बिहार विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान राज्य में बंद पड़ी फैक्ट्रियों और औद्योगिक विकास का मुद्दा जोर-शोर से उठा। जेडीयू सदस्य नीरज कुमार ने सरकार से सवाल किया कि औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सभी जिलों में भू-अर्जन की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन बंद पड़े पब्लिक सेक्टर उद्योगों को दोबारा चालू करने की क्या योजना है?
नीरज कुमार ने कहा कि वैश्वीकरण और नई आर्थिक नीति लागू होने के बाद विनिवेश की प्रक्रिया में कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां बंद हो गईं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा। बिहार में कई जगह जमीन उपलब्ध है, बाउंड्री वॉल तक बनी हुई है, लेकिन उनका कोई उपयोग नहीं हो रहा। उन्होंने सरकार से मांग की कि केंद्र से संवाद कर ऐसा तंत्र विकसित किया जाए, जिससे इन बंद मिलों और फैक्ट्रियों को फिर से शुरू किया जा सके।
इस पर उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि मोकामा अंचल की 40 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार से बिहार के उद्योग विभाग में ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और वहां नए उद्योग स्थापित किए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि ऐसी कई जमीनें चिन्हित की गई हैं, जो फिलहाल केंद्र सरकार के उपयोग में नहीं हैं। इन जमीनों को राज्य सरकार को सौंपने के लिए जल्द ही केंद्र को पत्र लिखा जाएगा।
डॉ. दिलीप जायसवाल ने सदन में बड़ा दावा करते हुए कहा कि अगले सत्र से पहले बिहार में एक हजार नए उद्योग स्थापित कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विभाग को अब तक 693 एकड़ जमीन मिल चुकी है और निवेश लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। मंत्री ने यहां तक कहा, “अगर अगले सत्र से पहले 1000 उद्योग नहीं लगे तो मैं सदन में नहीं आऊंगा।”
मंत्री के इस भरोसे के बाद सदन में औद्योगिक विकास को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार अपने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को कितनी जल्दी जमीन पर उतार पाती है।


