
अंबाला/नई दिल्ली: देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली UPSC सिविल सेवा परीक्षा को पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन बहुत कम लोग इसे हासिल कर पाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है कशिश बख्शी की, जिन्होंने अपनी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के UPSC 2023 में ऑल इंडिया 54वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए सही रणनीति और लगातार मेहनत ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
हरियाणा के अंबाला से आने वाली कशिश बख्शी एक आर्मी अधिकारी की बेटी हैं। उनके पिता की नौकरी के कारण उन्हें बचपन से ही अलग-अलग राज्यों में रहना पड़ा। उन्होंने कुल सात राज्यों में रहकर पढ़ाई की और दस अलग-अलग स्कूलों में शिक्षा हासिल की। आमतौर पर इतने बदलाव किसी भी छात्र के लिए चुनौतीपूर्ण होते हैं, लेकिन कशिश ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने हर नई जगह को सीखने का अवसर माना और खुद को हर माहौल में ढालना सीखा।
कशिश शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं। उन्होंने दसवीं में 10 CGPA और बारहवीं में 95 प्रतिशत अंक हासिल किए। उनकी स्कूली पढ़ाई का अंतिम चरण भोपाल के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पूरा हुआ। लगातार स्कूल बदलने के बावजूद उनका फोकस कभी नहीं टूटा, जो उनकी मजबूत मानसिकता को दर्शाता है।
स्कूल के बाद उन्होंने से लॉ की पढ़ाई की। इसी दौरान उन्होंने तय किया कि उन्हें सिविल सेवा में जाना है। उन्होंने कॉलेज के समय से ही UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी। यह निर्णय आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों को भी संतुलित करना पड़ता था।
कशिश सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने मूट कोर्ट और डिबेट प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और व्यक्तित्व में निखार आया, जो बाद में UPSC इंटरव्यू में काफी काम आया।
उनकी सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी के जरिए की। वह रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं और परीक्षा के करीब आने पर यह समय और बढ़ा देती थीं। उन्होंने NCERT की किताबों को अपनी तैयारी का आधार बनाया और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को नियमित रूप से हल किया। उनका वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र था, जिसमें उन्होंने गहराई से अध्ययन किया।
पहले प्रयास में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और दूसरे प्रयास में बेहतर रणनीति अपनाई। उनकी यह मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC 2023 में ऑल इंडिया 54वीं रैंक हासिल कर ली। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा मुकाम था, जिसने उनके बचपन के सपने को साकार कर दिया।
कशिश का मानना है कि UPSC जैसी परीक्षा के लिए अनुशासन और निरंतरता सबसे जरूरी है। उन्होंने कभी भी परिस्थितियों को अपने लक्ष्य के बीच नहीं आने दिया। बार-बार स्कूल बदलने जैसी चुनौतियों को उन्होंने अपने विकास का हिस्सा बनाया और हर अनुभव से कुछ नया सीखा।
उनकी कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। यह दिखाती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। सीमित संसाधन या बदलती परिस्थितियां सफलता की राह में रुकावट नहीं बनतीं, बल्कि उन्हें सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए तो वही ताकत बन जाती हैं।
आज कशिश बख्शी एक IAS अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रही हैं। उनकी सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि उन सभी छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सिविल सेवा का सपना देखते हैं। यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है, जो हर युवा को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।


