जहानाबाद।नीट छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, वैसे-वैसे जनता का आक्रोश और तेज़ होता जा रहा है। अब तक किसी ठोस कार्रवाई के अभाव में लोगों का सब्र टूटने लगा है। मंगलवार को इसी गुस्से ने सड़कों पर आकार लिया, जब पतियावां गांव से कारगिल चौक तक एक प्रतिशोध मार्च निकाला गया।
इस मार्च में आसपास के कई गांवों से सैकड़ों लोग शामिल हुए। हाथों में काले झंडे, चेहरे पर गुस्सा और जुबान पर नारे—“नीट छात्रा को न्याय दो”, “दोषियों को गिरफ्तार करो” और “सरकार जवाब दो”—से पूरा इलाका गूंज उठा।
“खामोशी भी अपराध है” — सामाजिक कार्यकर्ताओं का हमला
मार्च के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद भारद्वाज ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा,
“जब सरकार निकम्मी हो जाती है, तब जनता को जागना पड़ता है। खामोशी भी एक बड़ा अपराध है। इतने दिन बीत जाने के बाद भी अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होना साफ दिखाता है कि उन्हें बचाने की कोशिश हो रही है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि रसूखदार लोगों की संलिप्तता के कारण मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
डीजीपी पर भी गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य के डीजीपी ने पीड़ित परिवार को कार्यालय बुलाकर मामले को आत्महत्या मानने का दबाव बनाया।
लोगों का कहना है कि यह न सिर्फ असंवेदनशील है, बल्कि यह दिखाता है कि प्रशासन और सत्ता मिलकर सच्चाई को दबा रही है।
“न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा”
सामाजिक कार्यकर्ता और जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा ने दो टूक कहा,
“जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। एक पिता न्याय के लिए भटक रहा है—यह पूरे समाज के लिए शर्मनाक है।”
सड़क पर उतरा दर्द, गूंज उठा सवाल
प्रतिशोध मार्च के दौरान लोगों के चेहरों पर गुस्सा, आंखों में आंसू और आवाज़ में बेबसी साफ झलक रही थी। हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा था—
अगर आज एक बेटी को न्याय नहीं मिला, तो कल कौन सुरक्षित रहेगा?
अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या वह सिर्फ वादे करेगा, या सच में दोषियों तक पहुंचेगा?


