
भागलपुर। पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश के कारण गंगा नदी में एक बार फिर तेज उफान देखने को मिल रहा है। इससे राज्य के कई हिस्सों, खासकर भागलपुर जिले में तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। मैदानी इलाकों में दोबारा पानी भराव शुरू हो गया है, वहीं कई स्थानों से कटाव की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
सबौर से पीरपैंती और बिहपुर से इस्माईलपुर तक खतरा बरकरार
गंगा का जलस्तर बढ़ने से सबौर से पीरपैंती और बिहपुर से इस्माईलपुर तक स्थिति गंभीर बनी हुई है। इन इलाकों में तटबंधों पर दबाव और संभावित रिसाव के चलते प्रशासन सतर्क हो गया है। फरक्का बैराज से आने वाले बैक वाटर प्रेशर के कारण कुरसेला में कोसी नदी भी बढ़ने लगी है, जिससे कोसी-गंगा संगम क्षेत्रों में अतिरिक्त खतरा उत्पन्न हो गया है।
इंजीनियरिंग टीमें अलर्ट मोड में, जारी है बाढ़-रोधी कार्य
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग के अभियंता अलर्ट मोड में आ गए हैं। बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, कटिहार के मुख्य अभियंता द्वारा सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि:
- सबौर प्रखंड के चांयचक और ममलखा गांव के समीप रामनगर जमींदारी बांध के निकट बाढ़ संघर्षात्मक कार्य किया जा रहा है।
- बिहपुर प्रखंड में कोसी नदी के दाहिने किनारे स्थित ग्वारीडीह में भी बाढ़ सुरक्षा के लिए कार्य प्रगति पर है।
प्रमुख गेज स्थलों पर जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न गेज स्थलों पर गंगा के जलस्तर की स्थिति इस प्रकार है:
- दीघा (पटना): खतरे के निशान से 1.03 मीटर नीचे, लेकिन बढ़ती प्रवृत्ति।
- मुंगेर: खतरे के निशान से 1.72 मीटर नीचे।
- भागलपुर: खतरे के निशान से 1.38 मीटर नीचे।
- कहलगांव: खतरे के निशान से 0.31 मीटर नीचे।
इन सभी स्थानों पर जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में बाढ़ की आशंका और अधिक गहराने की संभावना जताई जा रही है।
स्थिति पर निगरानी लगातार जारी है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में नाव, बचाव दल, चिकित्सा व्यवस्था एवं राहत शिविरों की तैयारी तेज कर दी है। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की सलाह दी गई है।


