भागलपुर | 2 जुलाई 2025: बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने नीरा टेपर्स और विक्रेताओं की आजीविका को मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए नीरा प्रसंस्करण इकाई का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि और ताड़ी टेपर्स उपस्थित रहे।
डॉ. सिंह ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर पल्मीरा नीरा प्रसंस्करण तकनीक विकसित करने वाला देश का पहला संस्थान बन गया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय बीते कई वर्षों से नीरा के सुरक्षित संग्रहण और संरक्षण पर शोध कर रहा था, जिसका परिणाम अब एक पूर्ण प्रौद्योगिकी के रूप में सामने आया है।
प्रसंस्करण इकाई की क्षमता 100 लीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। कुलपति ने यह भी कहा कि बिहार में 90 लाख से अधिक पाम वृक्ष हैं, जिनकी क्षमता का समुचित दोहन किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नीरा उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से राज्य में उद्यमिता विकास और रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं बताईं।
डॉ. सिंह ने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय टेपर्स को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा, जिससे उनकी आजीविका और जीवन स्तर में सुधार हो सके। इस अवसर पर डॉ. अहमर आफ्ताब, डॉ. वसीम सिद्दीकी, डॉ. शमशेर अहमद और डॉ. विवेक कुमार जैसे प्रमुख वैज्ञानिकों की भूमिका को भी सराहा गया।
डॉ. वसीम सिद्दीकी ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय ने नीरा संग्रहण के लिए विशेष बॉक्स और पॉलीबैग डिज़ाइन और पेटेंट किए हैं, ताकि उच्च गुणवत्ता वाला नीरा प्राप्त किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि विभाग की प्रसंस्करण सुविधाएं सामुदायिक संरक्षण के लिए खुली हैं, जिससे ग्रामीणों को सीधे लाभ मिलेगा।
नीरा संरक्षण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने पाश्चुरीकरण, कैनिंग और नीरा पाउडर बनाने जैसी उन्नत तकनीकें विकसित की हैं। नीरा पाउडर को पानी में मिलाकर ताजे नीरा जैसा पेय तैयार किया जा सकता है, जिससे इसके विपणन और आपूर्ति की सीमा को व्यापक बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री नीरा संवर्धन योजना के तहत यह इकाई नीरा उद्योग के विकास में एक मील का पत्थर मानी जा रही है। उम्मीद है कि इस पहल से बिहार के टेपर्स को आर्थिक सशक्तिकरण का एक नया अवसर मिलेगा।


