पुलिस की गाड़ियां वहां पहुँचीं। टीम का नेतृत्व दरोगा शरद प्रसाद चौधरी कर रहे थे। महाराष्ट्र पुलिस ने सबसे पहले नाथनगर थाना पहुँचकर स्थानीय पुलिस को अपनी आमद की जानकारी दी और कानूनन सहयोग मांगा। स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय बिठाकर टीम सीधे शाहपुर गांव स्थित निलेश कुमार के संभावित ठिकानों पर पहुँची।

​पुलिस की इस अचानक दबिश से गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। टीम ने निलेश के पुश्तैनी घर और उसके रिश्तेदारों के ठिकानों पर सघन तलाशी ली। दरोगा शरद प्रसाद चौधरी ने बताया कि पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली थी कि निलेश पिछले कुछ समय से गुपचुप तरीके से गांव में रह रहा था। हालांकि, पुलिस के पहुँचने से ठीक पहले उसे भनक लग गई और वह मौके से खिसकने में सफल रहा। पुलिस ने घर के भीतर मौजूद सामानों और दस्तावेजों की भी जांच की ताकि यह पता चल सके कि इन 22 सालों में वह कहाँ-कहाँ रहा और उसकी सक्रियता किन क्षेत्रों में रही।

22 साल की फरारी और स्थानीय सहयोग की भूमिका

​इस मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोई व्यक्ति 22 साल तक पुलिस की गिरफ्त से कैसे बाहर रह सकता है? दरोगा शरद प्रसाद चौधरी के अनुसार, निलेश कुमार ने अपनी फरारी के दौरान बहुत ही शातिराना तरीका अपनाया था। वह लंबे समय तक अलग-अलग राज्यों में छिपकर काम करता रहा और कभी भी एक जगह ज्यादा समय नहीं बिताया। उसने अपने परिवार के साथ भी संपर्क को बहुत ही सीमित रखा था।

​छापेमारी के दौरान पुलिस ने गांव के जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों से भी बात की। दरोगा ने ग्रामीणों से स्पष्ट कहा कि एक जघन्य अपराधी को शरण देना या उसकी जानकारी छिपाना भी कानूनन जुर्म है। पुलिस ने जनप्रतिनिधियों से सहयोग मांगा है कि यदि निलेश दोबारा गांव के आसपास देखा जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन या सीधे महाराष्ट्र पुलिस को दी जाए। ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि उनके बीच रह रहा व्यक्ति महाराष्ट्र के एक पुराने और गंभीर मामले का वांछित अपराधी है।

नोटिस चस्पा और कुर्की-जब्ती की चेतावनी

​आरोपी के घर पर न मिलने के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने अपनी कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। दरोगा शरद प्रसाद चौधरी ने निलेश कुमार के घर के मुख्य द्वार और गांव के सार्वजनिक स्थानों पर माननीय न्यायालय द्वारा जारी किया गया नोटिस चस्पा किया। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से निलेश कुमार को निर्देश दिया गया है कि वह अविलंब सावनेर के संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण करे।

​पुलिस ने चेतावनी दी है कि यदि वह तय समय-सीमा के भीतर उपस्थित नहीं होता है, तो उसके विरुद्ध धारा 82 और 83 (कुर्की-जब्ती) के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसका अर्थ है कि उसकी चल और अचल संपत्ति को सरकार द्वारा जब्त कर लिया जाएगा। महाराष्ट्र पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अब खाली हाथ लौटने वाले नहीं हैं। उन्होंने नाथनगर पुलिस से संपर्क बनाए रखा है और स्थानीय खुफिया तंत्र को सक्रिय कर दिया है। पुलिस का मानना है कि निलेश ज्यादा दिनों तक भाग नहीं पाएगा क्योंकि अब उसकी पहचान उजागर हो चुकी है और उसके सभी संभावित ठिकाने पुलिस की निगरानी में हैं।

अंतर्राज्यीय पुलिस समन्वय और न्याय की उम्मीद

​शाहपुर की यह छापेमारी अंतर्राज्यीय पुलिसिंग (Inter-state Policing) के एक सफल समन्वय का उदाहरण है। भागलपुर पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस को पूरा सहयोग प्रदान किया है। दरोगा शरद प्रसाद चौधरी ने स्थानीय पुलिस की तत्परता की सराहना की और कहा कि बिना स्थानीय सहयोग के इतने पुराने मामले के अपराधी तक पहुँचना नामुमकिन था।

​यह घटना उन तमाम अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो यह समझते हैं कि समय बीतने के साथ उनके गुनाह मिट जाएंगे। 22 साल बाद भी सावनेर पुलिस का भागलपुर पहुँचना यह दर्शाता है कि कानून की डायरी में न्याय की स्याही कभी सूखती नहीं है। पीड़ित पक्ष, जो शायद दो दशकों से न्याय की उम्मीद छोड़ चुका होगा, उसके लिए यह पुलिसिया कार्रवाई एक नई किरण की तरह है। नाथनगर क्षेत्र में इस छापेमारी के बाद से हड़कंप मचा हुआ है और पुलिस अन्य फरार वारंटियों की सूची भी खंगाल रही है।

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