भागलपुर में ISOPARB चैप्टर का साइंटिफिक प्रोग्राम आयोजित, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष जोर

भागलपुर। शहर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ISOPARB (Indian Society of Perinatology and Reproductive Biology) चैप्टर द्वारा एक महत्वपूर्ण साइंटिफिक प्रोग्राम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शहर के एक निजी होटल में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्त्री रोग विशेषज्ञों, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं की देखभाल, सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हीरालाल कोनर, डॉ. मंजू गीता मिश्रा, डॉ. अनुपमा सिन्हा, डॉ. प्रज्ञा मिश्रा चौधरी और डॉ. प्रतिभा सिंह सहित कई प्रतिष्ठित डॉक्टरों ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। उद्घाटन के बाद सभी अतिथियों का स्वागत किया गया और कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. हीरालाल कोनर ने ISOPARB की भूमिका और इसके विस्तार पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस संस्था की शुरुआत बिहार की राजधानी पटना से हुई थी और आज यह देश के 27 जिलों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ISOPARB का मुख्य लक्ष्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता फैलाना, चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों से अवगत कराना और समाज के हर वर्ग तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना है।

डॉ. कोनर ने यह भी कहा कि भारत जैसे देश में, जहां मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर एक चुनौती बनी हुई है, वहां इस प्रकार के कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि समय-समय पर आयोजित होने वाले ऐसे साइंटिफिक कार्यक्रमों के माध्यम से डॉक्टरों को नई तकनीकों, शोध और उपचार विधियों के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे वे अपने मरीजों को बेहतर सेवा दे सकते हैं।

कार्यक्रम में डॉ. प्रतिभा सिंह ने गर्भवती महिलाओं की देखभाल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के शुरुआती दिनों से ही महिलाओं को नियमित रूप से डॉक्टर की निगरानी में रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई बार लापरवाही या जानकारी के अभाव में महिलाओं को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसे समय पर जांच और उपचार के माध्यम से रोका जा सकता है।

डॉ. प्रतिभा सिंह ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार, नियमित जांच, आवश्यक टीकाकरण और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि ISOPARB के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व के बारे में जानकारी मिल सके।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। इनमें हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, नवजात शिशुओं की देखभाल, समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों की समस्याएं, पोषण और मातृ स्वास्थ्य से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। डॉक्टरों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे आधुनिक तकनीकों और समय पर उपचार से जटिल मामलों को भी सफलतापूर्वक संभाला जा सकता है।

इस अवसर पर उपस्थित चिकित्सकों ने यह भी चर्चा की कि समाज में अभी भी कई मिथक और भ्रांतियां मौजूद हैं, जो गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि इन मिथकों को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान और जनसंवाद बेहद आवश्यक है।

कार्यक्रम में भाग लेने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने इस तरह के आयोजनों को बेहद उपयोगी बताया। उनका कहना था कि इससे न केवल ज्ञान का आदान-प्रदान होता है, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में आपसी सहयोग और समन्वय भी बढ़ता है।

इसके अलावा, कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि ISOPARB भविष्य में और भी व्यापक स्तर पर कार्य करने की योजना बना रहा है। संस्था का लक्ष्य है कि देश के अधिक से अधिक जिलों में अपने चैप्टर स्थापित किए जाएं और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार लाया जाए।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को और मजबूत किया जा सके।

कुल मिलाकर, यह साइंटिफिक प्रोग्राम न केवल चिकित्सकों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आया कि गर्भवती महिलाओं की सही देखभाल और समय पर चिकित्सा परामर्श से कई गंभीर समस्याओं को टाला जा सकता है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में यह पहल एक सकारात्मक और सराहनीय कदम माना जा रहा है।

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