
टूटा मोबाइल और गायब सिम कार्ड ने उलझाई गुत्थी, जोगसर पुलिस और एफएसएल की टीम गहन तफ्तीश में जुटी
- भागलपुर के जोगसर थाना क्षेत्र अंतर्गत दीपनगर इलाके में बुधवार की शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब शंकर टॉकीज के समीप एक तीन मंजिला मकान की छत पर रहने वाली 22 वर्षीय युवती का शव दुपट्टे के फंदे से लटका पाया गया।
- मृतका की पहचान लोदीपुर थाना क्षेत्र के बसंतपुर तहवलपुर निवासी स्व. बच्चा दास की पुत्री सुलेखा कुमारी के रूप में हुई है, जो पिछले जनवरी महीने से यहाँ रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर बिहार पुलिस की तैयारी कर रही थी।
- घटना स्थल से बरामद युवती का मोबाइल पूरी तरह टूटा हुआ मिला है और उसमें से सिम कार्ड भी गायब है, जिसने इस मामले को केवल आत्महत्या न मानकर किसी बड़ी साजिश या मानसिक प्रताड़ना की ओर मोड़ दिया है।
- पड़ोसियों के अनुसार, सुलेखा अक्सर गुमसुम रहती थी और रोती पाई जाती थी, पूछने पर वह अपने माता-पिता की याद आने की बात कहती थी, लेकिन कमरे का दरवाजा खुला मिलना और मोबाइल की स्थिति कई अनकहे सवाल खड़े कर रही है।
- जोगसर थाना पुलिस ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम को बुलाकर मौके से फिंगरप्रिंट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं, जबकि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मौत के असली कारणों की पड़ताल शुरू कर दी गई है।
भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।
सपनों की उड़ान का दुखद अंत: वर्दी की चाहत और फंदे का शोर
सिल्क सिटी भागलपुर के जोगसर थाना क्षेत्र में बुधवार की शाम एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी, जिसने शिक्षा और संघर्ष के लिए पहचाने जाने वाले इस शहर को झकझोर कर रख दिया है। दीपनगर स्थित शंकर टॉकीज के पास एक तीन मंजिला मकान की छत पर बने एसबेस्टर के कमरे में रहने वाली 22 वर्षीय सुलेखा कुमारी ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। सुलेखा कोई साधारण युवती नहीं थी, वह एक ‘फाइटर’ थी जो समाज की बेड़ियों को तोड़कर खाकी वर्दी पहनने का सपना आँखों में सजोए हर सुबह सड़कों पर दौड़ लगाती थी। लेकिन किसे पता था कि बिहार पुलिस में भर्ती होकर अपराधियों को पकड़ने का जज्बा रखने वाली यह लड़की खुद एक रहस्यमयी मौत का शिकार हो जाएगी। 25 जनवरी से इस कमरे में रह रही सुलेखा की मौत ने कई ऐसे सवाल छोड़े हैं, जिनके जवाब अब जोगसर पुलिस और वैज्ञानिक विशेषज्ञों को तलाशने हैं।
घटना का खुलासा: पानी की तलाश और मौत का मंजर
बुधवार की शाम दीपनगर की एक सामान्य शाम थी, लेकिन उसी बिल्डिंग में नीचे रहने वाली डिंपल कुमारी के लिए यह शाम जीवन का सबसे बड़ा सदमा लेकर आई। बताया जाता है कि शाम के वक्त डिंपल के फ्लैट में पानी नहीं आ रहा था। पानी के मोटर का स्विच और व्यवस्था छत पर सुलेखा के कमरे के ठीक पास थी। जब डिंपल मोटर देखने ऊपर पहुँची, तो उसने देखा कि सुलेखा के कमरे का दरवाजा खुला हुआ है। जैसे ही उसकी नजर भीतर गई, उसके होश उड़ गए। सुलेखा अपने ही दुपट्टे से बने फंदे के सहारे छत की कुंडी से लटक रही थी। डिंपल की चीख सुनकर बिल्डिंग के अन्य किरायेदार भी दौड़कर ऊपर आए। मंजर इतना खौफनाक था कि सबने तुरंत पुलिस को सूचना दी और कमरे को उसी स्थिति में छोड़ दिया ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो।
संदेह के घेरे में ‘टूटा मोबाइल’ और ‘गायब सिम कार्ड’
पुलिस जब मौके पर पहुँची, तो उसे सुलेखा के कमरे में कुछ ऐसी चीजें मिलीं जिन्होंने सामान्य आत्महत्या के थ्योरी को पूरी तरह से उलझा दिया। सुलेखा का मोबाइल फोन कमरे में टूटा हुआ पड़ा था। सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह थी कि उस मोबाइल से सिम कार्ड गायब था। एक प्रतियोगी छात्रा, जिसका पूरा संपर्क सूत्र उसका मोबाइल होता है, उसका फोन टूटना और सिम का गायब होना यह दर्शाता है कि मौत से ठीक पहले या तो सुलेखा का किसी से बड़ा झगड़ा हुआ था या फिर कोई ऐसा व्यक्ति कमरे में मौजूद था जिसने सबूत मिटाने के उद्देश्य से सिम कार्ड निकाल लिया। लोगों का यह भी कहना है कि यदि कोई सुसाइड करता है, तो वह अक्सर दरवाजा अंदर से बंद करता है, लेकिन यहाँ दरवाजा खुला मिलना किसी बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी की आशंका को प्रबल करता है।
अक्सर रोती थी सुलेखा: गम था या कोई और दबाव?
