बिहार पुलिस की वैज्ञानिक क्षमताओं में बढ़ोतरी : श्वान दस्ता, मोबाइल फॉरेंसिक वैन और जिला चलन्त विधि विज्ञान इकाई में नया आयाम

पटना, 10 सितम्बर 2025।बिहार पुलिस अपराध अनुसंधान और वैज्ञानिक जांच के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियाँ हासिल कर रही है। राज्य में श्वान दस्ता (Dog Squad), मोबाइल फॉरेंसिक वैन और जिला चलन्त विधि विज्ञान इकाई को मज़बूती प्रदान करने के लिए बड़े स्तर पर काम हो रहा है।


श्वान दस्ता (Dog Squad) की ताकत दोगुनी

वर्तमान में अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार के अधीन 67 प्रशिक्षित श्वान कार्यरत हैं। ये श्वान न केवल अपराध अनुसंधान में सहयोग करते हैं बल्कि मादक पदार्थों और विस्फोटक की खोज, वीआईपी सुरक्षा और रेलवे व न्यायालय जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों की जांच में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बिहार पुलिस की वैज्ञानिक क्षमताओं में बढ़ोतरी : श्वान दस्ता, मोबाइल फॉरेंसिक वैन और जिला चलन्त विधि विज्ञान इकाई में नया आयाम

श्वान दस्ता में फिलहाल—

  • एक्सप्लोसिव डिटेक्टर : 19
  • ट्रेकर : 21
  • लिकर डिटेक्शन : 21
  • नारकोटिक्स : 06

नस्लवार वितरण : लेब्राडोर (55), गोल्डन रिट्रीवर (2), बेल्जियन मेलिनोईस (6), जर्मन शेफर्ड (4)

👉 इस वर्ष 30 नये श्वानों की खरीद की गई है, जिनका प्रशिक्षण IITA, हैदराबाद में जून 2025 से शुरू है और फरवरी 2026 तक वे ड्यूटी पर आ जाएंगे। इसके अलावा 50 और श्वान पंजाब होम गार्ड कैनाइन ट्रेनिंग एंड ब्रीडिंग इंस्टिट्यूट से खरीदे जा रहे हैं।

इस तरह, वर्ष 2026 तक कुल 147 प्रशिक्षित श्वान बिहार पुलिस के पास उपलब्ध होंगे।


मोबाइल फॉरेंसिक वैन से बढ़ेगी त्वरित जांच क्षमता

1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानूनों में वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए बिहार में फॉरेंसिक क्षमताओं का विस्तार किया जा रहा है।

वर्तमान में राज्य के 13 क्षेत्रों में 17 मोबाइल फॉरेंसिक वैन कार्यरत हैं। ये वैन हाई-टेक उपकरणों से लैस हैं, जिनमें फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट, नारकोटिक्स, रक्त और अन्य जैविक साक्ष्य संकलन किट, हाई-रेजोल्यूशन कैमरा और आर्टिफिशियल लाइट सोर्स शामिल हैं।

  • 34 और नई वैन अक्टूबर 2025 तक जिलों में उपलब्ध हो जाएंगी।
  • भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए 50 अतिरिक्त मोबाइल वैन खरीदने का प्रस्ताव गृह विभाग के माध्यम से भारत सरकार को भेजा जाएगा।

👉 इन योजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार में कुल 101 मोबाइल फॉरेंसिक वैन होंगी।


जिला चलन्त विधि विज्ञान इकाई की उपलब्धियाँ

राज्य में फिलहाल पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशालाएँ कार्यरत हैं। जल्द ही पूर्णिया प्रयोगशाला भी शुरू होगी। इनके अलावा 40 जिला चलन्त विधि विज्ञान इकाई (District Mobile Forensic Units) सक्रिय हैं।

  • जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक कुल 16,486 मामलों में जिला पुलिस ने इन इकाइयों से सहयोग माँगा।
  • इनमें से 12,000 से अधिक घटनास्थलों पर फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने पहुँचकर साक्ष्य संकलन किया।
  • यह उपलब्धि 73 प्रतिशत सफलता दर को दर्शाती है।

श्वान दस्ता की मजबूती, मोबाइल फॉरेंसिक वैन की संख्या में बढ़ोतरी और जिला चलन्त विधि विज्ञान इकाइयों की सक्रियता ने बिहार पुलिस को वैज्ञानिक जांच और अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। वर्ष 2026 तक राज्य में फॉरेंसिक और अपराध अनुसंधान की क्षमता दोगुनी हो जाएगी।


 

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