
नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया के समुद्री रास्तों में गहराते तनाव के बीच भारत और ईरान के कूटनीतिक रिश्तों में एक बड़ी तल्खी सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों पर ईरानी नौसेना द्वारा की गई फायरिंग की घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार, 18 अप्रैल 2026 की शाम को विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली को दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में तलब किया। सूत्रों के अनुसार, शाम करीब 6:30 बजे हुई इस मुलाकात में भारत ने अपने कमर्शियल जहाजों पर हुई गोलीबारी को लेकर औपचारिक और कड़ा विरोध (Protest) दर्ज कराया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में निर्दोष व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना समुद्री सुरक्षा और ‘फ्री नेविगेशन’ के वैश्विक सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। इस घटना ने न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आहट को और अधिक तेज कर दिया है।
क्या हुआ था समंदर में? दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की पूरी दास्तां
शनिवार की दोपहर होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे दो भारतीय व्यापारिक जहाजों—‘जग अर्णव’ (Jag Arnav) और ‘सनमार हेराल्ड’ (Sanmar Herald)—को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की गनबोट्स ने घेर लिया था। टैंकर ट्रैकिंग डेटा और वैश्विक नौसैनिक एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, ‘जग अर्णव’ पर ईरानी नौसैनिकों ने सीधे तौर पर फायरिंग की। यह जहाज एक विशाल कच्चा तेल टैंकर (VLCC) है, जो इराक से लगभग 20 लाख बैरल तेल लेकर भारत की ओर आ रहा था।
जैसे ही जहाज होर्मुज के संकरे रास्ते में पहुँचा, ईरानी नौसेना ने रेडियो संदेश के जरिए उसे वापस मुड़ने का आदेश दिया। जब जहाज ने अपनी गति कम नहीं की, तो चेतावनी के तौर पर भारी गोलाबारी शुरू कर दी गई। फायरिंग की आवाज से जहाज पर सवार चालक दल के सदस्यों में दहशत फैल गई। जान बचाने के लिए ‘जग अर्णव’ और उसके पास ही चल रहे ‘सनमार हेराल्ड’ को अपना रास्ता बदलना पड़ा और वे वापस पश्चिम की ओर मुड़ गए। राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी भी भारतीय नागरिक के घायल होने या जहाज के डूबने जैसी स्थिति पैदा नहीं हुई, लेकिन फायरिंग ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारे में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
विदेश मंत्रालय की कार्रवाई: राजदूत से 20 मिनट का ‘कठोर’ संवाद
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को “बेहद गंभीर और अस्वीकार्य” माना है। जैसे ही भारतीय जहाजों पर हमले की पुख्ता जानकारी मिली, विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली को तलब करने का निर्णय लिया। शाम 6:30 बजे जब राजदूत साउथ ब्लॉक पहुँचे, तो उन्हें भारत की ओर से एक ‘डिमार्च’ (Demarche) सौंपा गया।
मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारत ने ईरानी राजदूत से यह पूछा है कि आखिर किस आधार पर भारतीय जहाजों को निशाना बनाया गया, जबकि भारत ने हमेशा इस क्षेत्र में शांति का समर्थन किया है। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को किसी भी देश की निजी जागीर नहीं बनने दिया जा सकता। भारत ने मांग की है कि ईरान अपने नौसैनिकों को संयम बरतने का निर्देश दे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसकी गारंटी दे। राजदूत फतहाली ने भारत की चिंताओं को तेहरान तक पहुँचाने का आश्वासन दिया है, लेकिन उन्होंने इस कार्रवाई के पीछे अमेरिका की नाकाबंदी को मुख्य कारण बताया है।
ईरान का पलटवार: “अमेरिका की समुद्री डकैती का जवाब है यह कार्रवाई”
ईरानी राजदूत ने भारत की आपत्तियों के बीच अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ईरान की यह कार्रवाई किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं, बल्कि अमेरिका द्वारा लगाई गई ‘अवैध नाकाबंदी’ के विरोध में है। ईरान की सैन्य कमान (IRGC) ने शनिवार सुबह ही एक बयान जारी कर कहा था कि होर्मुज पर अब उनका ‘सख्त सैन्य नियंत्रण’ (Strict Military Control) लौट आया है। ईरान का तर्क है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों और तेल टैंकरों की जो नाकेबंदी की है, वह वास्तव में ‘समुद्री डकैती’ (Piracy) है।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक वह किसी भी जहाज को—चाहे वह भारत का हो या किसी और देश का—बिना कड़े निरीक्षण और अनुमति के इस रास्ते से नहीं जाने देगा। यह घटनाक्रम इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि शुक्रवार को ही ईरान के विदेश मंत्री ने बयान दिया था कि होर्मुज का रास्ता व्यापारिक जहाजों के लिए ‘पूरी तरह खुला’ है। 24 घंटे के भीतर ईरान के रुख में आए इस बदलाव ने कूटनीतिक विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है।