पड़ोसी डिंपल कुमारी ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि सुलेखा अक्सर रोती रहती थी। जब भी उससे उसकी उदासी का कारण पूछा जाता, तो वह बड़ी सादगी से कहती थी कि उसे अपनी मम्मी और पापा की बहुत याद आती है। गौरतलब है कि सुलेखा के पिता का देहांत काफी समय पहले हो चुका है और उसकी माँ इन दिनों गंभीर रूप से बीमार चल रही हैं। मंगलवार की शाम को भी वह छत पर बैठकर रो रही थी। लेकिन क्या केवल याद आना ही आत्महत्या की वजह हो सकती है? या फिर ‘यादों’ की ओट में वह किसी गहरे दर्द या किसी व्यक्ति के मानसिक दबाव को छिपा रही थी? पुलिस अब सुलेखा के उन संपर्कों की जांच कर रही है जिनसे वह पिछले कुछ दिनों में बात कर रही थी।
रहस्यमयी आगंतुक: ‘भाई’ और ‘फुफेरे भाई’ का सच
बिल्डिंग में रहने वाले अन्य किरायेदारों ने पुलिस को बताया कि सुलेखा का भाई मंजीत भागलपुर में ही रहकर टोटो चलाता है और वह अक्सर अपनी बहन से मिलने आता था। लेकिन इसके अलावा एक और युवक भी था, जो खुद को सुलेखा का फुफेरा भाई बताता था और कभी-कभार उसके कमरे में आता-जाता देखा गया था। पुलिस अब उस ‘फुफेरे भाई’ की पहचान सुनिश्चित करने में जुटी है। क्या वह वाकई रिश्तेदार था या फिर सुलेखा के निजी जीवन का कोई ऐसा हिस्सा जिससे परिवार अनजान था? मोबाइल का टूटना और इस रहस्यमयी आगंतुक की भूमिका, ये दो ऐसे बिंदु हैं जिन पर जोगसर पुलिस का विशेष फोकस है।
पुलिस और एफएसएल की कार्रवाई: क्राइम सीन से मिले सुराग
जोगसर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम सीन को तुरंत सील कर दिया। भागलपुर से विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम को मौके पर बुलाया गया। एफएसएल के विशेषज्ञों ने कमरे के भीतर से उंगलियों के निशान (Fingerprints) लिए हैं और टूटे हुए मोबाइल के अवशेषों को भी जब्त किया है। सिम कार्ड की तलाश में कमरे के हर कोने की तलाशी ली गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में हर पहलू को देख रहे हैं—चाहे वह खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला हो या फिर हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश। देर रात पुलिस ने शव को फंदे से उतारा और कागजी कार्रवाई पूरी कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें
सुलेखा के परिजन देर रात भागलपुर पहुँच गए थे, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। लोदीपुर के बसंतपुर तहवलपुर गांव में इस घटना के बाद मातम पसरा है। जोगसर पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट इस मामले में ‘की-फैक्ट’ साबित होगी। रिपोर्ट से यह पता चलेगा कि युवती की मौत का समय क्या था और क्या उसके शरीर पर संघर्ष के कोई अन्य निशान (Struggle Marks) मौजूद थे। सिम कार्ड गायब होने के मामले में पुलिस अब तकनीकी सेल (Technical Cell) की मदद ले रही है ताकि सुलेखा के नंबर का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाला जा सके।
न्याय की आस में दीपनगर
शंकर टॉकीज के पास हुई इस घटना ने भागलपुर के रेंट पर रहने वाले छात्र-छात्राओं के बीच भी असुरक्षा की भावना पैदा की है। एक युवती जो बिहार पुलिस में शामिल होकर सेवा करना चाहती थी, उसकी अपनी सुरक्षा का क्या हुआ? क्या वह किसी ‘साइबर ब्लैकमेलिंग’ का शिकार थी या फिर रिश्तों के किसी उलझाव ने उसे मौत के गले लगा दिया? जोगसर पुलिस की जांच और एफएसएल की वैज्ञानिक रिपोर्ट ही इस सस्पेंस से पर्दा उठा पाएगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ की टीम सुलेखा कुमारी के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करती है और प्रशासन से मांग करती है कि इस मामले की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाई जाए।


