
पटना: बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘जीविका’ एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। इसका ताजा उदाहरण मुजफ्फरपुर का बैग क्लस्टर है, जहां स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाएं न सिर्फ रोजगार पा रही हैं, बल्कि करोड़ों का कारोबार भी खड़ा कर रही हैं।
वर्ष 2023 से 2026 के बीच इस क्लस्टर ने 19.75 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इनमें से 16.34 करोड़ रुपये सिर्फ बैग क्लस्टर शेड्स से आए हैं, जो इस मॉडल की सफलता को दर्शाता है।
महिलाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता का केंद्र
मुजफ्फरपुर में संचालित यह बैग क्लस्टर ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का मजबूत माध्यम बन चुका है। इसका उद्देश्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि महिलाओं को उद्यमी बनाना भी है।
यह क्लस्टर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित है, जिसमें—
- सरकार द्वारा आधारभूत संरचना
- जीविका द्वारा प्रशिक्षण और सशक्तिकरण
प्रदान किया जा रहा है।
इस मॉडल के जरिए महिलाएं अब मजदूर नहीं, बल्कि व्यवसाय संचालक बन रही हैं।
उत्पादन में शानदार प्रदर्शन
जीविका निदेशक (उद्यम) के अनुसार, दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच क्लस्टर ने उल्लेखनीय उत्पादन किया है—
- 42 बैग उद्यम संचालित
- 32.69 लाख बैग का निर्माण
- 12.08 लाख रेन कवर तैयार
इसके साथ ही क्लस्टर का औसत मासिक टर्नओवर करीब 43 लाख रुपये रहा है, जो इसकी निरंतर वृद्धि को दर्शाता है।
बिहार से बाहर भी बढ़ी मांग
इस क्लस्टर में तैयार किए गए बैग सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं हैं। दूसरे राज्यों में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
आकर्षक डिजाइन, बेहतर गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण इन उत्पादों को बाजार में अच्छी पहचान मिल रही है। इससे महिलाओं की आय में स्थिरता आई है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
महिलाओं के अनुकूल कार्यस्थल की सुविधा
इस बैग क्लस्टर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि महिलाएं सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल में काम कर सकें। यहां कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं—
- आधुनिक उत्पादन शेड
- कॉमन फैसिलिटी सेंटर
- क्लस्टर कार्यालय
- बच्चों के लिए क्रेच (पालना घर)
- ‘जीविका दीदी की रसोई’
इन सुविधाओं के कारण महिलाएं अपने काम के साथ परिवार की जिम्मेदारियां भी बेहतर तरीके से निभा पा रही हैं।
आय में सुधार और आर्थिक मजबूती
इस क्लस्टर का सबसे बड़ा असर महिलाओं की आय पर पड़ा है।
- उद्यमी महिलाओं को औसतन ₹10,403 प्रति माह लाभ
- श्रमिक महिलाओं को करीब ₹5,192 प्रति माह आय
- औसत दैनिक मजदूरी ₹263.90
यह आय ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है और उनकी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
सामाजिक बदलाव की भी कहानी
यह पहल सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी माध्यम बन रही है।
- महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन रही हैं
- परिवार में उनकी भागीदारी बढ़ी है
- निर्णय लेने में उनकी भूमिका मजबूत हुई है
गांवों में महिलाओं की पहचान अब सिर्फ गृहिणी तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि वे सफल उद्यमी के रूप में उभर रही हैं।
सरकार ने सराहा मॉडल
ग्रामीण विकास मंत्री ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जीविका के माध्यम से बिहार तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
उनके अनुसार, इस क्लस्टर ने न केवल सैकड़ों महिलाओं को रोजगार दिया है, बल्कि उनके परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में भी बड़ा बदलाव लाया है।
मुजफ्फरपुर का जीविका बैग क्लस्टर आज महिला सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बन चुका है।
यह पहल दिखाती है कि यदि सही अवसर, प्रशिक्षण और मंच मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी बड़े स्तर पर उद्योग खड़ा कर सकती हैं।
आने वाले समय में ऐसे और क्लस्टर विकसित किए गए, तो बिहार न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि महिला उद्यमिता का एक राष्ट्रीय मॉडल भी बन सकता है।