भारतीय नौसेना की सतर्कता: ‘ऑपरेशन संकल्प’ और बढ़ी हुई गश्त
होर्मुज में हुई इस फायरिंग के बाद भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी मुस्तैदी बढ़ा दी है। हालांकि, फायरिंग के समय घटना स्थल पर कोई भारतीय युद्धपोत मौजूद नहीं था, लेकिन भारत के दो विध्वंसक (Destroyers), एक फ्रिगेट और एक टैंकर ओमान की खाड़ी में पहले से ही तैनात हैं। ये जहाज ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत भारतीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैनात किए गए हैं।
नौसेना मुख्यालय से मिले आदेश के बाद अब इन युद्धपोतों को होर्मुज के मुहाने के करीब भेजा जा रहा है ताकि संकट में फंसे भारतीय जहाजों को सुरक्षा कवच प्रदान किया जा सके। नौसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि भारत अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। समुद्री व्यापारिक संगठनों ने भारतीय नौसेना से मांग की है कि अब इस खतरनाक रास्ते पर ‘एस्कॉर्ट सर्विस’ (Escort Service) शुरू की जाए ताकि भविष्य में ईरानी या अन्य ताकतों द्वारा भारतीय जहाजों पर हमला न हो सके।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर संकट: 20% तेल सप्लाई दांव पर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील ‘चोक पॉइंट’ है। यहाँ से दुनिया के कुल कच्चे तेल की खपत का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े तेल आयातक देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। ‘जग अर्णव’ जैसे सुपरटैंकर पर फायरिंग होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तत्काल उछाल आने की आशंका है।
18 अप्रैल की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी समय युद्ध भड़क सकता है। यदि यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है या असुरक्षित बना रहता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत की आर्थिक रफ़्तार सीधे तौर पर इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि भारत सरकार इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती और सीधे ईरानी नेतृत्व से जवाब मांग रही है।
डोनाल्ड ट्रंप की नाकाबंदी और भारत की कशमकश
भारत के लिए यह स्थिति एक ‘दोधारी तलवार’ जैसी है। एक ओर अमेरिका है, जिसने ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ की नीति अपनाते हुए नाकाबंदी कर रखी है और भारत से सहयोग की उम्मीद कर रहा है। दूसरी ओर ईरान है, जो भारत का पुराना ऊर्जा साझेदार है और चाबहार जैसे प्रोजेक्ट्स में भागीदार है। लेकिन जिस तरह से ईरानी नौसेना ने भारतीय झंडे वाले जहाजों पर गोलियां चलाई हैं, उसने भारत को कड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दे रखी है कि अगर ईरान ने होर्मुज बंद किया, तो वे उसके परमाणु ठिकानों पर हमला करेंगे। अब भारतीय जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका को हस्तक्षेप करने का एक और बहाना मिल सकता है। भारत की कूटनीति के लिए यह अग्निपरीक्षा का समय है कि वह कैसे अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और बिना किसी युद्ध में शामिल हुए इस संकट का समाधान निकाले।
समंदर की लहरों पर बारूद की गूँज
शनिवार की रात 8:30 बजे प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन में भी इस वैश्विक संकट और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा होने की उम्मीद है। 18 अप्रैल 2026 की यह शाम दिल्ली के साउथ ब्लॉक से लेकर तेहरान के विदेश मंत्रालय तक तनाव भरी रही। राजदूत को तलब करना भारत का एक कड़ा संदेश है कि वह अपने नागरिकों और अपनी संपत्ति की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
आने वाले 48 घंटे यह तय करेंगे कि क्या ईरान भारत की चिंताओं को समझते हुए अपने रुख में नरमी लाएगा या फिर होर्मुज का यह संकरा रास्ता दुनिया के लिए एक नए युद्ध का मैदान बनेगा। ‘जग अर्णव’ और ‘सनमार हेराल्ड’ अब सुरक्षित जलक्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी पीठ पर ईरानी गोलियों के निशान भारत की समुद्री संप्रभुता पर एक घाव की तरह हैं, जिसका उपचार अब केवल कूटनीति की मेज पर ही संभव है। फिलहाल, भारतीय नौसेना के रडार और विदेश मंत्रालय के फोन चौबीसों घंटे सक्रिय हैं।


