​खगौल सोना लूटकांड: पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी

पटना/खगौल। बिहार की राजधानी से सटे खगौल इलाके में बीते 4 अप्रैल को हुई 15 किलो सोने की सनसनीखेज डकैती ने न केवल पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी थी, बल्कि आम जनता के बीच भी सुरक्षा को लेकर एक गहरा खौफ पैदा कर दिया था। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब कानून के लंबे हाथों ने अपराधियों की गर्दन तक पहुँचना शुरू कर दिया है। खाकी वर्दी का चोला पहनकर कस्टम अधिकारी बनने का जो स्वांग अपराधियों ने रचा था, उसकी हकीकत अब सलाखों के पीछे पहुँच रही है। पुलिस ने इस पूरे षड्यंत्र की मुख्य कड़ी मानी जा रही ‘महिला लाइनर’ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। साथ ही, वारदात में इस्तेमाल की गई वह सफेद स्कॉर्पियो और अपराधियों की नकली वर्दी भी बरामद कर ली गई है, जो इस पूरे कांड का सबसे बड़ा सबूत बनकर उभरी है। पुलिस की जांच का दायरा अब बिहार की सीमाओं को लांघकर दिल्ली और हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) तक पहुँच चुका है। यह खुलासा दर्शाता है कि अपराधी कितने भी शातिर क्यों न हों और वे लूट के माल के साथ राज्यों की सीमाएं क्यों न पार कर जाएं, पुलिसिया अनुसंधान की बारीकियां उन्हें ढूंढ ही निकालती हैं।

कस्टम अधिकारी का वेश और वह काली दोपहर

​इस पूरी वारदात की शुरुआत 4 अप्रैल की उस दोपहर को हुई थी, जब अपराधियों ने किसी पेशेवर फिल्म की पटकथा की तरह पूरी योजना को अंजाम दिया। बदमाशों ने कानून का रक्षक दिखने के लिए पुलिस जैसी वर्दी पहनी और खुद को कस्टम विभाग का बड़ा अधिकारी बताया। खगौल के पास एक ऑटो को रोककर उन्होंने बड़ी ही कड़ाई से जांच का नाटक किया। उस ऑटो में 15 किलो सोना ले जाया जा रहा था, जिसकी भनक लुटेरों को पहले से थी। अपराधियों ने अपनी नकली धौंस दिखाते हुए सोने से भरा बैग कब्जे में लिया और अपनी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो में सवार होकर रफूचक्कर हो गए। किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई कि वर्दी पहने ये लोग असली अधिकारी हैं या मौत और लूट का पैगाम लेकर आए लुटेरे। इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए थे, क्योंकि अपराधियों ने सरेआम राजधानी के पास इतनी बड़ी डकैती को अंजाम दिया था।

दानापुर से शुरू हुई साजिश की बिसात

​पुलिस की तफ्तीश में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस महालूट की पूरी योजना पटना के दानापुर इलाके में तैयार की गई थी। वारदात को अंजाम देने से पहले अपराधियों ने कई बार गुप्त बैठकें की थीं। दानापुर के गोला रोड स्थित एक नामी होटल को अपराधियों ने अपना ठिकाना बनाया था, जहाँ लूट के ब्लूप्रिंट पर चर्चा हुई थी। होटल के कमरों में बैठकर इस बात की रणनीति बनाई गई कि ऑटो का रास्ता क्या होगा, किस जगह उसे रोका जाएगा और लूट के बाद भागने का ‘एग्जिट रूट’ क्या होगा।

​केवल होटल ही नहीं, बल्कि अपराधियों ने अपनी सुरक्षा के लिए पारिवारिक ठिकानों का भी इस्तेमाल किया। समस्तीपुर जिले के हलेई थाना क्षेत्र के पुरुषोत्तमपुर निवासी काजल सिंह के घर पर बदमाशों ने शरण ली थी। काजल सिंह फिलहाल दानापुर में अपने पति के साथ किराए के मकान में रहती है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि काजल सिंह के घर का इस्तेमाल न केवल रुकने के लिए किया गया, बल्कि लूट के माल के बंटवारे और आगे की योजना के लिए भी किया गया था। यह तथ्य अपराधियों और उनके मददगारों के बीच के गहरे नेक्सस को उजागर करता है।

महिला लाइनर काजल सिंह की भूमिका और गिरफ्तारी

​इस लूटकांड में काजल सिंह की भूमिका एक ‘लाइनर’ और ‘संरक्षक’ की रही है। पुलिस ने जब काजल को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने इस काले कारोबार के कई गहरे राज उगल दिए। सोमवार को उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वारदात से ठीक एक दिन पहले उसने अपराधियों के गिरोह को अपने घर में पनाह दी थी।

