टेंडर घोटाले और BPSC परीक्षा पर जन सुराज का हमला, न्यायिक निगरानी में जांच की मांग; कार्रवाई में देरी पर उठाए सवाल

पटना: बिहार में कथित टेंडर घोटाले और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा व्यवस्था को लेकर जन सुराज पार्टी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने रविवार को पटना स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हाल के दिनों में सामने आए टेंडर घोटाले ने प्रशासनिक पारदर्शिता, सरकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली और सुशासन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।

प्रेस वार्ता के दौरान मनोज भारती ने कहा कि कथित टेंडर घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, पूर्व मुख्य अभियंता तारणी दास, उमेश कुमार सिंह और बिचौलिया रिशु श्री की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके बावजूद उनका सवाल है कि जब इस मामले में अप्रैल 2025 में एफआईआर दर्ज हो गई थी, तो बड़ी कार्रवाई होने में लगभग एक वर्ष का समय क्यों लगा। उन्होंने कहा कि इस देरी के कारणों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सामने आना चाहिए कि कथित घोटाले से किसे लाभ हुआ और इसके पीछे वास्तविक जिम्मेदार लोग कौन हैं। उनके अनुसार यदि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उससे जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच आवश्यक है।

मनोज भारती ने दावा किया कि पटना हाईकोर्ट ने भी इस मामले में हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गंभीर आरोपों की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि इन बिंदुओं को भी जांच के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मांग की कि टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर, गोपनीय दस्तावेजों के दुरुपयोग, अधिकारियों के परिजनों की विदेश यात्राओं, कथित अवैध संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि पूरे मामले के वास्तविक लाभार्थी कौन हैं और कथित अनियमितताओं में किस स्तर तक लोगों की भूमिका रही।

जन सुराज के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार मुन्ना ने कहा कि पार्टी इस पूरे मामले को केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं मानती। उनके अनुसार यह जनता के टैक्स के पैसे और सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि इसी कारण जन सुराज ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की न्यायिक निगरानी में स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।

प्रेस वार्ता में पार्टी के प्रवक्ता कुमार सौरभ ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित AEDO परीक्षा को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में पहले नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं, वहीं अब बिहार में आयोजित AEDO परीक्षा को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

कुमार सौरभ के अनुसार अप्रैल 2026 में राज्यभर के लगभग 700 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा की बायोमेट्रिक व्यवस्था और अन्य तकनीकी जिम्मेदारियां एक ऐसी कंपनी को सौंपी गईं, जिसे पहले अन्य संस्थाओं द्वारा कथित अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था।

उन्होंने दावा किया कि संबंधित कंपनी को पहले गुजरात हाईकोर्ट की परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मामले में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद ब्लैकलिस्ट किया गया था। साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा भी उसे ब्लैकलिस्ट किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में उस कंपनी को बिहार की महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा की तकनीकी जिम्मेदारी कैसे दी गई।

जन सुराज प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा गिरफ्तार किए गए कुछ लोग कथित रूप से उसी कंपनी से जुड़े हुए थे और परीक्षा प्रक्रिया में उनकी भूमिका रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बायोमेट्रिक प्रणाली का कथित दुरुपयोग कर प्रश्नपत्र और उत्तर-पुस्तिकाओं से जुड़ी सूचनाएं बाहर पहुंचाई गईं।

कुमार सौरभ ने कहा कि बिहार के लाखों प्रतियोगी छात्रों के मन में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चिंता पैदा हो गई है। उन्होंने सवाल किया कि युवाओं को यह भरोसा कैसे दिलाया जाएगा कि भविष्य में आयोजित होने वाली BPSC परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होंगी।

उन्होंने यह भी पूछा कि परीक्षा से जुड़े टेंडर, तकनीकी व्यवस्थाओं और प्रशासनिक निर्णयों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय की जाएगी। उनके अनुसार यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जन सुराज नेताओं ने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। पार्टी का कहना है कि यदि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होती है तो सच्चाई सामने आएगी और जनता का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास भी मजबूत होगा।

फिलहाल जन सुराज ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के माध्यम से पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग दोहराई है। वहीं इन आरोपों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों या अन्य पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

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