बांकीपुर उपचुनाव: गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त निगरानी, फ्लाइंग स्क्वॉड की गाड़ियों में लगेगा GPS, हर गतिविधि पर रहेगी प्रशासन की नजर

पटना। राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग ने निगरानी व्यवस्था को और अधिक सख्त करने का फैसला किया है। चुनाव के दौरान अवैध गतिविधियों, मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयास, नकदी, शराब और अन्य प्रलोभन वाली सामग्रियों के वितरण पर प्रभावी रोक लगाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है। इसी क्रम में फ्लाइंग स्क्वॉड और सर्विलांस टीमों के वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाने का निर्णय लिया गया है, ताकि उनकी गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी की जा सके और किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित हो।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में चुनाव से जुड़े अधिकारियों और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों और आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाए।

बैठक में सामान्य प्रेक्षक शिव सहाय अवस्थी, पुलिस प्रेक्षक मुख्तार मोहसिन, व्यय प्रेक्षक शिव प्रताप सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और चुनावी खर्च की निगरानी को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था पहले से सक्रिय कर दी गई है और सभी टीमें लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर रही हैं।

व्यय कोषांग के वरीय प्रभारी पदाधिकारी राजीव रंजन प्रभाकर ने जानकारी दी कि फ्लाइंग स्क्वॉड और स्टैटिक सर्विलांस टीमों की तैनाती पूरी कर ली गई है। ये टीमें लगातार चुनाव क्षेत्र में गश्त कर रही हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। चुनाव के दौरान यदि कहीं बड़ी मात्रा में नकदी, शराब, उपहार सामग्री या अन्य संदिग्ध वस्तुएं ले जाई जाती हैं तो संबंधित टीम तत्काल कार्रवाई करेगी।

प्रशासन ने पहली बार निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड के वाहनों में जीपीएस लगाने का निर्णय लिया है। जीपीएस सिस्टम की मदद से कंट्रोल रूम से टीमों की लोकेशन और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सभी टीमें निर्धारित क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और शिकायत मिलने पर समय पर मौके पर पहुंच रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से चुनाव के दौरान निगरानी और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनेगी।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने जांच के दौरान अधिकारियों को शालीनता और संवेदनशीलता बनाए रखने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी वाहन या व्यक्ति की जांच पूरी गरिमा के साथ की जाए। विशेष रूप से महिला मतदाताओं या महिलाओं की जांच केवल महिला अधिकारियों द्वारा ही कराई जाए। इससे जांच प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की असुविधा या विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

सामान्य प्रेक्षक शिव सहाय अवस्थी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरे निर्वाचन क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को नियमों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कहीं भी आचार संहिता का उल्लंघन होता है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

व्यय प्रेक्षक शिव प्रताप सिंह ने चुनावी खर्च पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी उम्मीदवारों को निर्वाचन व्यय के लिए अलग बैंक खाता खोलना अनिवार्य होगा। चुनाव प्रचार से संबंधित प्रत्येक खर्च का रिकॉर्ड उसी खाते के माध्यम से रखा जाएगा। इसके अलावा संदिग्ध और असामान्य बैंक लेनदेन पर भी विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि चुनाव के दौरान अवैध धन के उपयोग को रोका जा सके।

बैठक में आयकर विभाग, वाणिज्य कर विभाग, मद्य निषेध विभाग तथा अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों को भी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए। सभी विभागों को सूचना साझा करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल जिला नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाने के लिए कहा गया है। प्रशासन का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना है।

इसके बाद जिलास्तरीय स्टैंडिंग कमेटी की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें चुनाव प्रचार से जुड़े नियमों पर विस्तार से चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि कोई भी आमसभा, रैली, पदयात्रा या जुलूस बिना पूर्व अनुमति के आयोजित नहीं किया जा सकेगा। सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति प्राप्त करनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही चुनाव प्रचार से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।

अधिकारियों ने बताया कि पंपलेट छपवाने, लाउडस्पीकर के उपयोग, प्रचार वाहनों के संचालन और अन्य चुनावी गतिविधियों के लिए भी पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। इसके लिए जिला और अनुमंडल स्तर पर सिंगल विंडो सिस्टम पहले से संचालित है, जहां उम्मीदवार और राजनीतिक दल आवेदन देकर निर्धारित समय के भीतर अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बनाई गई है।

बैठक में मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी मतदान केंद्रों पर पेयजल, बिजली, शौचालय, रैंप, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग मतदाताओं और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, धनबल, बाहुबल या मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति या संगठन द्वारा चुनावी नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए निगरानी टीमें 24 घंटे सक्रिय रहेंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव राजधानी की महत्वपूर्ण सीट होने के कारण सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन की चुनौती निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने की है। जीपीएस आधारित निगरानी, फ्लाइंग स्क्वॉड की सक्रिय तैनाती, चुनावी खर्च की कड़ी निगरानी और आदर्श आचार संहिता के सख्त पालन जैसे कदम चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

फिलहाल जिला प्रशासन ने चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मतदान से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जा सके। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक गतिविधि की लगातार निगरानी की जाएगी और किसी भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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