जेडीयू MLC नीरज कुमार ने अपनी ही सरकार को घेरा, गार्डिनर रोड अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद होने पर उठाए सवाल

बिहार विधान परिषद के दूसरे दिन आज उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब जेडीयू के MLC नीरज कुमार ने अपनी ही सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि पटना के गार्डिनर रोड अस्पताल में पिछले एक साल से अल्ट्रासाउंड सेवा बंद है, लेकिन इस गंभीर समस्या पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

नीरज कुमार ने सदन में कहा कि गार्डिनर रोड अस्पताल राजधानी के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है। ऐसे में यहां अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच सुविधा का लंबे समय से बंद रहना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर स्वास्थ्य विभाग इतने समय तक इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहा और मरीजों को परेशान क्यों होना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से अल्ट्रासाउंड सेवा ठप रहने का कारण रेडियोलॉजिस्ट की कमी बताया गया। इस पर नीरज कुमार ने इसे “घोर आश्चर्य का विषय” करार दिया और कहा कि मरीजों की जांच व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि अल्ट्रासाउंड मशीन मात्र उपकरण नहीं है, प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट के बिना इसका सही उपयोग संभव नहीं है।

इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट के पदों पर आवेदन ही पर्याप्त संख्या में नहीं आ रहे हैं, जिसके कारण नियुक्ति में दिक्कत हो रही है। मंत्री ने कहा, “जब आवेदन देने के लिए लोग ही नहीं आ रहे, तो नियुक्ति कैसे की जाए?”

मंगल पांडे ने स्वीकार किया कि गार्डिनर रोड अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभाग इस समस्या के समाधान के लिए तुरंत कदम उठाएगा और अगले कुछ सप्ताह में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर मरीजों को यह सुविधा दोबारा उपलब्ध करा दी जाएगी।

नीरज कुमार की तीखी टिप्पणी और मंत्री के जवाब से साफ है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति को लेकर अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है। पटना जैसे बड़े शहर में मरीजों को प्राथमिक जांच सुविधा न मिल पाना गंभीर चिंता का विषय है, जिसके कारण लोगों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।


 

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