
नई दिल्ली, 18 जून 2026। भारतीय रेलवे ने रेलवे सुरक्षा, परिचालन दक्षता और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व रेलवे (Eastern Railway) के 32 स्टेशनों पर सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण के लिए ₹405 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पुराने रिले आधारित इंटरलॉकिंग सिस्टम को हटाकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (Electronic Interlocking) प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और तेज होगा।
भारतीय रेलवे द्वारा स्वीकृत यह परियोजना हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) और हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (HUN) मार्गों पर लागू की जाएगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कदम देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोरों में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और भविष्य की उन्नत रेलवे तकनीकों के लिए आधार तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
32 स्टेशनों पर होगा तकनीकी बदलाव
इस परियोजना के तहत कुल 32 स्थानों पर सिग्नलिंग व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इनमें 25 पैनल इंटरलॉकिंग (PI) और रूट रिले इंटरलॉकिंग (RRI) स्टेशन शामिल हैं, जबकि 7 इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नलिंग (IBS) लोकेशन भी इस योजना का हिस्सा हैं। रेलवे का उद्देश्य पुराने और तकनीकी रूप से सीमित सिस्टम को बदलकर आधुनिक डिजिटल तकनीक आधारित व्यवस्था लागू करना है।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिवर्तन न केवल ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाएगा, बल्कि किसी तकनीकी खराबी की स्थिति में समस्या का पता लगाने और उसे दूर करने में लगने वाला समय भी काफी कम कर देगा।
क्यों जरूरी था सिग्नलिंग सिस्टम का आधुनिकीकरण?
पूर्व रेलवे के कई महत्वपूर्ण मार्गों पर अभी भी दशकों पुराने रिले आधारित इंटरलॉकिंग सिस्टम कार्यरत हैं। समय के साथ इन प्रणालियों में कई तकनीकी सीमाएं सामने आई हैं। पुरानी वायरिंग, बिजली आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां, उचित अर्थिंग व्यवस्था का अभाव तथा सिग्नलिंग उपकरणों के पुराने हो जाने के कारण रखरखाव की लागत बढ़ रही थी और तकनीकी विफलताओं का जोखिम भी बढ़ रहा था।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन समस्याओं के कारण कभी-कभी परिचालन प्रभावित होता है और ट्रेनों के संचालन में अनावश्यक देरी की स्थिति भी बनती है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली अपनाने का निर्णय लिया है।
क्या है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली?
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) एक आधुनिक डिजिटल सिग्नलिंग तकनीक है जो ट्रेनों की आवाजाही को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह प्रणाली कंप्यूटर आधारित होती है और ट्रैक, सिग्नल तथा प्वाइंट्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करती है।
पारंपरिक रिले आधारित सिस्टम की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग अधिक सटीक, विश्वसनीय और सुरक्षित मानी जाती है। इसमें डेटा प्रोसेसिंग की क्षमता अधिक होती है तथा किसी भी संभावित त्रुटि या खराबी का पता तेजी से लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, यह तकनीक मानवीय त्रुटियों की संभावना को भी कम करती है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम घटता है और रेल यातायात अधिक सुरक्षित बनता है।
यात्रियों और मालगाड़ियों दोनों को होगा फायदा
रेलवे के अनुसार, इस परियोजना से केवल यात्री ट्रेनों को ही लाभ नहीं मिलेगा बल्कि मालगाड़ियों का संचालन भी अधिक कुशल होगा। पूर्व रेलवे देश के सबसे व्यस्त रेल नेटवर्कों में से एक है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां संचालित होती हैं।
नई सिग्नलिंग व्यवस्था लागू होने के बाद ट्रेनों की समयपालन क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। सिग्नल विफलताओं में कमी आने से ट्रेनों की अनावश्यक देरी घटेगी और नेटवर्क की समग्र क्षमता बढ़ेगी।
रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा बल्कि उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों के लिए माल परिवहन भी अधिक भरोसेमंद बनेगा।
भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार होगा रेलवे नेटवर्क
यह परियोजना भारतीय रेलवे की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत पूरे नेटवर्क को आधुनिक और डिजिटल तकनीकों से लैस किया जा रहा है। रेलवे भविष्य में कवच (Kavach), ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल जैसी उन्नत प्रणालियों का विस्तार करना चाहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग इन सभी आधुनिक तकनीकों की आधारभूत आवश्यकता है। इसलिए यह परियोजना भविष्य के स्मार्ट रेलवे नेटवर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश मानी जा रही है।
रेलवे सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेलवे ने सुरक्षा सुधारों पर विशेष जोर दिया है। ट्रैक नवीनीकरण, आधुनिक कोच, स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच और उन्नत सिग्नलिंग तकनीकों को लागू करने जैसे कई कदम उठाए गए हैं।
₹405 करोड़ की यह नई परियोजना भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। रेलवे का मानना है कि आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था से दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी और किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी।
भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान को मिलेगी गति
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है और प्रतिदिन करोड़ों यात्री इसकी सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में बढ़ती मांग और यातायात दबाव को देखते हुए आधुनिक तकनीकों का उपयोग समय की आवश्यकता बन गया है।
पूर्व रेलवे में स्वीकृत यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर रेलवे आधुनिकीकरण अभियान को नई गति देगी। इससे रेलवे नेटवर्क अधिक सुरक्षित, कुशल और भविष्य की तकनीकों के अनुरूप बन सकेगा।
रेल मंत्रालय का कहना है कि यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और माल परिवहन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भविष्य में भी इस तरह की तकनीकी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। ₹405 करोड़ की यह सिग्नलिंग आधुनिकीकरण परियोजना भारतीय रेलवे के उसी विजन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश को विश्वस्तरीय, सुरक्षित और स्मार्ट रेल नेटवर्क उपलब्ध कराना है।


