सासाराम मैरिज हॉल कांड: 23 महिलाओं को कोर्ट से राहत, ‘आरोपी’ नहीं बल्कि ‘पीड़ित’ मानकर किया गया रिहा

सासाराम, सोमवार (06 अप्रैल 2026): रोहतास जिले के सासाराम में चर्चित मलियाबाग मैरिज हॉल कांड में सोमवार को बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया। छापेमारी के दौरान हिरासत में ली गई 23 वयस्क महिलाओं को कोर्ट ने आरोपी मानने से इनकार करते हुए उन्हें ‘पीड़ित’ की श्रेणी में रखा। न्यायालय ने उनका बयान दर्ज करने के बाद उन्हें रिहा करने का आदेश दे दिया।

कोर्ट ने बदली मामले की दिशा
दावथ थाना क्षेत्र के मलियाबाग स्थित एक मैरिज हॉल में हाल ही में हुई छापेमारी के बाद यह मामला सुर्खियों में था। पुलिस ने मौके से कई युवक-युवतियों को हिरासत में लिया था। सोमवार को 23 बालिग महिलाओं को सासाराम सिविल कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन महिलाओं के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

‘पीड़ित’ मानने के पीछे क्या है वजह?
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (पॉक्सो एक्ट) हीरा प्रताप सिंह के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई कि इन महिलाओं को बहला-फुसलाकर या दबाव में इस तरह की गतिविधियों में शामिल किया गया था। ऐसे में अदालत ने उन्हें आरोपी के बजाय पीड़ित माना। कोर्ट का मानना है कि असल जिम्मेदारी उन लोगों की है, जिन्होंने इस अवैध गतिविधि को संचालित किया।

कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दी गई राहत
सभी महिलाओं के बयान भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के तहत BNSS की धारा 183 (पूर्व में CRPC की धारा 164) के अंतर्गत दर्ज किए गए। इसके बाद अदालत ने उन्हें सुरक्षित अपने घर जाने की अनुमति दे दी। इस दौरान यह भी सुनिश्चित किया गया कि महिलाओं की पहचान और सुरक्षा बनी रहे।

पहले नाबालिग लड़कियों को भी मिली थी राहत
इस मामले में इससे पहले 18 नाबालिग लड़कियों को पॉक्सो कोर्ट में पेश किया गया था। उन्हें भी कानून के तहत संरक्षण दिया गया था। इससे साफ है कि प्रशासन इस मामले को संवेदनशीलता के साथ संभाल रहा है।

छापेमारी से हुआ था बड़ा खुलासा
बीते 3 अप्रैल को बिक्रमगंज के एसडीएम प्रभात कुमार ने गुप्त सूचना के आधार पर ‘प्रकाश मैरिज हॉल’ में छापा मारा था। छापेमारी के दौरान करीब 80 युवक-युवतियों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया। इसके बाद प्रशासन ने मैरिज हॉल को सील कर दिया और संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

अब मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कसने की तैयारी
पुलिस अब इस मामले के मुख्य आरोपियों—मैरिज हॉल संचालकों, होटल मालिकों और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों—पर फोकस कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

समाज और कानून के लिए बड़ा संदेश
इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून अब ऐसे मामलों में महिलाओं को सीधे दोषी ठहराने के बजाय उनकी परिस्थितियों और मजबूरी को भी समझ रहा है। यह निर्णय पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा और असली अपराधियों तक पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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