
भागलपुर/कटिहार: कटिहार रेल मंडल में चलती ट्रेन में हुई सनसनीखेज हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। जांच में सामने आया कि यह कोई लूटपाट या अचानक हुई वारदात नहीं, बल्कि कई महीनों से रची गई सुनियोजित साजिश थी। पुलिस के अनुसार मृतक की पत्नी, उसके कथित प्रेमी और एक सुपारी शूटर ने मिलकर हत्या की योजना बनाई थी। तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह मामला ट्रेन में अपराध की सामान्य घटना प्रतीत हो रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी। मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों और लगातार हुई बातचीत ने हत्या की साजिश की परतें खोल दीं।
नौ साल पहले हुई मुलाकात, दोस्ती से शुरू हुआ प्रेम संबंध
पुलिस जांच में सामने आया कि करीब नौ वर्ष पहले सीतामढ़ी में बिजली विभाग में कार्यरत रहने के दौरान महिला और उसके सहकर्मी के बीच परिचय हुआ था। समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यह रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया।
बाद में महिला की शादी परिवार की सहमति से दूसरे व्यक्ति से हो गई। पुलिस का दावा है कि शादी के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा। जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस का कहना है कि दोनों लगातार बातचीत करते थे।
पति को रास्ते से हटाने की बनी योजना
जांच अधिकारियों के अनुसार शादी के बाद भी प्रेम संबंध जारी रहने के कारण पति को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई। पुलिस का दावा है कि इस साजिश को अंजाम देने के लिए एक शूटर की मदद ली गई। आरोप है कि पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी और वारदात के लिए ट्रेन यात्रा को चुना गया ताकि घटना को लूटपाट या सामान्य अपराध का रूप दिया जा सके।
मोबाइल में मिले डिजिटल साक्ष्य बने सबसे बड़ा सुराग
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मृतक के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कराई। जांच में एक नंबर विशेष रूप से जांच एजेंसियों के संदेह के दायरे में आया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट और लोकेशन विश्लेषण के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं।
जांच अधिकारियों का कहना है कि घटना से पहले और वारदात के समय संबंधित लोगों के बीच लगातार संपर्क होने के प्रमाण मिले। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ी और पुलिस आरोपितों तक पहुंचने में सफल रही।
तकनीकी जांच और सीसीटीवी से मजबूत हुई पड़ताल
रेल पुलिस और जिला पुलिस ने संयुक्त रूप से मामले की जांच की। तकनीकी टीम ने मोबाइल लोकेशन, इलेक्ट्रॉनिक डाटा और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसके अलावा विभिन्न स्थानों से उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और यात्रा से जुड़े तथ्यों का भी मिलान किया गया।
पुलिस का कहना है कि सभी साक्ष्यों को जोड़ने के बाद घटनाक्रम की पूरी कड़ी स्पष्ट होती चली गई, जिसके आधार पर आरोपितों की गिरफ्तारी की गई।
सुपारी देकर हत्या कराने का आरोप
जांच एजेंसियों का दावा है कि हत्या को अंजाम देने के लिए शूटर की मदद ली गई थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि वारदात के लिए धन का लेन-देन कैसे हुआ और योजना बनाने में किन-किन लोगों की भूमिका रही। बरामद साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
रेल पुलिस ने किया मामले का खुलासा
रेल पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि यह मामला पूरी तरह तकनीकी और वैज्ञानिक जांच के आधार पर सुलझाया गया है। फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल डाटा और पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों ने हत्या की साजिश का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ जारी है और यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अदालत में पेशी के बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी
गिरफ्तार आरोपितों को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पुलिस मामले में सभी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी। अधिकारियों का कहना है कि विवेचना अभी जारी है और जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि आधुनिक आपराधिक जांच में डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और तकनीकी विश्लेषण की मदद से पुलिस ने उन कड़ियों को जोड़ा, जिनके आधार पर इस बहुचर्चित ट्रेन हत्या कांड की साजिश का खुलासा होने का दावा किया गया है।


