गया की लुटेरी दुल्हन का खेल उजागर, शादी का झांसा देकर मध्य प्रदेश के युवकों से 1.70 लाख की लूट

बिहार के गया में कथित लुटेरी दुल्हन और उसके गैंग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने शादी के नाम पर ठगी और लूट के संगठित नेटवर्क की ओर इशारा किया है। मध्य प्रदेश से गया घूमने आए दो युवकों को पहले शादी का सपना दिखाया गया, फिर सुनियोजित तरीके से उन्हें जाल में फंसाकर लाखों रुपये, मोबाइल फोन और कोर्ट मैरिज से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज लूट लिए गए। घटना के बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर विष्णुपद थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इस घटना ने एक बार फिर उन संगठित गिरोहों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो शादी का लालच देकर भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। शुरुआती जांच में यह मामला केवल साधारण लूट नहीं बल्कि पहले से रची गई एक सुनियोजित साजिश माना जा रहा है।

मामले के अनुसार मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रामपुरा थाना क्षेत्र के जननोद गांव निवासी रामचंद्र बामनिया ने आरोप लगाया है कि गया में उन्हें और उनके साथी को योजनाबद्ध तरीके से फंसाया गया। पीड़ित का कहना है कि पूरी घटना बेहद सुनियोजित ढंग से अंजाम दी गई, जिसमें कथित दुल्हन, उसके परिजन और कुछ अन्य लोग शामिल थे।

रामचंद्र बामनिया के अनुसार इस कहानी की शुरुआत करीब दो वर्ष पहले हुई थी। उनकी मुलाकात मध्य प्रदेश के मंदसौर में गया जिले के रहने वाले शिबू नामक व्यक्ति से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच परिचय बढ़ा और संपर्क बना रहा। यही पुराना परिचय बाद में भरोसे का आधार बना और कथित गैंग ने इसी का फायदा उठाया।

पीड़ित ने बताया कि 23 जून को वह अपने साथी पुकार भाव के साथ गया घूमने पहुंचे थे। गया जंक्शन पहुंचने के बाद उनकी मुलाकात शिबू से हुई। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने साथी की शादी कराने की इच्छा जताई। इसी बातचीत ने कथित गैंग को अपना जाल बिछाने का मौका दे दिया।

शिबू ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह एक उपयुक्त लड़की और उसके परिवार से मुलाकात करा सकता है। पीड़ितों के अनुसार शिबू का व्यवहार सामान्य और भरोसेमंद लग रहा था, इसलिए उन्हें किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। इसी विश्वास के आधार पर वे उसके साथ आगे बढ़े।

रामचंद्र के मुताबिक शिबू अपने साथियों के साथ उन्हें एक स्कूल के पास ले गया, जहां एक युवती और उसके कथित परिजन पहले से मौजूद थे। वहां शादी की बातचीत शुरू हुई और कुछ समय बाद आर्थिक मदद के नाम पर रकम की मांग रखी गई। आरोप है कि युवती पक्ष ने शादी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए 1.70 लाख रुपये मांगे।

शादी की उम्मीद में पीड़ितों ने इस मांग को स्वीकार कर लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने कथित दुल्हन के लिए लगभग 20 हजार रुपये के कपड़े और अन्य सामान भी खरीदे। यह सब होने के बाद उन्हें भरोसा हो गया कि शादी की प्रक्रिया वास्तविक है।

अगले दिन यानी 24 जून को कथित तौर पर बोलेरो वाहन से उन्हें कोर्ट ले जाया गया। वहां कोर्ट मैरिज की औपचारिकताएं पूरी कराई गईं। पीड़ितों का कहना है कि इस दौरान सब कुछ सामान्य दिखाया गया ताकि किसी प्रकार का शक न हो। यही इस गैंग की सबसे बड़ी चाल बताई जा रही है—पहले भरोसा बनाना और फिर अंतिम चरण में वार करना।

कोर्ट से बाहर निकलने के बाद मामला अचानक बदल गया। पीड़ित के अनुसार उन्हें दुल्हन के साथ एक मंदिर ले जाया गया, जहां तत्काल 1.70 लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया। इसी दौरान दुल्हन पक्ष की एक महिला ने किसी अज्ञात व्यक्ति को फोन किया, जिससे पीड़ितों को शक होने लगा।

शक बढ़ने पर रामचंद्र और उनके साथी ने कहा कि वे रेलवे स्टेशन के पास जाकर पैसे देंगे। इसके बाद सभी लोग ऑटो से स्टेशन की ओर निकल पड़े। लेकिन रास्ते में जो हुआ, उसने पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।

रामचंद्र के अनुसार विष्णुपद थाना क्षेत्र के बाइपास रोड पर दो बाइक पर सवार करीब पांच युवकों ने उनका ऑटो रोक लिया। आरोप है कि सभी युवक पहले से घात लगाए बैठे थे। ऑटो रुकते ही उन्होंने पीड़ितों के साथ मारपीट शुरू कर दी।

पीड़ितों का आरोप है कि मारपीट के दौरान उनसे 1.70 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन और कोर्ट मैरिज से जुड़े दस्तावेज छीन लिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कथित दुल्हन और उसकी महिला रिश्तेदार भी कथित रूप से इस लूटपाट में शामिल थीं। इससे साफ संकेत मिलता है कि पूरी घटना पहले से तय योजना का हिस्सा थी।

पीड़ित का कहना है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं बल्कि एक संगठित गैंग का काम है, जो शादी का लालच देकर लोगों को फंसाता है। ऐसे गिरोह अक्सर बाहर से आने वाले युवकों या विवाह की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाते हैं। पहले भावनात्मक विश्वास बनाया जाता है, फिर आर्थिक लेनदेन के जरिए उन्हें जाल में फंसाया जाता है।

विष्णुपद थाना पुलिस ने पीड़ित के बयान के आधार पर शिबू, कथित दुल्हन और उसके महिला रिश्तेदारों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने पहले भी ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया है या नहीं।

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अंतरराज्यीय नेटवर्क की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कई बार ऐसे गिरोह अलग-अलग राज्यों में संपर्क बनाकर शिकार तलाशते हैं और फिर सुनियोजित तरीके से लूट को अंजाम देते हैं।

यह घटना लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। सोशल नेटवर्क, परिचय या पुराने संपर्क के आधार पर बिना पूरी जांच-पड़ताल के बड़े आर्थिक फैसले लेना भारी पड़ सकता है। शादी जैसे संवेदनशील मामलों में विशेष सतर्कता बरतना आवश्यक है।

कुल मिलाकर गया की कथित लुटेरी दुल्हन का यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि संगठित ठगी के खतरनाक मॉडल को सामने लाता है। पुलिस जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि शादी के नाम पर भावनाओं का फायदा उठाकर अपराध करने वाले गिरोह अब नए तरीकों से सक्रिय हो चुके हैं।

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