
देश के चर्चित लैंड फॉर जॉब केस में आज का दिन लालू परिवार के लिए अहम रहा। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने 9 मार्च से ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया। इस दौरान जांच एजेंसी अपने सबूत पेश करेगी।
सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए, जबकि मीसा भारती और हेमा यादव व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद रहीं।
व्यक्तिगत पेशी से राहत
अदालत ने उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को देखते हुए लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी को व्यक्तिगत पेशी से राहत प्रदान कर दी। आरोपियों की ओर से इस संबंध में आवेदन दाखिल किया गया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
क्या है लैंड फॉर जॉब मामला
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी की भर्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई।
सीबीआई की जांच में दावा किया गया है कि रेलवे अधिकारियों और लालू परिवार के करीबी लोगों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां की गईं और इसके बदले बेनामी संपत्तियों का लेन-देन हुआ।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने पहले टिप्पणी करते हुए कहा था कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया। अदालत ने आरोपियों की ओर से दायर बरी किए जाने की याचिका को खारिज कर दिया था।
इस मामले में कोर्ट ने 41 लोगों पर आरोप तय किए हैं, जबकि 52 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
राजनीतिक साजिश का आरोप
जांच एजेंसियों का कहना है कि सरकारी नौकरी को सौदेबाजी का जरिया बनाया गया और इसका उद्देश्य जमीन हड़पना था। वहीं, आरोपियों ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित मामला बताया है।


