जन सुराज को मिला राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्णिया के पूर्व सांसद उदय सिंह को सौंपी गई कमान

PK बोले – अब बिहार बदलाव की जिम्मेदारी साझा होगी, उदय सिंह के नेतृत्व से पार्टी को मिलेगी नई दिशा

पटना, 19 मई 2025:बिहार की राजनीति में बदलाव की दिशा में अग्रसर जन सुराज पार्टी ने आज एक अहम कदम उठाया। पार्टी ने पूर्व सांसद उदय सिंह को पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने यह ऐलान करते हुए कहा कि यह नियुक्ति स्टेट कोर कमेटी के सर्वसम्मत निर्णय से की गई है।

PK ने कहा कि उदय सिंह जैसे अनुभवी नेता के आने से जन सुराज अभियान को राजनीतिक और सांगठनिक मजबूती मिलेगी। अब पार्टी की बागडोर वरिष्ठ नेताओं के हाथ में होगी और वे खुद जेपी की जन्मभूमि सिताबदियारा से 120 दिवसीय “बिहार बदलाव यात्रा” पर निकलेंगे।

“जन सुराज जनता की पार्टी है” – उदय सिंह

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर उदय सिंह ने कहा, “जन सुराज बिहार की जनता की पार्टी है। इसे प्रशांत किशोर ने पिछले तीन वर्षों की अथक मेहनत से खड़ा किया है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि इस आंदोलन को बिहार के कोने-कोने तक पहुंचाएं।”

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी बिहार को एक बेहतर राजनीतिक विकल्प देने के लिए प्रतिबद्ध है और वे पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।


PK का बड़ा बयान – “बिहार में अफसरशाही का जंगलराज”

प्रशांत किशोर ने कल नालंदा के कल्याण बिगहा गांव में उन्हें कार्यक्रम नहीं करने देने को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा, “अगर नीतीश कुमार सरकार चला रहे होते तो यह घटना नहीं होती। बिहार आज अफसरों और दरबारियों के हवाले है, जो राज्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें गांव में प्रवेश करने दिया जाता, तो जनता खुद देखती कि नीतीश कुमार के गांव में कितना विकास हुआ है।


नेतृत्व मंडल की मौजूदगी

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, आरसीपी सिंह, पूर्व विधान परिषद सदस्य रामबली चंद्रवंशी, विधान परिषद सदस्य अफाक अहमद, उपाध्यक्ष वाई.वी. गिरि, पूर्व विधायक किशोर कुमार, महासचिव सुभाष सिंह कुशवाहा, सरवर अली, नंदकिशोर कुशवाहा और अन्य जिलों के प्रतिनिधि शामिल थे।

जन सुराज पार्टी की यह नई नियुक्ति न केवल संगठनात्मक मजबूती का संकेत है, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए विकल्प के रूप में इसकी मौजूदगी को और सशक्त करती है। अब देखना है कि “बिहार बदलाव यात्रा” के जरिए यह अभियान आम जनता के बीच कितनी गूंज पैदा करता है।


 

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