
- बिहार के गया जिले में शराब माफियाओं ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक नया और अजीबोगरीब तरीका अपनाया, जहाँ सब्जियों के ढेर के नीचे भारी मात्रा में विदेशी शराब की तस्करी की जा रही थी।
- बहेरा थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए डोभी-चतरा मुख्य मार्ग पर एक वाहन को रोका, जिसकी तलाशी के दौरान 1066 लीटर अवैध विदेशी शराब बरामद हुई।
- माफियाओं ने शराब के 119 कार्टूनों को बड़ी ही चतुराई से खीरा और कटहल जैसी सब्जियों के नीचे छिपा रखा था, ताकि गंध और दृश्यता दोनों से बचा जा सके।
- पुलिस ने मौके से वाहन चालक अरविंद मिश्रा को गिरफ्तार किया है, जो जमुई जिले का रहने वाला बताया जा रहा है; उससे पूछताछ में शराब तस्करी के अंतर-राज्यीय नेटवर्क के कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
- गया की यह बड़ी कामयाबी बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में एक बड़ा प्रहार है, जो यह दर्शाता है कि पुलिस अब माफियाओं के हर नए हथकंडे को पहचानने में सक्षम हो चुकी है।
गया (द वॉयस ऑफ बिहार)।
सब्जी की आड़ में ‘जहर’ की सप्लाई: गया पुलिस की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक
बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद शराब माफिया अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। गया जिला, जो झारखंड की सीमा से सटा होने के कारण तस्करी के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है, वहां माफियाओं ने पुलिस को चकमा देने के लिए ‘किचन’ के सामान का सहारा लेना शुरू कर दिया है। रविवार को बहेरा थाना पुलिस ने एक ऐसी ही हाई-प्रोफाइल तस्करी का भंडाफोड़ किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरत में डाल दिया है। डोभी-चतरा मुख्य मार्ग पर हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने न केवल भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की, बल्कि यह भी उजागर किया कि कैसे सब्जियों के परिवहन की आड़ में बिहार के भीतर ‘नशे की खेप’ पहुँचाई जा रही है।
डोभी-चतरा मार्ग पर बिछाया गया जाल: बहेरा पुलिस की सक्रियता
बहेरा थानाध्यक्ष रवि रंजन कुमार को एक गुप्त सूचना मिली थी कि झारखंड की ओर से एक वाहन में अवैध शराब की बड़ी खेप बिहार में प्रवेश करने वाली है। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष ने बिना समय गंवाए एक विशेष टीम का गठन किया और थाना गेट के सामने ही डोभी-चतरा मुख्य मार्ग पर सघन वाहन जांच अभियान शुरू कर दिया। इस दौरान हर छोटे-बड़े वाहन की बारीकी से तलाशी ली जाने लगी। इसी बीच एक संदिग्ध वाहन पुलिस के घेरे में आया। चालक ने शुरू में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और बताया कि वाहन में केवल बाजार में बेचने के लिए खीरा और कटहल लदा हुआ है।
खीरा और कटहल के नीचे छिपे थे 119 कार्टून: तस्करी का नया तरीका
जब पुलिस टीम ने वाहन के पिछले हिस्से की तलाशी शुरू की, तो ऊपरी सतह पर ताजी सब्जियां—खीरा और कटहल—दिखाई दीं। पहली नजर में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन पुलिस को चालक की घबराहट पर शक हुआ। जब सब्जियों को हटाया गया, तो उसके नीचे लकड़ी के फट्टे और तिरपाल का एक घेरा मिला। उसे हटाते ही पुलिस के सामने विदेशी शराब का जखीरा खुल गया।
पुलिस ने एक-एक कर कुल 119 कार्टून बरामद किए। गिनती करने पर पता चला कि इसमें कुल 1066 लीटर विदेशी शराब भरी हुई थी। शराब की बोतलें विभिन्न ब्रांडों की थीं और उन्हें बड़ी ही सावधानी से पैक किया गया था ताकि सड़कों के झटकों से वे टूटे नहीं और उनकी गंध बाहर न आए। माफियाओं का मानना था कि सब्जियों की गंध और उनके ढेर के कारण पुलिस गहराई से तलाशी नहीं लेगी, लेकिन बहेरा पुलिस की सतर्कता ने उनके इस प्लान पर पानी फेर दिया।
जमुई का चालक गिरफ्तार: पूछताछ में खुलेगा बड़ा नेटवर्क
