
जहानाबाद। 08 अप्रैल 2026:बिहार के जहानाबाद जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों के मन में गहरा खौफ भर दिया है। कड़ौना थाना क्षेत्र के कनौदी बाईपास के पास स्थित एक निजी आवासीय विद्यालय (हॉस्टल) में पांच साल के मासूम छात्र की हत्या का मामला अब एक बेहद घिनौने मोड़ पर आ गया है। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि मासूम की हत्या से पहले उसके साथ सामूहिक दुराचार (गैंगरेप) किया गया था। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल के संचालक सह प्रिंसिपल तरुण कुमार उर्फ गांधी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। कड़ौना थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
शिक्षा की आड़ में हैवानियत: पांच अप्रैल की वो काली रात
घटना की शुरुआत पांच अप्रैल की रात से होती है, जो उस मासूम के लिए काल बनकर आई। मृतक छात्र, जो यूकेजी (UKG) का छात्र था, उसी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता था। उसका बड़ा भाई भी उसी स्कूल के छात्रावास में रहता है। प्राथमिकी (FIR) में मृतक के पिता ने अपने बड़े बेटे की गवाही का हवाला देते हुए दिल दहला देने वाला दावा किया है। बड़े भाई ने बताया कि रविवार, पांच अप्रैल की रात करीब 11:15 बजे तक उसके छोटे भाई ने अन्य बच्चों के साथ टीवी पर फिल्म देखी थी। इसके बाद हॉस्टल के संचालक तरुण कुमार उर्फ गांधी वहां आए और छोटे भाई को अपने साथ सोने के बहाने अपने कमरे में ले गए।
अभिभावकों का आरोप है कि उसी कमरे के भीतर मासूम के साथ हैवानियत की गई। पिता के अनुसार, प्रिंसिपल और स्कूल के अन्य कर्मियों ने मिलकर बच्चे के साथ सामूहिक दुराचार किया। इस घिनौने कृत्य को छिपाने के लिए या बच्चे की तड़प को शांत करने के लिए दरिंदों ने धारदार हथियार का सहारा लिया और मासूम की निर्मम हत्या कर दी। सोमवार की सुबह जब बच्चा छात्रावास में लहूलुहान और जख्मी हालत में मिला, तो स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में उसे इलाज के लिए पटना ले जाया जा रहा था, लेकिन मासूम ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
पुलिसिया कार्रवाई और एसपी की जांच: सीसीटीवी ने खोली पोल
जहानाबाद के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अपराजित लोहान ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद कमान संभाली। मंगलवार को एसपी ने कनौदी बाईपास स्थित उस निजी विद्यालय का दौरा किया और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान स्कूल में लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगाला गया। एसपी की जांच में यह अहम बात सामने आई कि रविवार की पूरी रात बाहर से कोई भी व्यक्ति हॉस्टल के भीतर दाखिल नहीं हुआ था। इसका सीधा मतलब यह है कि जो कुछ भी हुआ, वह स्कूल की चहारदीवारी के भीतर और वहां मौजूद लोगों द्वारा ही किया गया।
एसपी ने स्कूल के कर्मियों से कड़ी पूछताछ की। जांच के बाद विद्यालय और छात्रावास को पूरी तरह सील कर दिया गया है। पुलिस ने आरोपी संचालक तरुण कुमार को गिरफ्तार कर मंगलवार की शाम जेल भेज दिया। इसके अलावा, हिरासत में लिए गए एक शिक्षक और दो महिला कर्मियों को पूछताछ के बाद फिलहाल बॉन्ड पर छोड़ दिया गया है, जबकि स्कूल के एक गार्ड से अब भी कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस सामूहिक दरिंदगी में कौन-कौन शामिल था और साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश किसने की।
संगीन धाराओं में मामला दर्ज: पॉक्सो और बीएनएस का शिकंजा
कड़ौना थाने में दर्ज प्राथमिकी में पुलिस ने अत्यंत कड़ी धाराओं का समावेश किया है। थानाध्यक्ष देवकांत वर्मा को इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65 (2), 64 (एफ), 70 (2), और 103 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 लगाई गई है। सामूहिक दुराचार और हत्या के आरोपों ने इस मामले को जघन्यतम श्रेणी में खड़ा कर दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह की धाराएं लगाई गई हैं, उनमें दोषी को मृत्युदंड या आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों का इंतजार कर रही है ताकि अदालत में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें। विद्यालय के रिकॉर्ड्स और वहां रह रहे अन्य बच्चों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि क्या पहले भी इस तरह की कोई शिकायत सामने आई थी।
पोस्टमार्टम और अंतिम विदाई: आंसुओं में डूबा परिवार
मंगलवार की सुबह पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में डॉक्टरों के एक विशेष मेडिकल बोर्ड ने मासूम के शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई है ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। पोस्टमार्टम के बाद जब बच्चे का शव परिजनों को सौंपा गया, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। मासूम के पिता और भाई का रो-रोकर बुरा हाल था। इसके बाद फतुहा घाट पर बच्चे का अंतिम संस्कार किया गया।
एक तरफ जहां परिवार अपने लाडले को खोने के गम में डूबा है, वहीं दूसरी तरफ उनके मन में आक्रोश भी है। मृतक के पिता ने मांग की है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए ताकि किसी और मासूम के साथ ऐसी हैवानियत न हो। ग्रामीणों में भी इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है और वे स्कूल संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
समाज और प्रशासन के सामने खड़े गंभीर सवाल
जहानाबाद की इस घटना ने निजी आवासीय विद्यालयों की कार्यप्रणाली और वहां बच्चों की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल उठता है कि जिस विश्वास के साथ अभिभावक अपने कलेजे के टुकड़े को हॉस्टल भेजते हैं, वहां अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? तरुण कुमार उर्फ गांधी जैसे लोग, जो शिक्षा के मंदिर का संचालन कर रहे हैं, उनके भीतर छिपी दरिंदगी ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या स्कूलों का लाइसेंस देने से पहले संचालकों का मनोवैज्ञानिक और चरित्र सत्यापन (Character Verification) अनिवार्य नहीं होना चाहिए?
बिहार में इस तरह की बढ़ती घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती हैं। हालांकि, जहानाबाद पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाई है, लेकिन पीड़ित परिवार को न्याय तब मिलेगा जब स्पीडी ट्रायल के जरिए दोषियों को अंजाम तक पहुँचाया जाएगा। फिलहाल, पूरे इलाके में तनाव और शोक का माहौल है। लोग बस यही दुआ कर रहे हैं कि उस मासूम की आत्मा को शांति मिले और उसके साथ हुई दरिंदगी का हिसाब कानून के हाथों बराबर हो।
जहानाबाद का यह कांड आने वाले समय में निजी स्कूलों के लिए कड़े कपासन और कड़े नियमों की आधारशिला बनेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। सुरक्षा के मानकों पर फेल रहने वाले ऐसे स्कूलों के खिलाफ अब सरकार को भी सख्त रुख अख्तियार करने की जरूरत है।


