इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बड़ी कार्रवाई, 12 हजार नशीले इंजेक्शन बरामद; दो अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरफ्तार

बिहार के सीमावर्ती इलाके में नशीली दवाओं के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। में भारत-नेपाल सीमा के पास पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 12 हजार नशीले इंजेक्शन बरामद किए हैं। इस मामले में दो अंतरराष्ट्रीय तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है, जो इन प्रतिबंधित दवाओं को नेपाल ले जाने की तैयारी में थे।

यह कार्रवाई पर बढ़ते नशा तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ एक अहम कदम मानी जा रही है। पुलिस के अनुसार, यह खेप युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने के लिए इस्तेमाल की जाती और इसे सीमा पार पहुंचाया जाना था।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आंध्र प्रदेश नंबर की एक संदिग्ध कार में भारी मात्रा में नशीले इंजेक्शन लाए जा रहे हैं और इन्हें नेपाल भेजने की योजना है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने महदेवा गांव के पास घेराबंदी कर दी और संदिग्ध वाहन को रोककर तलाशी ली।

तलाशी के दौरान कार से करीब 12 हजार इंजेक्शन बरामद किए गए, जिनमें , और जैसी दवाएं शामिल थीं। ये दवाएं सामान्य रूप से चिकित्सकीय उपयोग के लिए होती हैं, लेकिन इनका दुरुपयोग नशे के रूप में किया जाता है, जिससे यह बेहद खतरनाक हो जाती हैं।

इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व थानाध्यक्ष सह प्रशिक्षु आईपीएस ने किया। उनके नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न केवल बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद कीं, बल्कि तस्करी में शामिल दो आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार तस्करों की पहचान नेपाल के बारा जिले के कलैया निवासी वकील महतो और परसा जिले के बीरगंज निवासी पूरन ठाकुर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी लंबे समय से इस अवैध कारोबार में शामिल थे और सीमा क्षेत्र की कमजोर निगरानी का फायदा उठाकर नशीली दवाओं की तस्करी कर रहे थे।

पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया है कि ये इंजेक्शन आंध्र प्रदेश से मंगाए जाते थे और फिर इन्हें नेपाल में सप्लाई किया जाता था। यह एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है, जिसमें कई लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है।

इस मामले में और के नेतृत्व में भी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई लंबे समय से चल रहे नशा तस्करी के कारोबार पर बड़ी चोट है।

बरामद की गई दवाएं खास तौर पर युवाओं के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं। नर्फिन का इस्तेमाल दर्द निवारक के रूप में होता है, लेकिन इसका दुरुपयोग नशे के लिए किया जाता है। वहीं, फेनारगन और डायजापाम जैसी दवाएं नींद लाने वाली होती हैं और इनके सेवन से तेजी से लत लग सकती है।

पुलिस अधिकारियों ने चिंता जताई है कि इस तरह की दवाओं का अवैध इस्तेमाल युवाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। इसके चलते अपराध दर में भी वृद्धि होती है और समाज में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

जांच के दौरान यह भी संकेत मिले हैं कि इस अवैध कारोबार में कुछ स्थानीय दवा दुकानों की संलिप्तता हो सकती है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है और संदिग्ध दुकानों पर नजर रखी जा रही है।

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही, सीमा क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और अन्य थानों को भी अलर्ट कर दिया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस तरह के अभियान और तेज किए जाएंगे, ताकि नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क को खत्म किया जा सके।

कुल मिलाकर, रक्सौल में हुई यह कार्रवाई न केवल पुलिस की बड़ी सफलता है, बल्कि यह एक मजबूत संदेश भी है कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इससे उम्मीद की जा रही है कि सीमा पार होने वाली इस तरह की तस्करी पर अंकुश लगेगा और समाज को नशे के खतरे से बचाया जा सकेगा।

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