
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर कांड को लेकर बिहार में बढ़ता जनाक्रोश अब भागलपुर तक पहुंच गया है। कथित एनकाउंटर को लेकर न्याय की मांग तेज होती जा रही है और इसी क्रम में भागलपुर में सैकड़ों लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। शहर के प्रमुख स्थल घंटाघर चौक पर जुटे लोगों ने हाथों में जलती मोमबत्तियां, पोस्टर और तख्तियां लेकर भरत तिवारी को न्याय दिलाने की मांग उठाई। इस दौरान पूरा इलाका नारों और विरोध प्रदर्शनों की आवाज से गूंजता रहा।
प्रदर्शन में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, छात्र संगठनों और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। लोगों के चेहरों पर गुस्सा, आंखों में पीड़ा और हाथों में न्याय की उम्मीद साफ दिखाई दे रही थी। कैंडल मार्च केवल एक सांकेतिक विरोध नहीं था, बल्कि यह प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे गंभीर सवालों और जनभावनाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन बन गया।
घंटाघर चौक पर जमा हुए लोगों ने “भरत तिवारी को न्याय दो”, “भरत तिवारी अमर रहें” और “संविधान बड़ा या सत्ता का अहंकार” जैसे नारे लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में मौजूद पोस्टरों पर कई तीखे सवाल लिखे थे, जिनमें पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और कथित एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग प्रमुख रही।
कई प्रदर्शनकारी भरत तिवारी की तस्वीरें लेकर पहुंचे थे। तस्वीरों और मोमबत्तियों से बना दृश्य बेहद भावुक था। मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि न्याय की लड़ाई के लिए है। यही वजह रही कि पूरे प्रदर्शन में किसी भी राजनीतिक दल का झंडा या बैनर नजर नहीं आया।
घंटाघर चौक से शुरू हुआ कैंडल मार्च शहर के कई प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ आगे बढ़ा। रास्ते भर लोग जुलूस में शामिल होते गए, जिससे मार्च का आकार लगातार बढ़ता गया। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों ने भी रुककर इस प्रदर्शन को देखा। कई लोगों ने मौके पर ही प्रदर्शनकारियों का समर्थन भी किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह केवल भरत तिवारी के लिए न्याय की मांग नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई भी है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति पर आरोप हैं, तो उसके खिलाफ कानून के तहत निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए, न कि ऐसी कार्रवाई जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो जाएं।
प्रदर्शन में शामिल स्थानीय युवक नितेश ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भरत तिवारी कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। उनके अनुसार भरत तिवारी सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहते थे और गरीबों, बाढ़ पीड़ितों तथा वंचित तबकों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का काम करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे व्यक्ति को कथित एनकाउंटर में मार दिया जाना बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
नितेश ने कहा कि यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन यदि किसी को बिना पूरी प्रक्रिया के मौत के घाट उतार दिया जाए, तो यह कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की।
युवाओं के बीच पुलिस की प्राथमिकताओं को लेकर भी नाराजगी साफ नजर आई। कई प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस अपराध नियंत्रण को लेकर इतनी सक्रिय है, तो खुलेआम घूम रहे दुष्कर्मियों, संगठित अपराधियों और नशा कारोबारियों के खिलाफ उसी स्तर की कार्रवाई क्यों नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि बिहार के कई जिलों में नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है और इसका सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि ब्राउन शुगर और अन्य मादक पदार्थों का नेटवर्क कई क्षेत्रों में सक्रिय है। नशा माफिया युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं, लेकिन इनके खिलाफ अपेक्षित स्तर की सख्ती दिखाई नहीं देती। उनका कहना था कि कानून का इस्तेमाल चुनिंदा मामलों में नहीं, बल्कि समान रूप से होना चाहिए।
कैंडल मार्च के दौरान कई वक्ताओं ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। एक वक्ता ने कहा कि यदि किसी आम नागरिक पर गंभीर आरोप लगते ही बुलडोजर जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है, तो जिन पुलिसकर्मियों पर हत्या जैसे गंभीर आरोप हैं, उनके खिलाफ समान कठोर कार्रवाई क्यों नहीं होती। उन्होंने मांग की कि आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
मोमबत्तियों की शांत रोशनी के बीच मौजूद यह गुस्सा साफ बता रहा था कि यह मामला लोगों के भीतर गहरी बेचैनी पैदा कर चुका है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक भरत तिवारी के परिवार को न्याय नहीं मिलता और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन के अंतिम चरण में सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर भरत तिवारी को श्रद्धांजलि दी। मौन के बाद लोगों ने एक स्वर में न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया। आयोजकों ने कहा कि यह आंदोलन अभी प्रारंभिक चरण में है और यदि न्याय नहीं मिला तो इसे राज्यव्यापी अभियान का रूप दिया जाएगा।
भागलपुर में निकला यह कैंडल मार्च साफ संकेत देता है कि भरत तिवारी एनकाउंटर कांड अब केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। यह मामला धीरे-धीरे व्यापक जनचर्चा का विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच की दिशा इस पूरे घटनाक्रम की अगली तस्वीर तय करेगी। फिलहाल भागलपुर की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब यही संदेश दे रहा है कि न्याय की मांग अब और तेज होने वाली है।


