पटना/भागलपुर, 21 जुलाई: बिहार में एक बार फिर बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। खासकर भागलपुर, कहलगांव और नवगछिया में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। लगातार तीन दिनों से जलस्तर में अप्रत्याशित तेजी से वृद्धि देखी गई है। स्थिति को देखते हुए सुल्तानगंज से कहलगांव तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है और जल संसाधन विभाग अलर्ट मोड पर है।
भागलपुर में गंगा खतरे के निशान के पार
भागलपुर में गंगा ने खतरे का निशान पार कर लिया है। सबौर प्रखंड के बाबूपुर, संतनगर और मोहद्दीपुर गांवों में गंगा का पानी घरों और सड़कों में घुस चुका है। कमर भर पानी के बीच स्कूली छात्राओं और ग्रामीणों को जागरूकता और जोखिम के साथ आना-जाना करना पड़ रहा है। ग्रामीण नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।विश्वविद्यालय के हॉस्टल रोड और बूढ़ानाथ मंदिर के नीचे स्थित पार्क में भी पानी भर गया है।
कहलगांव में भी खतरे की घंटी
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, कहलगांव में गंगा का जलस्तर 31.18 मीटर दर्ज किया गया, जो 31.09 मीटर के खतरे के निशान से 9 सेंटीमीटर अधिक है। मुंगेर, हाथीदह और भागलपुर जैसे अन्य क्षेत्रों में भी गंगा के जलस्तर में तेज वृद्धि हो रही है। शहरी इलाकों के निचले हिस्सों में पानी भर चुका है, जिससे स्थानीय जीवन प्रभावित हो रहा है।
नवगछिया के दियारा क्षेत्र में पलायन शुरू
नवगछिया के इस्माइलपुर और एकचारी इलाके में गंगा का पानी तेजी से फैल रहा है। दियारा क्षेत्र के लोग अपने मवेशियों और जरूरी सामान के साथ नाव से सुरक्षित ठिकानों की ओर जा रहे हैं। प्रशासन इन इलाकों में पलायन और सुरक्षा व्यवस्था पर करीबी निगरानी रखे हुए है।
प्रशासन की तैयारी: SDRF और NDRF अलर्ट पर
भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि स्थिति पर नजदीकी निगरानी रखी जा रही है। हर एक किलोमीटर पर पहरेदार तैनात किए गए हैं। उन्होंने कहा:
“फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। यदि बाढ़ जैसे हालात बनते हैं, तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर उन्हें पेयजल, कम्युनिटी किचन, पशु चारा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।“
सरकारी नावों के साथ निजी नावों की भी पहचान और व्यवस्था की गई है। SDRF की टीमें पूरी तरह तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर NDRF की मदद भी ली जाएगी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें। जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन इकाइयाँ लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही हैं।


