
- राजधानी के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत जीपीओ गोलंबर फ्लाईओवर के पास मंगलवार की सुबह एक तेज रफ्तार ऑटो ने बाइक सवार पुलिस अधिकारी को जोरदार टक्कर मार दी।
- टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक चला रहे एएसआई मनोज कुमार हवा में कई फीट ऊपर उछल गए और उनकी बाइक अनियंत्रित होकर फ्लाईओवर के डिवाइडर से जा टकराई।
- हादसे के वक्त एएसआई मनोज कुमार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए कोतवाली थाने जा रहे थे, जहां महत्वपूर्ण कांडों की समीक्षा बैठक होनी थी।
- स्थानीय नागरिकों ने मानवता का परिचय देते हुए घायल पुलिस अधिकारी को तुरंत सड़क से उठाया और उपचार के लिए न्यू गार्डिनर अस्पताल पहुंचाया।
- वारदात को अंजाम देने के बाद ऑटो चालक भीड़ और अफरा-तफरी का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में सफल रहा, जिसकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।
पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।
जीपीओ फ्लाईओवर पर खौफनाक मंजर: जब रक्षक ही बना सड़क हादसे का शिकार
बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे, जब शहर अपनी पूरी रफ़्तार में था, जीपीओ गोलंबर फ्लाईओवर के पास एक ऐसा हादसा हुआ जिसने प्रत्यक्षदर्शियों की रूह कंपा दी। कोतवाली थाने में तैनात सहायक उपनिरीक्षक (ASI) मनोज कुमार अपनी बाइक पर सवार होकर ड्यूटी के लिए निकल रहे थे। जैसे ही वे फ्लाईओवर के पास पहुंचे, करबिगहिया की ओर से आ रहे एक अनियंत्रित ऑटो ने उनकी बाइक को ऐसी टक्कर मारी कि मनोज कुमार किसी खिलौने की तरह हवा में उछल गए। चश्मदीदों के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि एएसआई सड़क पर गिरने से पहले कई फिट हवा में रहे और उनकी बाइक घिसटते हुए डिवाइडर से जा भिड़ी। यह हादसा उस व्यस्त समय में हुआ जब सैकड़ों लोग वहां से गुजर रहे थे।
कर्तव्य पथ पर जा रहे थे मनोज कुमार: कांडों की समीक्षा बैठक में होना था शामिल
एएसआई मनोज कुमार कोतवाली थाने के एक निष्ठावान अधिकारी माने जाते हैं। मंगलवार का दिन उनके लिए काफी व्यस्त रहने वाला था क्योंकि थाने में पुराने और लंबित कांडों (केसों) की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। मनोज कुमार इसी बैठक में अपनी फाइलों और रिपोर्ट के साथ शामिल होने के लिए समय पर घर से निकले थे। वे नहीं जानते थे कि ड्यूटी की दहलीज तक पहुंचने से पहले ही वे खुद एक हादसे की रिपोर्ट का हिस्सा बन जाएंगे। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सड़क पर चलने वाले पुलिसकर्मी भी सुरक्षित नहीं हैं, खासकर उन इलाकों में जहां ऑटो और कमर्शियल वाहनों की मनमानी चरम पर होती है।
स्थानीय लोगों ने निभाया ‘गुड सेमेरिटन’ का धर्म: न्यू गार्डिनर अस्पताल में कराया भर्ती
हादसे के तुरंत बाद फ्लाईओवर पर वाहनों के पहिए थम गए। सड़क पर लहूलुहान पड़े एएसआई को देख आसपास के राहगीर और दुकानदार तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े। मनोज कुमार के सिर और हाथों से खून बह रहा था और वे दर्द से कराह रहे थे। स्थानीय लोगों ने बिना पुलिस के इंतजार किए उन्हें अपनी गोद में उठाया और तत्काल पास के न्यू गार्डिनर अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बताया कि उनके सिर में गंभीर चोट आई है और हाथों में भी काफी जख्म हैं। हालांकि, समय पर अस्पताल पहुंचा दिए जाने के कारण उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने उनकी वर्दी देखकर तुरंत कोतवाली थाने को इसकी सूचना दी।
मौके से फरार हुआ ‘कातिल’ ऑटो चालक: पुलिस की नाकेबंदी और तलाशी अभियान
हादसे के बाद जहां लोग घायल एएसआई की जान बचाने में जुटे थे, वहीं मौका पाकर ऑटो चालक ने अपनी रफ़्तार बढ़ाई और वहां से चंपत हो गया। बताया जाता है कि ऑटो करबिगहिया स्टैंड की ओर से आ रहा था और चालक बेहद लापरवाही से वाहन चला रहा था। कोतवाली थाना पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि ऑटो के नंबर और चालक की पहचान की जा सके। पुलिस ने पटना के विभिन्न स्टैंडों पर भी अपनी टीमें भेजी हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी चालक को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उस पर जानलेवा लापरवाही बरतने की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
जीपीओ-करबिगहिया स्ट्रेच: ऑटो चालकों की अराजकता का केंद्र
पटना का जीपीओ गोलंबर और करबिगहिया फ्लाईओवर क्षेत्र लंबे समय से यातायात प्रबंधन के लिए चुनौती बना हुआ है। यहां ऑटो चालकों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि वे कहीं भी वाहन मोड़ देते हैं और सवारी बैठाने की होड़ में रफ़्तार की सीमा को लांघ जाते हैं। एएसआई मनोज कुमार के साथ हुआ यह हादसा इसी अराजकता का परिणाम है। अक्सर देखा जाता है कि फ्लाईओवर पर भी ऑटो चालक खतरनाक तरीके से ‘ओवरटेकिंग’ करते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर इस क्षेत्र में पुलिस की गश्त और ट्रैफिक नियमों का पालन कड़ाई से नहीं कराया गया, तो आने वाले दिनों में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
वर्दीधारी की सुरक्षा पर सवाल: पुलिस प्रशासन में चिंता का माहौल
कोतवाली थाने के एएसआई के साथ हुई इस घटना ने पूरे महकमे को चिंता में डाल दिया है। थाना प्रभारी और अन्य वरीय अधिकारियों ने अस्पताल जाकर मनोज कुमार का हालचाल जाना। सहयोगियों का कहना है कि मनोज कुमार एक सक्रिय अधिकारी हैं और उनकी अनुपस्थिति से समीक्षा बैठक के कार्यों पर भी असर पड़ा है। पुलिस एसोसिएशन ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मांग की है कि ड्यूटी पर जा रहे या तैनात पुलिसकर्मियों की सड़क सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम होने चाहिए। राजधानी की सड़कों पर तैनात पुलिसकर्मी अक्सर ऐसे बेकाबू वाहनों की चपेट में आते रहते हैं, जो चिंता का विषय है।
निष्कर्ष: सुरक्षित सफर के लिए नियमों का पालन अनिवार्य
एएसआई मनोज कुमार के साथ हुआ यह हादसा एक चेतावनी है कि पटना की सड़कों पर कोई भी सुरक्षित नहीं है। चाहे वह आम नागरिक हो या खाकी वर्दी वाला रक्षक। ऑटो चालक की एक छोटी सी लापरवाही ने एक हंसते-खेलते अधिकारी को अस्पताल के बेड पर पहुंचा दिया। अब देखना यह है कि पटना पुलिस कितनी जल्दी उस फरार ऑटो चालक को सलाखों के पीछे भेजती है। द वॉयस ऑफ बिहार की टीम घायल एएसआई मनोज कुमार के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती है और वाहन चालकों से अपील करती है कि वे अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए यातायात नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करें।


