
तेहरान/बीजिंग/वाशिंगटन। 08 अप्रैल 2026: पश्चिम एशिया की रणभूमि से जो धुआं उठ रहा था, वह फिलहाल कूटनीति की शीतल बयार में बदलता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘डेथ डेडलाइन’ खत्म होने के महज कुछ घंटे पहले, ईरान ने भी आधिकारिक तौर पर दो हफ्तों (14 दिन) के संघर्ष विराम (Ceasefire) की पुष्टि कर दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के जरिए यह साफ कर दिया कि यदि ईरान पर होने वाले हमले रुकते हैं, तो ईरान की ‘शक्तिशाली सेना’ भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाइयां बंद कर देगी। हालांकि, यह शांति ‘बिना शर्त’ नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) और Axios की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए वाशिंगटन को अपना ’10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव’ सौंपा है, जिसमें उसने युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए बेहद कड़ी और दिलचस्प शर्तें रखी हैं।
अब्बास अराक्ची का बयान: “हमला रुका तो हम भी रुकेंगे”
ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह युद्धविराम एकतरफा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगले 14 दिनों के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों का आवागमन ‘ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय’ से संभव होगा। अराक्ची ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि इस दौरान ‘तकनीकी सीमाओं’ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जाएगा। ईरान का यह रुख दुनिया के लिए बड़ी राहत है क्योंकि हॉर्मुज के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार धराशायी होने की कगार पर था।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इस 14-दिवसीय निलंबन को केवल इसलिए मंजूरी दी है ताकि एक ‘स्थायी शांति’ (Permanent Peace) का रास्ता तलाशा जा सके। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस समय का उपयोग अमेरिका को ‘रीग्रुप’ (सेना को फिर से संगठित करना) करने का मौका देने के लिए नहीं, बल्कि युद्ध को जड़ से मिटाने के लिए करना चाहता है।
ईरान की 10 शर्तें: क्या वाशिंगटन को होगा मंजूर?
ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से जो 10 सूत्रीय एजेंडा पेश किया है, वह वाशिंगटन की 15 शर्तों का करारा जवाब माना जा रहा है। इन शर्तों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। ईरान की मुख्य शर्तें निम्नलिखित हैं:
- प्रतिबंधों की पूर्ण समाप्ति: ईरान ने मांग की है कि उस पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत और स्थायी रूप से हटाया जाए।
- भविष्य की सुरक्षा गारंटी: अमेरिका और इजरायल को यह लिखित गारंटी देनी होगी कि भविष्य में ईरान की संप्रभुता पर कोई हमला नहीं होगा।
- लेबनान में युद्धविराम: ईरान की एक बड़ी शर्त यह है कि इजरायल को लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ चल रहे अपने सैन्य अभियानों को तुरंत बंद करना होगा।
- पुनर्निर्माण फंड: युद्ध के दौरान ईरान के बुनियादी ढांचे (बिजली घर, पुल आदि) को जो नुकसान पहुँचा है, उसके लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को हर्जाना देना होगा।
- हॉर्मुज ‘ट्रांजिट फीस’: ईरान ने एक बेहद अनोखा प्रस्ताव रखा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हर विदेशी जहाज पर 2 मिलियन डॉलर (करीब 16.5 करोड़ रुपये) का शुल्क (Fee) लगाया जाए।
- ओमान के साथ साझेदारी: इस शुल्क से होने वाली कमाई को ईरान और ओमान (जो जलडमरूमध्य के दूसरी तरफ है) आपस में साझा करेंगे। इस पैसे का उपयोग क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए किया जाएगा।
- परमाणु संप्रभुता का सम्मान: ईरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार को नहीं छोड़ेगा, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के लिए नए प्रोटोकॉल पर चर्चा को तैयार है।
- सैन्य वापसी: क्षेत्र से अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी को कम करने का एक समयबद्ध खाका तैयार किया जाए।
- कैदियों की रिहाई: दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे कैदियों के आदान-प्रदान को पूर्ण रूप दिया जाए।
- स्थायी शांति संधि: 14 दिनों के भीतर एक ऐसी संधि का मसौदा तैयार हो जो भविष्य में युद्ध की संभावना को शून्य कर दे।
हॉर्मुज से ‘वसूली’ का प्लान: चीन का रणनीतिक दिमाग?
ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 2 मिलियन डॉलर का शुल्क लगाने की शर्त सबसे ज्यादा चर्चा में है। कूटनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि इस शर्त के पीछे चीन का दिमाग हो सकता है। चीन चाहता है कि हॉर्मुज की सुरक्षा और संचालन की जिम्मेदारी क्षेत्रीय देशों (ईरान और ओमान) के पास रहे, न कि पश्चिमी देशों की नौसेना के पास।
यदि यह शर्त मानी जाती है, तो ईरान को आर्थिक रूप से बड़ी मजबूती मिलेगी और वह अपने ऊपर हुए हमलों के नुकसान की भरपाई दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग के जरिए कर सकेगा। हालांकि, वाशिंगटन और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियों के लिए यह शर्त गले से नीचे उतारना मुश्किल होगा। लेकिन ‘सीजफायर’ को बचाए रखने के लिए अमेरिका इस पर बातचीत के लिए मेज पर आने को तैयार हो गया है।
’अस्थायी’ नहीं ‘स्थायी’ समाधान की तलाश
ईरान ने न्यूयॉर्क टाइम्स और Axios के माध्यम से यह संदेश भेजा है कि वह ‘अस्थायी शांति’ के झांसे में नहीं आएगा। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम ‘गाजा या लेबनान जैसी स्थिति’ नहीं चाहते, जहां कागज पर सीजफायर हो लेकिन इजरायल और अमेरिका जब चाहें हमला कर दें। ईरान का तर्क है कि 14 दिनों का यह समय केवल एक ‘पॉज बटन’ (Pause Button) नहीं है, बल्कि यह एक नई शुरुआत होनी चाहिए।
यही कारण है कि ईरान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की मध्यस्थता की सराहना की है। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में होने वाली पहली उच्च स्तरीय बैठक इस दिशा में निर्णायक होगी। वहां ईरान अपनी इन 10 शर्तों को लेकर अडिग रह सकता है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने 15 बिंदुओं पर जोर देंगे।
ट्रंप का ‘सॉफ्ट’ रुख और कूटनीतिक मजबूरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि वे ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव के ‘सामान्य ढांचे’ (General Framework) को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार करने को तैयार हैं। यह ट्रंप की पिछली धमकियों से काफी अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप पर घरेलू दबाव और चीन की बढ़ती कूटनीतिक दखलंदाजी ने उन्हें लचीला होने पर मजबूर किया है।
Axios की रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप प्रशासन इस बात से राहत महसूस कर रहा है कि ईरान ने कम से कम हॉर्मुज को दो हफ्तों के लिए खोलने पर सहमति दी है। इससे अमेरिका के भीतर तेल की कीमतों में गिरावट आएगी और ट्रंप को अपनी राजनीति चमकाने का मौका मिलेगा। लेकिन क्या ट्रंप ईरान के ‘2 मिलियन डॉलर शुल्क’ और ‘लेबनान युद्ध रोकने’ वाली शर्तों को मानेंगे? यह एक बड़ा सवाल है।
निष्कर्ष: 14 दिनों की अग्निपरीक्षा और चीन का साया
ईरान द्वारा सीजफायर की पुष्टि और उसकी कड़े शर्तों ने इस संघर्ष को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब यह लड़ाई मिसाइलों से हटकर कागजों और कूटनीतिक मेजों पर आ गई है। चीन इस पूरी प्रक्रिया का ‘गारंटर’ बना हुआ है। बीजिंग ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका इन शर्तों पर ईमानदारी से बात नहीं करता है, तो वह ईरान के साथ अपने रक्षा संबंधों को और गहरा करेगा।
अगले 14 दिन दुनिया की धड़कनें बढ़ाए रखेंगे। भागलपुर से लेकर न्यूयॉर्क तक, हर कोई बस यही देख रहा है कि शुक्रवार की इस्लामाबाद बैठक से क्या निकलकर आता है। क्या ईरान की ये 10 शर्तें एक नए विश्व आदेश की नींव रखेंगी या फिर ये शर्तें ही सीजफायर टूटने की वजह बनेंगी? फिलहाल, ईरान की सड़कों पर जश्न है और वाशिंगटन में बैठकों का दौर जारी है। कूटनीति की यह बिसात अब अपनी सबसे चाल चलने को तैयार है।


