
तेहरान/यरुशलम/8 अप्रैल 2026। पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को बुधवार सुबह उस वक्त बड़ा झटका लगा जब ईरान ने दोटूक शब्दों में साफ कर दिया कि उसका ‘सीजफायर’ केवल अमेरिका के साथ है, इजरायल के साथ नहीं। जहाँ एक ओर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 14 दिनों के ‘ब्रेथिंग स्पेस’ (राहत के समय) की खबरें सुर्खियाँ बटोर रही हैं, वहीं दूसरी ओर इजरायल की सड़कों पर सायरन की गूंज और आसमान में मिसाइलों के इंटरसेप्शन (Interception) ने इस ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ की सच्चाई बयां कर दी है। ‘द वॉइस ऑफ बिहार’ की तफ्तीश में यह सामने आया है कि ‘इस्लामाबाद समझौते’ की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि इजरायल और ईरान के बीच बारूद की बारिश फिर से शुरू हो गई।
”इजरायल के साथ कोई समझौता नहीं”: तेहरान का कड़ा रुख
बुधवार की सुबह ईरान के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विशेष रूप से न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्टों के बीच यह स्पष्टीकरण जारी किया कि अमेरिका के साथ हुए 14 दिनों के ‘सशर्त’ समझौते का मतलब यह कतई नहीं है कि इजरायल को ‘क्लीन चिट’ मिल गई है। ईरान ने साफ कहा है कि इजरायल ने उसके संप्रभु क्षेत्रों, विशेषकर दक्षिण पार्स (South Pars) गैस क्षेत्र और तेहरान के सैन्य ठिकानों पर जो हमले किए हैं, उनका हिसाब अभी बाकी है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के करीब माने जाने वाले सूत्रों ने बताया कि जब तक इजरायल लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बंद नहीं करता और गाजा से पूरी तरह पीछे नहीं हटता, तब तक उसके खिलाफ ‘प्रतिरोध’ (Resistance) जारी रहेगा। तेहरान का यह बयान उन दावों के विपरीत है जिसमें पाकिस्तानी नेतृत्व ने कहा था कि शांति ‘हर तरफ’ (Everywhere) बहाल होगी।
इजरायल में ‘हाई अलर्ट’: सायरन और मिसाइल हमलों का सिलसिला
जहाँ एक ओर दुनिया राहत की सांस ले रही थी, वहीं यरुशलम और दक्षिणी इजरायल के कई इलाकों में बुधवार तड़के सायरन की आवाज ने लोगों को फिर से बंकरों में जाने पर मजबूर कर दिया।
- बैलिस्टिक मिसाइल अटैक: इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) ने पुष्टि की है कि ईरान की ओर से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों का पता चला है। सायरन मुख्य रूप से मध्य और दक्षिणी इजरायल में बजाए गए।
- मिसाइल इंटरसेप्शन: इजरायल के ‘एरो’ (Arrow) डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही कई खतरों को नेस्तनाबूद किया, लेकिन मिसाइलों के मलबे गिरने से कुछ इलाकों में नुकसान की खबरें हैं।
- इजरायली मीडिया का दावा: इजरायली अखबार ‘द जेरूसलम पोस्ट’ ने सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि इजरायल इस ‘सीजफायर’ का हिस्सा नहीं है और वह ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति को जारी रखेगा।
ट्रंप की शांति बनाम इजरायल की जिद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने इस 14 दिनों के सीजफायर को अपनी बड़ी जीत बताया है, अब एक अजीबोगरीब कूटनीतिक जाल में फंसते नजर आ रहे हैं।
- अमेरिका की स्थिति: ट्रंप ने अपनी सेना को बमबारी रोकने का आदेश तो दे दिया है, लेकिन वे इजरायल को हमलों से रोकने में फिलहाल नाकाम दिख रहे हैं।
- इजरायल का पलटवार: इजरायली सुरक्षा अधिकारी साफ कह रहे हैं कि वे ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ के लिए बाध्य नहीं हैं। उनके अनुसार, जब तक ईरान का परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए हमले जारी रखेगा।
- चीन की भूमिका: चीन, जिसने इस समझौते के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी, अब इजरायल की इस ‘जिद’ पर नाराज बताया जा रहा है। बीजिंग ने संकेत दिया है कि यदि इजरायल हमले नहीं रोकता, तो ईरान को दिया गया ‘सीजफायर’ का आश्वासन टूट सकता है।
हॉर्मुज तो खुला, पर हवाई मार्ग अब भी असुरक्षित
समझौते के तहत ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को तेल टैंकरों के लिए खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। लेकिन ईरान और इजरायल के बीच जारी सीधे हवाई युद्ध ने विमानन क्षेत्र के लिए नया संकट खड़ा कर दिया है। एयरलाइंस कंपनियां अभी भी इस क्षेत्र के हवाई क्षेत्र का उपयोग करने से बच रही हैं क्योंकि इजरायली वायुसेना और ईरानी मिसाइल बैटरियां अब भी ‘एक्टिव मोड’ पर हैं।
निष्कर्ष: केवल आधे रास्ते पहुँची है शांति
भागलपुर से लेकर न्यूयॉर्क तक लोग इस खबर से राहत महसूस कर रहे थे कि महायुद्ध टल गया है, लेकिन इजरायल में बजते सायरन ने इस खुशी को फीका कर दिया है। यह स्पष्ट है कि अमेरिका और ईरान के बीच की शांति ‘कांच की दीवार’ जैसी है—बेहद नाजुक।
अगर इजरायल और ईरान के बीच यह गोलाबारी नहीं रुकी, तो ट्रंप द्वारा दिया गया 14 दिनों का ‘पॉज’ (Pause) महज कुछ घंटों में खत्म हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहाँ यह देखा जाएगा कि क्या चीन और पाकिस्तान इजरायल को भी इस शांति प्रक्रिया में शामिल करने का कोई तरीका निकाल पाते हैं या नहीं।


