
न्यूज डायरी: जब विवादों की दहलीज पर ‘मिलन’ का उत्सव मना
- अनोखी पहल: बिहार राज्य महिला आयोग, जहाँ आमतौर पर टूटते रिश्तों और घरेलू हिंसा की चीखें सुनाई देती हैं, वहां सोमवार को एक प्रेम कहानी अपनी मंजिल तक पहुँची।
- इश्क का सफर: प्रेमी और प्रेमिका पिछले तीन वर्षों से एक-दूसरे के साथ गहरे भावनात्मक संबंध में थे और जीवन बिताने का संकल्प ले चुके थे।
- कानूनी हकीकत: जुलाई 2025 में ही दोनों ने गुपचुप तरीके से अदालत में विवाह (Court Marriage) कर लिया था, लेकिन सामाजिक बेड़ियों ने उन्हें साथ रहने नहीं दिया।
- विवाद और विरह: लड़के के परिवार को जैसे ही इस विवाह की भनक लगी, उन्होंने दोनों को डरा-धमकाकर अलग कर दिया, जिसके बाद प्रेमिका ने फरवरी 2026 में न्याय की गुहार लगाई।
- आयोग का फैसला: अध्यक्ष अप्सरा की मध्यस्थता के बाद सोमवार को आयोग परिसर में ही दोनों का विधिवत मिलन कराया गया और सुरक्षा का भरोसा दिया गया।
- VOB इनसाइट: बिहार में प्रेम विवाह आज भी एक ‘सशस्त्र संघर्ष’ जैसा है। विशेषकर जब परिवार बीच में दीवार बनकर खड़ा हो जाए, तो प्रेमी जोड़ों के पास सिवाय कानूनी संस्थाओं के कोई रास्ता नहीं बचता। पटना में महिला आयोग ने जिस तरह से ‘समझौता’ कराने के बजाय ‘अधिकार’ दिलाने पर जोर दिया, वह राज्य की बदलती सामाजिक चेतना का परिचायक है। जुलाई 2025 में हुई कोर्ट मैरिज को आधार मानकर आयोग ने लड़के के परिवार के ‘प्रोटोकॉल’ को ध्वस्त कर दिया। यह मामला उन तमाम युवाओं के लिए एक नजीर है जो अपने हक के लिए लड़ना चाहते हैं।
पटना | 1 अप्रैल, 2026
बिहार की राजधानी पटना में स्थित राज्य महिला आयोग का दफ्तर अमूमन रोती हुई महिलाओं, शिकायत दर्ज कराते परिवारों और कानूनी दांव-पेंचों के लिए जाना जाता है। लेकिन सोमवार की दोपहर यहाँ का नजारा कुछ अलग था। यहाँ कड़वाहट नहीं, बल्कि एक प्रेम कहानी के सफल होने की मिठास थी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, आयोग की अध्यक्ष अप्सरा के हस्तक्षेप के बाद एक ऐसे प्रेमी जोड़े को फिर से मिलाया गया, जिन्हें समाज और परिवार के दबाव ने एक-दूसरे से दूर कर दिया था। यह कहानी शुरू होती है तीन साल पहले, जब दो युवाओं ने एक साथ चलने का सपना देखा था, लेकिन मंजिल तक पहुँचने का रास्ता ‘महिला आयोग’ की मेज से होकर गुजरेगा, यह उन्होंने कभी नहीं सोचा था।
तीन साल की मोहब्बत और जुलाई 2025 का वो ‘सीक्रेट’ निकाह
खबरों के मुताबिक, यह जोड़ा पिछले तीन वर्षों से एक-दूसरे के साथ प्रेम संबंध में था। उनकी मोहब्बत केवल वादों तक सीमित नहीं रही। जब उन्हें लगा कि समाज उनकी राह में रोड़े अटका सकता है, तो उन्होंने कानून का सहारा लेना बेहतर समझा। जुलाई 2025 में, दोनों ने गुपचुप तरीके से कोर्ट में शादी कर ली। कागजों पर वे पति-पत्नी बन चुके थे, लेकिन अपनी सामाजिक मजबूरियों के कारण वे अलग-अलग घरों में रह रहे थे, इस उम्मीद में कि सही समय आने पर वे परिवारों को मना लेंगे।
लेकिन, जैसा कि अक्सर भारतीय परिवारों में होता है, यह राज ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सका। जैसे ही लड़के के घर वालों को उनके इस ‘अदालती कदम’ की जानकारी मिली, घर में कोहराम मच गया। लड़के के परिवार ने अपनी ‘मर्यादा’ और ‘जातीय गौरव’ के नाम पर दोनों पर पहरा बिठा दिया। लड़के को न केवल प्रेमिका से बात करने से रोका गया, बल्कि उसे शारीरिक और मानसिक दबाव में रखकर इस रिश्ते को खत्म करने के लिए मजबूर किया जाने लगा।
फरवरी 2026: जब प्रेमिका ने थामी ‘न्याय’ की मशाल
कई महीनों तक अलगाव की पीड़ा झेलने और अपने पति (प्रेमी) से संपर्क न हो पाने के बाद, प्रेमिका ने हार मानने के बजाय लड़ने का फैसला किया। फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में, वह हिम्मत जुटाकर बिहार राज्य महिला आयोग पहुँची। उसने अध्यक्ष अप्सरा के सामने अपनी पूरी व्यथा सुनाई—कैसे उसने जुलाई 2025 में शादी की और कैसे अब उसके ससुराल वाले उसे उसके पति से दूर रख रहे हैं।
महिला आयोग ने मामले की गंभीरता को समझा। आयोग के लिए यह केवल एक प्रेम संबंध नहीं था, बल्कि एक विवाहित महिला के उन अधिकारों का हनन था जिसे भारत का संविधान प्रदान करता है। आयोग ने तुरंत लड़के और उसके परिवार को समन जारी किया। सुनवाई के दौरान कई दौर की बहस हुई, जहाँ लड़के के परिवार ने अपने तर्क दिए, लेकिन कोर्ट मैरिज के दस्तावेजों के सामने उनकी एक न चली।
आयोग परिसर में ‘शहनाई’ और अध्यक्ष अप्सरा का संकल्प
सोमवार को इस मामले का निर्णायक मोड़ आया। आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाया। लड़के ने भी आयोग के सामने स्वीकार किया कि वह अपनी पत्नी (प्रेमिका) के साथ रहना चाहता है और परिवार के दबाव में वह मजबूर था। अध्यक्ष ने लड़के के परिवार को कड़ी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने इस विवाहित जोड़े के जीवन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप किया, तो उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।
अंततः, सोमवार को आयोग के अधिकारियों और महिला सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में दोनों का मिलन कराया गया। इसे केवल एक मिलन नहीं, बल्कि एक औपचारिक विवाह की मान्यता के रूप में देखा गया। आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने इस अवसर पर कहा, “महिला आयोग हमेशा परिवार को जोड़ने का काम करता है। यहाँ लड़कियां अपनी सुरक्षा और हक के लिए आती हैं। इस जोड़े ने पहले ही कानूनी रूप से शादी कर ली थी, हमने बस उन्हें उनका हक दिलाया है। अब आयोग इस जोड़े पर अपनी कड़ी नजर रखेगा ताकि भविष्य में लड़के के परिवार वाले लड़की को किसी भी तरह से प्रताड़ित न कर सकें।”


