
पटना। बिहार में हाल के दिनों में अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं के बाद अग्निशमन विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है। राजधानी पटना समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में अस्पतालों और होटलों की फायर सेफ्टी जांच तेज कर दी गई है। इसी क्रम में चर्चित शिक्षाविद खान सर से जुड़े अस्पताल को भी अग्निशमन विभाग ने नोटिस जारी किया है। विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर सभी सुरक्षा खामियों को दूर करने का निर्देश दिया है। चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में कमियां दूर नहीं होने पर अस्पताल के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई की जा सकती है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार में अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मुजफ्फरपुर में हुए दर्दनाक अस्पताल अग्निकांड के बाद राज्य सरकार और अग्निशमन विभाग सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहे हैं।
जांच में मिलीं सुरक्षा से जुड़ी गंभीर खामियां
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पटना स्थित खान हेल्थ केयर अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान अस्पताल परिसर में फायर सेफ्टी से संबंधित कई आवश्यक मानकों का पालन नहीं पाया गया।
निरीक्षण टीम ने सुरक्षा उपकरणों, आपातकालीन निकास मार्गों, फायर अलार्म सिस्टम, अग्निशमन यंत्रों की स्थिति तथा आपदा प्रबंधन तैयारियों का आकलन किया। इस दौरान कई ऐसी कमियां सामने आईं जिन्हें मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए गंभीर माना गया।
विभाग का कहना है कि अस्पतालों जैसी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में मरीज, डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी मौजूद रहते हैं।
15 दिन का मिला समय
अग्निशमन विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर सभी कमियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर दूर करने का निर्देश दिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अस्पताल को 15 दिनों का समय दिया गया है ताकि वह सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक सुधार कर सके।
अधिकारियों का कहना है कि नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। यदि उस समय भी आवश्यक सुधार नहीं पाए गए तो अस्पताल के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी संस्थान को विशेष छूट नहीं दी जाएगी, चाहे वह कितना भी चर्चित या प्रभावशाली क्यों न हो।
पूरे पटना में चल रहा विशेष अभियान
अस्पताल को नोटिस जारी करने की कार्रवाई किसी एक संस्थान तक सीमित नहीं है। दरअसल, बिहार अग्निशमन विभाग ने राजधानी पटना में व्यापक फायर सेफ्टी जांच अभियान शुरू किया है।
पिछले कुछ दिनों में विभाग की विभिन्न टीमों ने शहर के दर्जनों अस्पतालों, निजी स्वास्थ्य केंद्रों और होटलों का निरीक्षण किया है। इस अभियान का उद्देश्य संभावित हादसों को रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
जांच के दौरान संस्थानों में मौजूद अग्निशमन उपकरणों की स्थिति, इमरजेंसी एग्जिट, सीसीटीवी कैमरे, पानी की उपलब्धता, अलार्म सिस्टम और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की विस्तृत समीक्षा की जा रही है।
60 से अधिक संस्थानों की जांच
अधिकारियों के अनुसार पिछले दो दिनों में लगभग 60 से 70 अस्पतालों और होटलों का निरीक्षण किया गया है। इस दौरान कई संस्थानों में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं।
कुछ जगहों पर अग्निशमन यंत्र निष्क्रिय पाए गए, जबकि कई भवनों में आपातकालीन निकास मार्ग पर्याप्त नहीं थे। कई संस्थानों में कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में बचाव कार्य का प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कमियां किसी भी आपात स्थिति में बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। इसलिए विभाग ने इन्हें गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधार के निर्देश जारी किए हैं।
पांच अस्पतालों पर सीलिंग की कार्रवाई शुरू
निरीक्षण अभियान के दौरान कुछ अस्पतालों में गंभीर स्तर की सुरक्षा खामियां सामने आईं। अधिकारियों का कहना है कि इन संस्थानों में किसी भी दुर्घटना की स्थिति में मरीजों और कर्मचारियों की जान को बड़ा खतरा हो सकता था।
इसी को ध्यान में रखते हुए पांच अस्पतालों के खिलाफ सीलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन अस्पतालों को पहले ही सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं होने पर अब प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
विभाग का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई अन्य संस्थानों के लिए भी एक चेतावनी का काम करेगी और वे समय रहते सुरक्षा मानकों को पूरा करने का प्रयास करेंगे।
मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद बढ़ी सख्ती
बिहार में अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की चिंता मुजफ्फरपुर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद और बढ़ गई है। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था।
अस्पताल में लगी आग के कारण कई लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे ने स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया। इसके बाद राज्यभर में अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा जांच तेज कर दी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अस्पतालों में समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और मॉक ड्रिल आयोजित की जाए तो इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं
अग्निशमन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी संस्था को परेशान करना नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अस्पताल, होटल और अन्य सार्वजनिक भवन ऐसे स्थान हैं जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं। ऐसे में आग जैसी आपदा की स्थिति में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
इसी कारण विभाग अब सुरक्षा मानकों के अनुपालन को लेकर पूरी तरह गंभीर है। जिन संस्थानों में कमियां पाई जा रही हैं, उन्हें समय सीमा देकर सुधार का अवसर दिया जा रहा है, लेकिन उसके बाद भी सुधार नहीं होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बिहार में सुरक्षा मानकों पर बढ़ा फोकस
राज्य में चल रहे इस विशेष अभियान को सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन चाहता है कि अस्पतालों और होटलों में फायर सेफ्टी नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित हो ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
फिलहाल खान हेल्थ केयर अस्पताल को दिए गए नोटिस ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि निर्धारित 15 दिनों के भीतर अस्पताल प्रबंधन आवश्यक सुधार करता है या फिर विभाग को आगे की कार्रवाई करनी पड़ती है। आने वाले दिनों में दोबारा होने वाली जांच इस मामले की दिशा तय करेगी।


