
बांका में ‘मौत’ के कारखाने पर खाकी का प्रहार: सरवा गांव में चल रही मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़; एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त सर्जिकल स्ट्राइक में भारी मात्रा में हथियार और मशीनें जब्त, बोध नारायण मंडल के घर से फल-फूल रहा था अवैध कारोबार
- बांका जिले के धोरैया थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध हथियारों के निर्माण के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है, जहाँ एक घर के भीतर अवैध मिनी गन फैक्ट्री संचालित की जा रही थी।
- बिहार एसटीएफ की आर्म्स सेल से प्राप्त अत्यंत गोपनीय और सटीक सूचना के आधार पर बांका पुलिस अधीक्षक उपेंद्रनाथ वर्मा ने एक विशेष टीम का गठन किया, जिसने सरवा गांव में छापेमारी की।
- बौंसी एसडीपीओ इंद्रजीत बैठा के नेतृत्व में हुई इस छापामारी में धोरैया पुलिस ने बोध नारायण मंडल के घर से न केवल निर्मित और अर्धनिर्मित हथियार बरामद किए, बल्कि हथियार बनाने का पूरा कारखाना ही जब्त कर लिया।
- पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने इलाके में सक्रिय अपराधियों और हथियार तस्करों के बीच हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि पकड़ी गई फैक्ट्री से राज्य के कई हिस्सों में हथियारों की सप्लाई होने की आशंका जताई जा रही है।
- गिरफ्तार मुख्य आरोपी बोध नारायण मंडल का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह लंबे समय से इस अवैध धंधे में संलिप्त था और उसके तार बड़े अपराधी गिरोहों से जुड़े हो सकते हैं।
बांका/धोरैया (द वॉयस ऑफ बिहार)।
अंधेरी कोठरी में बारूद का खेल: जब सरवा गांव में गूँजी पुलिस की दबिश
बांका जिला, जो अपनी शांत वादियों और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, वहां के धोरैया थाना क्षेत्र अंतर्गत सरवा गांव में पर्दे के पीछे एक खौफनाक खेल चल रहा था। गांव की गलियों के बीच एक साधारण सा दिखने वाला घर वास्तव में ‘मौत’ का कारखाना बना हुआ था, जहाँ दिन-रात लोहे को गलाकर और तराशकर उन हथियारों को आकार दिया जा रहा था जो समाज में अशांति फैलाने के काम आते। गुरुवार की सुबह जब धोरैया पुलिस ने बौंसी एसडीपीओ इंद्रजीत बैठा के नेतृत्व में सरवा गांव में बोध नारायण मंडल के घर को चारों तरफ से घेरा, तो गांव वाले भी दंग रह गए। पुलिस की इस दबिश ने एक ऐसे काले अध्याय का खुलासा किया है जो जिले की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।
एसटीएफ का सटीक खुफिया तंत्र और पुलिस अधीक्षक का निर्देश
इस पूरी कार्रवाई की नींव बिहार एसटीएफ (Special Task Force) की ‘आर्म्स सेल’ ने रखी थी। एसटीएफ को लगातार सूचना मिल रही थी कि बांका के ग्रामीण अंचलों में कुछ लोग अवैध रूप से आधुनिक पिस्तौलों का निर्माण कर रहे हैं। जब सूचना पुख्ता हो गई और सरवा गांव के एक विशेष घर को चिह्नित कर लिया गया, तब यह जानकारी बांका पुलिस अधीक्षक उपेंद्रनाथ वर्मा के साथ साझा की गई। पुलिस अधीक्षक ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बौंसी एसडीपीओ इंद्रजीत बैठा को तत्काल कार्रवाई का जिम्मा सौंपा। यह ऑपरेशन इतना गोपनीय रखा गया कि स्थानीय थाने के केवल चुनिंदा अधिकारियों को ही इसकी भनक लगी, ताकि अपराधी को भागने का मौका न मिले।
छापेमारी और बरामदगी: कारखाने के भीतर मिली ‘मौत की मशीनें’
पुलिस की टीम जब बोध नारायण मंडल के घर के भीतर दाखिल हुई, तो वहां का नजारा किसी छोटी फैक्ट्री जैसा था। कमरे के भीतर अवैध हथियारों के निर्माण के लिए जरूरी साजो-सामान बिखरा पड़ा था। तलाशी के दौरान पुलिस ने जो सामान बरामद किया, वह चौंकाने वाला था। बरामदगी की सूची कुछ इस प्रकार है:
