
बेरूत/दक्षिणी लेबनान: लेबनान की राजधानी Beirut और दक्षिणी इलाकों में इजरायल की भीषण बमबारी के बीच Hezbollah को एक और बड़ा झटका लगा है। संगठन के कद्दावर नेताओं में से एक और संसदीय गुट के प्रमुख Mohammad Raad इजरायली एयरस्ट्राइक में मारे गए।
राद, हिजबुल्लाह के Hassan Nasrallah के बाद दक्षिणी लेबनान में संगठन के कामकाज की देखरेख कर रहे थे और नसरल्लाह के निजी प्रवक्ता भी रह चुके थे। उनकी मौत ने हिजबुल्लाह के नेतृत्व को गंभीर संकट में डाल दिया है।
मोहम्मद राद का राजनीतिक सफर
22 अगस्त 1955 को बेरूत में जन्मे राद का परिवार मूल रूप से दक्षिणी लेबनान के जबा शहर से था। लेबनान यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र में स्नातक करने वाले राद हिजबुल्लाह के संस्थापक चेहरों में से एक थे।
- वे 1992 से लगातार नबातियेह क्षेत्र से सांसद रहे और 2000 से संसद में ‘वफादारी के ब्लॉक’ का नेतृत्व कर रहे थे।
- राद हिजबुल्लाह की कार्यकारी समिति के सदस्य और राजनीतिक परिषद के पूर्व अध्यक्ष भी थे।
- उनके ईरान के साथ मजबूत संबंध थे और उन्हें ईरानी गार्डियन काउंसिल में लेबनान का प्रतिनिधि चुना गया।
वे हमेशा कहते थे कि हिजबुल्लाह एक सैन्य प्रतिरोध दल है और राजनीति व लड़ाई के बीच कोई अंतर नहीं है।
नसरल्लाह के उत्तराधिकारी और अंतरराष्ट्रीय विवाद
साल 2013 में राद को हसन नसरल्लाह का संभावित उत्तराधिकारी माना गया। वे हिजबुल्लाह की विचारधारा के बड़े जानकार थे और अक्सर पश्चिमी देशों के खिलाफ कड़े बयान देते थे।
- 2019 में अमेरिका ने उन्हें आतंकियों की मदद करने के आरोप में प्रतिबंधित कर दिया।
- जून 2024 में उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो युद्ध के बीच समुद्र किनारे और नाइटक्लब जा रहे थे।
- उन्होंने पश्चिमी देशों के विश्वविद्यालयों में हो रहे प्रदर्शनों को हिजबुल्लाह के फायदे के लिए इस्तेमाल करने की वकालत भी की।
संगठन के भीतर खलबली
राद की मौत ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि क्या हिजबुल्लाह के भीतर कोई गद्दार है जो सटीक लोकेशन लीक कर रहा है।
- नसरल्लाह के बाद राद जैसे बड़े नेताओं का तेज़ी से निशाना बनना संगठन के भीतर संकट पैदा कर रहा है।
- राद ने रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov से मिलकर मॉस्को में हिजबुल्लाह का कार्यालय खोलने की योजना भी बनाई थी।
- अब हिजबुल्लाह के पास संसद में कोई बड़ा चेहरा नहीं बचा।
दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना का दबाव बढ़ता जा रहा है और राद जैसे रणनीतिकार की कमी संगठन को युद्ध और राजनीति दोनों मोर्चों पर चुनौती देगी।


