पटना, 5 जून 2025:
बिहार में डोमिसाइल नीति (स्थानीय निवास आधारित आरक्षण) की मांग को लेकर एक बार फिर छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही युवाओं ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। गुरुवार को पटना की सड़कों पर छात्र तिरंगा लेकर मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जेपी गोलंबर के पास ही रोक दिया।
क्या है छात्रों की मांग?
छात्रों का कहना है कि बिहार में डोमिसाइल नीति लागू न होने से राज्य के युवाओं को नौकरी में अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों से प्रतियोगिता करनी पड़ती है, जिससे उन्हें भारी नुकसान होता है। देश के कई राज्यों में यह नीति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लागू है, जिससे वहां के छात्रों को प्राथमिकता मिलती है।
छात्र नेता दिलीप ने कहा:
“बिहार में जनसंख्या अधिक है, लेकिन उद्योग-धंधों की भारी कमी है। ऐसे में यहां के युवाओं की रोजगार के लिए सरकारी नौकरियों पर निर्भरता बढ़ जाती है। यदि सरकार डोमिसाइल नीति लागू नहीं करती है, तो बिहार के छात्र अपने अधिकारों से वंचित रह जाएंगे।”
क्या कहते हैं प्रदर्शनकारी छात्र?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि अगर सरकार प्रत्यक्ष रूप से डोमिसाइल नीति लागू नहीं कर सकती, तो कम से कम परीक्षाओं में स्थानीय प्रश्नों की संख्या बढ़ा कर बिहार के युवाओं को अप्रत्यक्ष लाभ दे। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में स्थानीयता का लाभ वहां के छात्रों को मिलता है, लेकिन बिहार में ऐसा कोई तंत्र नहीं है।
चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
छात्रों ने यह स्पष्ट किया कि अगर सरकार जल्द से जल्द डोमिसाइल नीति लागू नहीं करती है, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में एकजुट होकर इसका बहिष्कार करेंगे। छात्रों का कहना है कि वे अब जागरूक हो चुके हैं और सरकार को युवाओं के भविष्य से खेलने नहीं देंगे।
क्या है डोमिसाइल नीति?
डोमिसाइल नीति एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें किसी राज्य की सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाती है। यह नीति पहले से ही महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड जैसे कई राज्यों में किसी न किसी रूप में लागू है।


