बिहार बजट में सबसे बड़ा आवंटन स्वास्थ्य को, लेकिन जमीनी तस्वीर डराने वाली — बेतिया और समस्तीपुर से दो तस्वीरों ने खोली पोल

पटना: 3 मार्च 2025 को जब तत्कालीन वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार का बजट पेश किया था, तब शिक्षा के बाद सबसे ज्यादा राशि स्वास्थ्य विभाग के लिए निर्धारित की गई थी। स्वास्थ्य बजट का आकार 20,335 करोड़ रुपये रखा गया था। बजट के बाद सरकार से लेकर मुख्यमंत्री तक ने दावा किया कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ हो रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बिहार विधानमंडल के सत्र में यह कहते हुए सरकार की पीठ थपथपाई थी कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हुआ है। लेकिन जमीनी हकीकत की दो तस्वीरें इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं।


तस्वीर नंबर 1: बेतिया के GMCH में बच्चे का पिता हाथ में ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर दौड़ता रहा

बिहार बजट में सबसे बड़ा आवंटन स्वास्थ्य को, लेकिन जमीनी तस्वीर डराने वाली — बेतिया और समस्तीपुर से दो तस्वीरों ने खोली पोल

पश्चिम चंपारण के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH), बेतिया से एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है। 850 करोड़ रुपये से बने इस अस्पताल में 9 दिन के नवजात को उसकी मां गोद में लिए थी और पिता ऑक्सीजन सिलेंडर हाथ में लिए एक्स-रे कराने नीचे ले जा रहा था।

तारीख: 4 दिसंबर 2025, गुरुवार

नवजात को सांस लेने में परेशानी थी और वह GMCH में भर्ती था। एक्स-रे कराने के लिए उसे ऊपर से नीचे ले जाना था। अस्पताल में न स्ट्रेचर उपलब्ध था, न कोई कर्मचारी मदद के लिए दिखा। मजबूरन पिता को हाथ में ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर जाना पड़ा।

अधीक्षक डॉ. सुधा भारती ने कहा:
“बच्चे की तबीयत खराब थी। स्ट्रेचर से ले जाना संभव नहीं था, इसलिए मां बच्चे को गोद में लेकर एक्स-रे कराने गई। अब बच्चे को PMCH रेफर कर दिया गया है।”


तस्वीर नंबर 2: समस्तीपुर सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीज का ‘झाड़-फूंक’

बिहार बजट में सबसे बड़ा आवंटन स्वास्थ्य को, लेकिन जमीनी तस्वीर डराने वाली — बेतिया और समस्तीपुर से दो तस्वीरों ने खोली पोल

समस्तीपुर सदर अस्पताल में स्थिति और भी शर्मनाक थी। इमरजेंसी वार्ड के अंदर एक भगत मरीज के बगल में बैठकर झाड़-फूंक करता रहा, और नर्सिंग स्टाफ व गार्ड तमाशबीन बने रहे।

मरीज की पहचान :
फूलो देवी, निवासी — चकदौलतपुर, मुक्तापुर थाना।

फूलो देवी को पेट दर्द की वजह से इमरजेंसी लाया गया था। इलाज के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई तो परिजन ने अस्पताल के अंदर ही भगत को बुला लिया और झाड़-फूंक शुरू हो गई।

फूलो देवी बोलीं:
“तीन दिन से पेट में दर्द था। जब दवा से आराम नहीं मिला तो सोचा झाड़-फूंक करा लें।”

भगत आलोक कुमार का बयान:
“हमें बीमारी के बारे में पता नहीं। लोग बुलाए तो आ गए। परमिशन किसी ने नहीं दी, गलती हो गई कि पूछ लेते।”

अस्पताल में मौजूद किसी भी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी ने भगत को रोकने की कोशिश नहीं की।

उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार ने कहा:
“तैनात स्वास्थ्यकर्मियों और गार्ड से पूछताछ की जाएगी। सुरक्षा गार्ड को शो-कॉज किया जाएगा।”


बिहार में डॉक्टरों की भारी कमी — 2148 लोगों पर एक डॉक्टर

सरकारी रिपोर्टों के अनुसार —

  • बिहार में उपलब्ध अलोपैथिक डॉक्टरों की संख्या: 58,144
  • आवश्यक संख्या (WHO मानक के अनुसार): 1,24,919
  • यानी 53% डॉक्टरों की कमी
  • बिहार में 2148 व्यक्तियों पर एक डॉक्टर उपलब्ध है।

CAG और राज्य ऑडिट रिपोर्टों में पैरामेडिकल और डॉक्टरों की बड़ी संख्या में रिक्तियां उजागर की गई हैं।


भर्ती अभियान जारी, मार्च तक 41,000 नियुक्तियों का दावा

स्वास्थ्य विभाग और NHM द्वारा हाल के महीनों में बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान शुरू किए गए हैं—

  • CHO के 4500 पदों पर भर्ती
  • स्वास्थ्य विभाग में 41,000 नियुक्तियों की घोषणा
  • शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत 32,000 से अधिक पद
  • स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के अनुसार, मार्च तक सभी भर्ती प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी

बजट में हजारों करोड़ रुपये आवंटित होने और सरकार के दावों के बावजूद बेतिया और समस्तीपुर की ये दो तस्वीरें साबित करती हैं कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था अब भी जमीन पर दम तोड़ रही है।
जहां एक ओर अस्पतालों में स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं, वहीं दूसरी ओर इमरजेंसी वार्ड में झाड़-फूंक जैसी प्रथाएं चल रही हैं।


 

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