आरबीआई का बड़ा फैसला: नहीं बदलेगी आपके लोन की ईएमआई, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की अपनी पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के नतीजों का ऐलान कर दिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.25% पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल आपकी होम लोन या कार लोन की ईएमआई (EMI) में कोई बदलाव नहीं होने वाला है।

पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक चुनौतियों का साया

​गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीतिगत दरों की घोषणा करते हुए वैश्विक अनिश्चितताओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रही है। हालांकि, हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के संघर्ष विराम समझौते से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन लंबी अवधि में वैश्विक विकास दर को लेकर जोखिम अभी भी बने हुए हैं।

​गवर्नर ने स्पष्ट किया कि हालांकि भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति मजबूत है, लेकिन बाहरी झटकों और ऊर्जा बाजार में संभावित बाधाओं को देखते हुए आरबीआई ‘वेट एंड वॉच’ यानी ‘ठहरो और देखो’ की नीति अपना रहा है।

महंगाई और जीडीपी ग्रोथ का अनुमान

​आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान जताया है। तिमाही आधार पर देखें तो:

  • ​पहली तिमाही में महंगाई दर 4% रहने का अनुमान है।
  • ​दूसरी तिमाही में यह 4.4% रह सकती है।
  • ​तीसरी और चौथी तिमाही में इसके क्रमशः 5.2% और 4.7% रहने की संभावना जताई गई है।

​वहीं, देश की विकास दर (GDP Growth) को लेकर आरबीआई काफी उत्साहित है। पिछले वित्त वर्ष में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.6% रही थी, जो देश की मजबूत बुनियादी आर्थिक स्थिति को दर्शाती है।

मुख्य दरों पर एक नज़र

​आरबीआई ने रेपो रेट के साथ-साथ अन्य प्रमुख दरों में भी कोई फेरबदल नहीं किया है, जो इस प्रकार हैं:

  • रेपो रेट: 5.25%
  • स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF): 5.00%
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF): 5.50%
  • बैंक रेट: 5.50%

बाजार और आम आदमी पर असर

​विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह फैसला संतुलित है। एक ओर जहां महंगाई दर धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक तनाव के बीच ब्याज दरों को स्थिर रखकर आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी (नकदी) बनाए रखने की कोशिश की है।

​आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तत्काल कोई संभावना नहीं है। हालांकि, जो लोग अपनी ईएमआई कम होने का इंतजार कर रहे थे, उन्हें कम से कम अगली मौद्रिक नीति बैठक तक का इंतजार करना होगा। आरबीआई का ‘न्यूट्रल’ रुख यह संकेत देता है कि भविष्य में अगर वैश्विक हालात सुधरते हैं और महंगाई और कम होती है, तो दरों में कटौती के दरवाजे खुले रहेंगे।

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