पुलिस ने मौके से ही वाहन के चालक अरविंद मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। वह मूल रूप से जमुई जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में चालक ने स्वीकार किया है कि वह यह खेप झारखंड के किसी बड़े डिपो से लेकर बिहार के आंतरिक जिलों में पहुँचाने वाला था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस शराब का असली मालिक कौन है और इसे गया के अलावा किन-किन जिलों में सप्लाई किया जाना था। जमुई के इस चालक का तार किसी बड़े अंतर-राज्यीय गिरोह से जुड़े होने की पूरी संभावना है।
शराबबंदी का कड़वा सच: मोतिहारी की त्रासदी और सिस्टम की चुनौती
गया में हुई यह बरामदगी एक तरफ पुलिस की सफलता है, तो दूसरी तरफ बिहार में जारी शराब के अवैध व्यापार की भयावहता को भी दर्शाती है। हाल ही में मोतिहारी में हुए जहरीली शराब कांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। वहां इस कांड में मरने वालों की संख्या आठ तक पहुँच चुकी है, जिसमें मोहम्मद इलियास अंसारी जैसे लोग शामिल हैं जिन्होंने अपनी बेटी की विदाई के तुरंत बाद शराब पी थी और अपनी जान गंवा बैठे। मोतिहारी की यह घटना और गया की यह बरामदगी यह बताती है कि जब तक शराब की यह अवैध चेन नहीं टूटेगी, तब तक मासूम जानें जाती रहेंगी।
पुलिस का आधुनिकीकरण: अपराधियों के खिलाफ बढ़ती ताकत
माफियाओं के इन बढ़ते हौसलों को देखते हुए बिहार पुलिस अब खुद को और भी अधिक आधुनिक बना रही है। गृह विभाग ने हाल ही में 43.42 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद खरीदने की मंजूरी दी है। इसमें इशापुर राइफल फैक्ट्री से नाइन एमएम की 4000 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौलें खरीदी जा रही हैं, ताकि पुलिस बल अपराधियों का डटकर मुकाबला कर सके। गया जैसी कार्रवाई में जहां मुठभेड़ की संभावना बनी रहती है, वहां ये आधुनिक हथियार पुलिस के मनोबल को बढ़ाएंगे। साथ ही, जवानों को प्रशिक्षण देने के लिए पुणे की खड़की फैक्ट्री और जलगांव की वरनगांव फैक्ट्री से सवा लाख के करीब ब्लैंक गोलियां भी मंगवाई जा रही हैं।
सूचना और प्रसारण: जनता को जागरूक करने का प्रयास
इस तरह की बड़ी बरामदगी और शराब के खतरों से जुड़ी जानकारी अब डिजिटल माध्यमों से जनता तक तेजी से पहुँच रही है। जैसा कि लोकसभा में भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में बताया गया था, बिहार में सूचना सेवाओं का व्यापक डिजिटल विस्तार किया गया है। डीडी बिहार, जो एक 24×7 समर्पित चैनल है, प्रदेश की हर छोटी-बड़ी खबर को जनता तक पहुँचाता है। इसके अलावा “न्यूज़ ऑन एयर” ऐप और प्रसार भारती के नए ओटीटी प्लेटफॉर्म “वेव्स” (Waves) के माध्यम से लोग अब कहीं भी बैठकर शराबबंदी की हकीकत और पुलिस की कार्रवाइयों से अपडेट रह सकते हैं। सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को भी केंद्र सरकार की स्कीम के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग शराब जैसी सामाजिक बुराई के प्रति जागरूक हो सकें।
सतर्कता ही है सबसे बड़ा हथियार
गया के बहेरा थाने की यह कार्रवाई माफियाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि वे चाहे जितने भी नए तरीके अपना लें, कानून की नजरों से बच नहीं सकते। सब्जियों के नीचे शराब छिपाना माफियाओं की हताशा को दर्शाता है, क्योंकि पुलिस की सख्ती ने उनके पारंपरिक रास्तों को बंद कर दिया है। हालांकि, जमुई जैसे दूर के जिलों के लोगों का इस तस्करी में शामिल होना यह बताता है कि इस अवैध धंधे का जाल काफी फैला हुआ है। प्रशासन को चाहिए कि वह न केवल छोटे चालकों को पकड़े, बल्कि उन ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुँचे जो झारखंड और अन्य राज्यों से बैठकर बिहार की शांति और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।


