मानवता शर्मसार: 80 वर्षीय वृद्धा से दरिंदगी करने वाले किशोर को सजा, जेजेबी ने 18 महीने के लिए पटना ‘स्पेशल होम’ भेजा

मधुबनी। 08 अप्रैल 2026: बिहार के मधुबनी जिले से एक ऐसा अदालती फैसला सामने आया है जो समाज की गिरती नैतिकता और किशोर अपराधों की भयावहता पर मुहर लगाता है। किशोर न्याय परिषद (जेजेबी) ने अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र में एक 80 वर्षीय वृद्धा के साथ दुष्कर्म करने वाले किशोर को दोषी करार देते हुए 18 महीने के आवासन की सजा सुनाई है। प्रधान दंडाधिकारी न्यायाधीश अंकित आनंद, सदस्य पिंकी कुमारी और बिंदु भूषण ठाकुर की पीठ ने इस कृत्य को समाज के लिए कलंक मानते हुए दोषी को विशेष सुधार गृह (स्पेशल होम), पटना भेजने का आदेश दिया है।

​आधी रात की वो हैवानियत: मच्छरदानी में फंसा रह गया था आरोपी

​यह मामला जुलाई 2019 का है, जिसने उस वक्त पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में पेश किए गए तथ्यों के अनुसार:

  • तारीख: 10 जुलाई 2019 की रात।
  • वारदात: 80 वर्षीय वृद्धा अपने घर के बरामदे में मच्छरदानी लगाकर सो रही थी। तभी गांव का ही एक किशोर चुपके से मच्छरदानी के अंदर घुस गया और असहाय वृद्धा के साथ दुष्कर्म किया।
  • ग्रामीणों ने दबोचा: महिला की चीख-पुकार सुनकर जब उनकी बहू और पोता कमरे की ओर दौड़े, तो घबराहट में भागने की कोशिश कर रहा किशोर मच्छरदानी के जाल में ही फंस गया। ग्रामीणों ने उसे रंगेहाथ पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।

​मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की गवाही ने पुख्ता किया गुनाह

​अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी ऋपुंजय कुमार रंजन ने अदालत में इस अपराध को ‘जघन्य’ बताते हुए कड़ी सजा की वकालत की। इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण साबित हुए।

  • विशेष मेडिकल टीम: डॉ. मिश्रा, डॉ. रामा झा और डॉ. आकांक्षा की तीन सदस्यीय विशेष मेडिकल टीम ने पीड़िता की जांच की थी।
  • साक्ष्य: मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान और प्राइवेट पार्ट पर स्पर्म पाए गए थे। डॉक्टरों ने अदालत में गवाही देते हुए पुष्टि की कि वृद्धा के साथ क्रूरता की गई थी। इन गवाहियों ने आरोपी के बचाव की हर गुंजाइश को खत्म कर दिया।

​उम्र का विवाद: मदरसा बोर्ड के सर्टिफिकेट से हुआ फैसला

​सुनवाई के दौरान किशोर की उम्र को लेकर लंबी बहस हुई। बचाव पक्ष उसे कम उम्र का बताने की कोशिश कर रहा था। अंततः बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, पटना द्वारा जारी प्रमाण पत्र को आधार बनाया गया।

  • रिकॉर्ड के अनुसार: घटना के समय किशोर की सटीक उम्र 14 वर्ष 4 माह 23 दिन आंकी गई। चूंकि वह 18 वर्ष से कम था, इसलिए मामला किशोर न्याय परिषद (JJB) में चला।

​सुधार की उम्मीद या कानून की नर्मी?

​किशोर न्याय परिषद ने 6 अप्रैल 2026 को अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए दोषी को 18 महीने के लिए पटना स्थित स्पेशल होम भेजने का निर्देश दिया। यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो उम्र की आड़ में जघन्य अपराधों को अंजाम देते हैं। हालांकि, समाज का एक बड़ा तबका ऐसी घटनाओं में ‘किशोर’ शब्द की परिभाषा और मिलने वाली सजा की अवधि पर भी सवाल उठाता रहा है।

​अंधराठाढ़ी की यह घटना हमें याद दिलाती है कि नैतिक शिक्षा और पारिवारिक संस्कारों की कमी किस तरह समाज के सबसे कमजोर तबके—हमारे बुजुर्गों—को भी असुरक्षित बना रही है। 18 महीने की यह सजा अब उस किशोर के लिए प्रायश्चित और सुधार का अवसर होगी, जिसे कानून ने समाज से अलग ‘स्पेशल होम’ में रखने का फैसला किया है।

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