राज्य में स्व–गणना अभियान को मिली बड़ी सफलता, 48.50 लाख लोगों ने लिया हिस्सा

पटना, 03 मई। भारत की जनगणना 2027 के तहत राज्य में चलाए जा रहे स्व–गणना (Self Enumeration) अभियान को अभूतपूर्व सफलता मिली है। 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक चले इस ऑनलाइन चरण में कुल 48,50,848 लोगों ने भागीदारी दर्ज कराई, जो इस पहल के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता और डिजिटल भागीदारी का स्पष्ट संकेत है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि के दौरान 1,68,564 लोगों ने स्व–गणना प्रक्रिया की शुरुआत की, जबकि 46,82,284 लोगों ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य के लोगों ने न केवल पहल में रुचि दिखाई, बल्कि उसे पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ पूरा भी किया।

इस अभियान का उद्देश्य लोगों को स्वयं अपनी जनगणना संबंधी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने के लिए प्रेरित करना था, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध बन सके। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी दर्ज करने की यह पहल देश में जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो मधुबनी जिला इस अभियान में सबसे आगे रहा, जहां 6,05,824 लोगों ने स्व–गणना पूरी की। इसके बाद वैशाली में 5,86,220 और दरभंगा में 4,95,331 लोगों ने भागीदारी दर्ज की, जो क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इन जिलों में लोगों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी डिजिटल जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।

अन्य प्रमुख जिलों में गोपालगंज (3,06,491), पटना (2,38,750) और भोजपुर (2,09,462) शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने इस अभियान में हिस्सा लिया। इसके अलावा औरंगाबाद (1,64,143), खगड़िया (1,63,190), पश्चिम चंपारण (1,34,434), पूर्णिया (1,19,743), कटिहार (1,20,292) और जमुई (1,13,975) जैसे जिलों में भी उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।

मुजफ्फरपुर (1,09,797), सिवान (1,07,806), समस्तीपुर (1,03,443) और रोहतास (99,831) जैसे जिलों ने भी स्व–गणना अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं गया (89,270), मधेपुरा (82,294), सारण (74,989), नालंदा (71,915), बक्सर (70,945) और नवादा (70,507) में भी संतोषजनक प्रगति दर्ज की गई।

सुपौल (65,233), सीतामढ़ी (62,064), भागलपुर (50,600), शेखपुरा (48,088) और सहरसा (48,362) जैसे जिलों में भी लोगों ने इस अभियान में भाग लेकर अपनी जिम्मेदारी निभाई। हालांकि कुछ जिलों में भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही, जिनमें शिवहर (43,398), किशनगंज (42,140), जहानाबाद (39,165), बांका (29,978), बेगूसराय (29,724), कैमूर (26,609), मुंगेर (18,415), अरवल (18,871) और लखीसराय (14,415) शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन जिलों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट पहुंच को और बेहतर बनाकर भविष्य में भागीदारी को बढ़ाया जा सकता है।

स्व–गणना अभियान का यह पहला चरण पूरी तरह ऑनलाइन था, जिसमें लोगों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर दिया गया। इससे न केवल सरकारी तंत्र पर दबाव कम हुआ, बल्कि आंकड़ों की सटीकता भी बढ़ी।

अब इस अभियान का दूसरा चरण 2 मई 2026 से शुरू हो चुका है, जो 31 मई तक चलेगा। इस चरण में प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे और प्रत्येक परिवार से कुल 33 बिंदुओं पर जानकारी एकत्र करेंगे। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार, आवास, सामाजिक स्थिति सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होगी।

जिन परिवारों ने पहले ही स्व–गणना कर ली है, उन्हें अपना एसएसआईडी (Self Survey ID) प्रगणकों को उपलब्ध कराना होगा। इससे उनकी दी गई जानकारी का सत्यापन किया जा सकेगा और दोबारा डेटा भरने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह व्यवस्था पूरी प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने में सहायक होगी।

प्रशासन का कहना है कि इस बार जनगणना को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और त्रुटिरहित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए प्रगणकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे सही तरीके से जानकारी एकत्र कर सकें और लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

भारत की जनगणना 2027 का यह पहला चरण 2 मई से शुरू हो चुका है और इसे देश के सबसे बड़े डेटा संग्रह अभियान के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल जनसंख्या से संबंधित आंकड़े प्रदान करेगा, बल्कि सरकार को विभिन्न योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में भी मदद करेगा।

स्व–गणना अभियान की सफलता यह दर्शाती है कि राज्य के लोग अब डिजिटल माध्यमों को अपनाने के लिए तैयार हैं और सरकारी पहलों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। यह पहल भविष्य में अन्य सरकारी योजनाओं के लिए भी एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

कुल मिलाकर, स्व–गणना अभियान ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो आम जनता भी बड़े स्तर पर सरकारी कार्यक्रमों का हिस्सा बन सकती है। अब सभी की निगाहें दूसरे चरण पर हैं, जहां घर-घर सर्वेक्षण के माध्यम से इस प्रक्रिया को और व्यापक बनाया जाएगा।

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