​काजल सिंह केवल एक मददगार नहीं थी, बल्कि वह अपराधियों के लिए सूचनाएं जुटाने और उनके सुरक्षित प्रस्थान का रास्ता साफ करने में भी शामिल थी। पुलिस के अनुसार, काजल का पति भी इस लूटकांड का सक्रिय सदस्य है और फिलहाल वह पुलिस की पकड़ से बाहर है। काजल की गिरफ्तारी से पुलिस को उन अन्य चेहरों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिन्होंने इस 15 किलो सोने पर हाथ साफ किया था। महिला लाइनर का जेल जाना इस गिरोह के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वह स्थानीय स्तर पर उनकी सबसे बड़ी मददगार थी।

गुरुग्राम में बरामद हुई स्कॉर्पियो और नकली वर्दी

​पटना पुलिस की विशेष टीम इस मामले की तफ्तीश में तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लेते हुए लगातार छापेमारी कर रही थी। अनुसंधान के क्रम में पुलिस को सूचना मिली कि अपराधी अपनी गाड़ी को हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) में छिपाकर कहीं और भागने की फिराक में हैं। सिटी एसपी (पश्चिमी) भानु प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस की एक टीम फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में कैंप कर रही है। गुप्त सूचना के आधार पर गुरुग्राम के एक इलाके से उस स्कॉर्पियो को बरामद कर लिया गया है, जिसका इस्तेमाल लूट के दौरान किया गया था।

​हैरानी की बात यह है कि इसी बरामद गाड़ी के भीतर से वह नकली वर्दी भी मिली है, जिसे पहनकर बदमाशों ने खुद को कस्टम अधिकारी बताया था। स्कॉर्पियो की बरामदगी इस मामले में ‘अंतिम प्रहार’ जैसी है, क्योंकि इससे अपराधियों के भागने के रूट की पुष्टि हो गई है। जांच में पता चला कि बदमाश वारदात के बाद पटना से सड़क मार्ग के जरिए नोएडा भागे थे और वहां से उन्होंने गाड़ी को गुरुग्राम में डंप कर दिया था। खगौल थाना प्रभारी रंजन कुमार ने बताया कि यह स्कॉर्पियो पिछले साल नवंबर में ही खरीदी गई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि अपराधी लंबे समय से किसी बड़ी वारदात के लिए संसाधनों का इंतजाम कर रहे थे।

दिल्ली में जमी है पुलिस की टीम, अन्य आरोपियों की तलाश तेज

​भले ही स्कॉर्पियो और एक लाइनर पुलिस के शिकंजे में आ गई हो, लेकिन लूट का 15 किलो सोना और मुख्य अपराधी अभी भी पुलिस की पहुँच से दूर हैं। बिहार पुलिस की एक विशेष टीम वर्तमान में दिल्ली और नोएडा के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर रही है। अपराधियों के मोबाइल लोकेशन और उनके संभावित छिपने के ठिकानों पर पैनी नजर रखी जा रही है। सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने विश्वास जताया है कि मुख्य अपराधियों को भी जल्द ही दबोच लिया जाएगा।

​इस लूटकांड ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी अब अंतरराज्यीय स्तर पर नेटवर्क बना रहे हैं। पटना में अपराध कर दिल्ली-गुरुग्राम में शरण लेना उनकी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने दिल्ली और गुरुग्राम में इन अपराधियों को छिपने में मदद की थी। खगौल पुलिस और पटना पुलिस की यह संयुक्त कार्रवाई अब तक की सबसे सफल जांचों में से एक मानी जा रही है, क्योंकि महज कुछ ही दिनों के भीतर उन्होंने वारदात की पूरी कड़ियों को जोड़ दिया है।

निष्कर्ष: कानून का इकबाल और अपराधियों के लिए संदेश

​खगौल सोना लूटकांड की जांच जिस दिशा में बढ़ रही है, वह अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है। यह मामला दर्शाता है कि तकनीक और स्थानीय मुखबिरों के तालमेल से पुलिस बड़े से बड़े कांड का खुलासा कर सकती है। काजल सिंह का जेल जाना और गुरुग्राम से गाड़ी की बरामदगी यह साबित करती है कि बिहार पुलिस अब अपराधियों का पीछा करने में भौगोलिक सीमाओं की परवाह नहीं करती।

​सोने की इतनी बड़ी मात्रा और ‘कस्टम अधिकारी’ बनकर किया गया फर्जीवाड़ा इस बात की ओर भी इशारा करता है कि अपराधियों ने बाकायदा रेकी की थी। अब पुलिस का अगला लक्ष्य उस 15 किलो सोने को बरामद करना है, जिसकी कीमत करोड़ों में है। खगौल और दानापुर के लोग पुलिस की इस सक्रियता की सराहना कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जब इस गिरोह के अन्य सदस्य पकड़े जाएंगे, तब यह साफ हो पाएगा कि इस सोने का असली रिसीवर कौन था और क्या इसके पीछे कोई बड़ा माफिया काम कर रहा है। फिलहाल, खगौल पुलिस की टीम अन्य फरार बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और उम्मीद है कि इस लूटकांड का पूर्ण पटाक्षेप बहुत जल्द होगा।

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