- अर्धनिर्मित हथियार: दो अर्धनिर्मित पिस्तौल, जो अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया में थे।
- पार्ट्स और पुर्जे: पिस्तौल के कई बैरल, स्लाइड और छोटे-बड़े दर्जनों हिस्से, जिनसे दर्जनों हथियार तैयार किए जा सकते थे।
- गोला-बारूद: सात जिंदा गोलियां, जो इस बात का प्रमाण हैं कि वहां न केवल निर्माण होता था, बल्कि हथियारों की टेस्टिंग भी की जाती थी।
- भारी मशीनरी: हथियार बनाने में उपयोग होने वाले ग्राइंडर, लेथ मशीन के महत्वपूर्ण हिस्से, विभिन्न आकार के ड्रिल बिट, डाई और लोहे के कई धारदार औजार।
इन मशीनों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि यहाँ केवल ‘देशी कट्टे’ ही नहीं, बल्कि परिष्कृत (Sophisticated) पिस्तौलें भी बनाई जा रही थीं, जो देखने और मारक क्षमता में फैक्ट्री-मेड हथियारों के करीब होती हैं।
मुख्य आरोपी बोध नारायण मंडल: एक शातिर अपराधी का चेहरा
मौके से गिरफ्तार किया गया बोध नारायण मंडल कोई नौसिखिया नहीं है। पुलिस के अनुसार, उसका लंबा आपराधिक इतिहास रहा है और वह पहले भी अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है। बोध नारायण मंडल ने अपने घर को इस तरह सुरक्षित कर रखा था कि बाहर से किसी को यह अंदाजा भी न हो कि भीतर लोहे की कटाई और वेल्डिंग का काम हथियारों के लिए हो रहा है। वह न केवल एक ‘कारीगर’ था, बल्कि वह इन हथियारों की मार्केटिंग और सप्लाई चेन का भी मुख्य हिस्सा था। उसकी गिरफ्तारी से पुलिस को उम्मीद है कि जिले में सक्रिय अन्य छोटे कारखानों और तस्करों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लगेगी।
हथियारों की सप्लाई चेन और ‘मुंगेर कनेक्शन’ की जांच
बिहार में अवैध हथियारों के निर्माण की बात हो और मुंगेर का जिक्र न आए, ऐसा कम ही होता है। पुलिस अब इस बिंदु पर जांच कर रही है कि क्या बोध नारायण मंडल के तार मुंगेर के उन कारीगरों से जुड़े थे जो अब पुलिस की सख्ती के कारण पड़ोसी जिलों जैसे बांका, भागलपुर और खगड़िया में शरण ले रहे हैं। एसडीपीओ इंद्रजीत बैठा ने बताया कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य अब उन ‘खरीदारों’ तक पहुँचना है जो इन हथियारों के ऑर्डर देते थे। यह आशंका जताई जा रही है कि यहाँ निर्मित हथियार बांका के अलावा पड़ोसी राज्य झारखंड के सीमावर्ती इलाकों और बिहार के अन्य जिलों के अपराधी गिरोहों तक पहुँचाए जाते थे।
ग्रामीण सुरक्षा और पुलिस की भविष्य की रणनीति
सरवा गांव में हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी अब घनी आबादी वाले गांवों को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली किसी भी संदेहास्पद गतिविधि की सूचना तुरंत दें। एसडीपीओ इंद्रजीत बैठा ने कहा कि पुलिस गश्त और खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों को पनपने से पहले ही रोका जा सके। जब्त की गई लेथ मशीन और अन्य औजारों को विधि-विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) के पास भेजा जा सकता है ताकि यह पता चल सके कि इन औजारों से हाल के दिनों में कितने हथियार तैयार किए गए होंगे।
बांका पुलिस की एक बड़ी कामयाबी
मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ होना बांका पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यदि यह फैक्ट्री इसी तरह चलती रहती, तो आने वाले समय में जिले की विधि-व्यवस्था के लिए यह एक बड़ा सिरदर्द बन सकती थी। पुलिस अधीक्षक उपेंद्रनाथ वर्मा और एसडीपीओ इंद्रजीत बैठा के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने न केवल हथियारों की एक खेप को बाजार में जाने से रोका है, बल्कि अपराधियों के मनोबल पर भी करारी चोट की है। बोध नारायण मंडल की गिरफ्तारी से उम्मीद जगी है कि इस अवैध व्यापार के अन्य गुप्त ठिकानों का भी जल्द ही पर्दाफाश होगा।


