
HIGHLIGHTS: रसोई गैस संकट पर जिला प्रशासन का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’; घर-घर पहुँचेगी राहत
- बड़ी राहत: भागलपुर जिले में LPG गैस की आपूर्ति दो गुनी (Double) कर दी गई है।
- डेडलाइन: आज के बाद किसी भी उपभोक्ता की बुकिंग 7 दिनों से ज्यादा लंबित नहीं रहेगी।
- पैनिक बुकिंग: वे लोग भी सिलेंडर बुक कर रहे हैं जो 6-7 महीने में एक बार लेते थे; DM ने अपील की— “घबराएं नहीं, स्टॉक पर्याप्त है।”
- एक्शन रिपोर्ट: 19 मार्च को रिकॉर्ड 12,733 सिलेंडर की होम डिलीवरी की गई; 20 मार्च को 29 वितरकों की जांच हुई।
भागलपुर | 20 मार्च, 2026
पिछले कुछ दिनों से भागलपुर की रसोइयों में जो ‘गैस संकट’ की आंच महसूस की जा रही थी, उसे बुझाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। प्रशासन अब सीधे गैस गोदामों से मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि बैकलॉग को खत्म किया जा सके।
गोदामों पर ‘पहरा’ और 7 दिन का अल्टीमेटम
जिलाधिकारी ने प्रेस को संबोधित करते हुए प्रशासनिक सख्ती का खाका पेश किया:
- डेली विजिट: मजिस्ट्रेट और अधिकारी प्रतिदिन गैस गोदामों का दौरा कर रहे हैं ताकि सप्लाई चेन में कोई रुकावट न आए।
- डिमांड-सप्लाई मैच: जहाँ बैकलॉग ज्यादा है, वहां अतिरिक्त खेप भेजी जा रही है। लक्ष्य यह है कि बुकिंग के 7 दिन के भीतर सिलेंडर उपभोक्ता के घर पहुँच जाए।
- अफवाहों पर प्रहार: DM ने कहा कि कुछ लोग डर के मारे एडवांस बुकिंग कर रहे हैं, जिससे सिस्टम पर दबाव बढ़ा है।
आंकड़ों में भागलपुर की ‘गैस राहत’
जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुधीर कुमार ने वर्तमान स्थिति का कच्चा-चिट्ठा रखा:
तारीख | कार्रवाई / उपलब्धि | विवरण |
|---|---|---|
19 मार्च | रिकॉर्ड डिलीवरी | 12,733 सिलेंडर घर-घर पहुँचाए गए। |
20 मार्च | सघन जांच | 29 गैस वितरकों (Agencies) के ठिकानों पर रेड/जांच। |
सप्लाई स्टेटस | आपूर्ति क्षमता | पहले के मुकाबले आपूर्ति 100% (दोगुनी) बढ़ाई गई। |
VOB का नजरिया: क्या ‘पैनिक बुकिंग’ ही थी असली विलेन?
भागलपुर में पिछले दिनों बिजली की बढ़ती खपत के पीछे ‘गैस संकट’ को एक बड़ा कारण बताया गया था। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि DM डॉ. नवल किशोर चौधरी की यह पहल सही समय पर लिया गया कदम है।
अक्सर संकट गैस की ‘कमी’ से नहीं, बल्कि ‘डर’ से पैदा होता है। जब एक साथ हजारों लोग सिलेंडर बुक करने लगते हैं, तो लॉजिस्टिक्स फेल हो जाता है। 12 हजार से ज्यादा सिलेंडरों की एक दिन में डिलीवरी यह साबित करती है कि प्रशासन के पास संसाधन हैं। लेकिन असली चुनौती होम डिलीवरी की है—क्या वेंडर बिना ‘ऊपरी कमाई’ के समय पर गैस पहुंचाएंगे? प्रशासन को अब वितरकों की जांच के साथ-साथ ‘डिलीवरी बॉयज’ की मनमानी पर भी लगाम कसनी होगी। अगर गैस ससमय मिलने लगी, तो बिजली ग्रिड पर बढ़ा ‘इंडक्शन’ का बोझ भी कम होगा।


