सैंडीस कंपाउंड में उतरी भविष्य की पौध: वॉलीबॉल की नई प्रतिभाओं को तराशने के लिए भागलपुर में महामंथन

भागलपुर। बिहार के खेल जगत में इन दिनों एक नई ऊर्जा और संजीदगी नजर आ रही है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं ने खेल के मैदानों को अब केवल मनोरंजन का केंद्र नहीं, बल्कि करियर निर्माण की कार्यशाला बना दिया है। इसी कड़ी में, भागलपुर के ऐतिहासिक सैंडीस कंपाउंड स्थित वॉलीबॉल मैदान में गुरुवार को प्रतिभाओं का एक ऐसा महाकुंभ देखने को मिला, जहाँ भविष्य के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की पौध तैयार करने के लिए चयन ट्रायल का आयोजन किया गया। खेल विभाग, बिहार सरकार, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण, पटना और जिला प्रशासन भागलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित यह ट्रायल ‘मुख्यमंत्री खेल विकास योजना’ के तहत संचालित एकलव्य राज्य आवासीय खेल प्रशिक्षण केंद्रों के लिए था। यहाँ उमड़े खिलाड़ियों के जोश ने यह साबित कर दिया कि बिहार की मिट्टी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उसे सही दिशा और मंच की दरकार है।

​सैंडीस कंपाउंड बना प्रतिभाओं का रणक्षेत्र

​भागलपुर का सैंडीस कंपाउंड मैदान हमेशा से खिलाड़ियों की पहली पसंद रहा है, लेकिन 9 अप्रैल 2026 की सुबह यहाँ का नजारा कुछ अलग था। मैदान की पट्टियां नई उम्मीदों से सजी थीं और नेट के उस पार जीत का सपना बुनते किशोरों की फौज खड़ी थी। जिला खेल पदाधिकारी जय नारायण कुमार की देखरेख में आयोजित इस चयन प्रक्रिया में बिहार के लगभग 08 जिलों से करीब 80 बालक और बालिका खिलाड़ियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 12 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के इन नन्हे खिलाड़ियों की आंखों में चमक और शरीर में गजब की चपलता देखी गई। यह चयन ट्रायल केवल एक खेल स्पर्धा नहीं थी, बल्कि यह उन प्रतिभावान बच्चों के लिए ‘एकलव्य केंद्र’ के द्वार खोलने की चाबी थी, जहाँ पहुँचकर वे अपने खेल को पेशेवर ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

​वैज्ञानिक पद्धति से चयन: बैटरी और स्किल टेस्ट का पैमाना

​आजकल खेल केवल शारीरिक बल का प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि यह तकनीक और विज्ञान का संगम बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए एकलव्य केंद्रों में नामांकन के लिए चयन प्रक्रिया को काफी कड़ा और पारदर्शी बनाया गया था। चयन ट्रायल को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया था:

  • बैटरी टेस्ट (Battery Test): यह परीक्षण खिलाड़ियों की बुनियादी शारीरिक क्षमताओं को मापने के लिए होता है। इसमें उनकी गति (Speed), शक्ति (Strength), चपलता (Agility) और सहनशक्ति (Endurance) को परखा गया। 12-14 साल की उम्र वह समय होती है जब शरीर के लचीलेपन और मांसपेशियों की बनावट को सही कोच के निर्देशन में ढाला जा सकता है।
  • स्किल टेस्ट (Skill Test): चूंकि यह ट्रायल वॉलीबॉल के लिए था, इसलिए खिलाड़ियों के तकनीकी कौशल पर विशेष ध्यान दिया गया। खिलाड़ियों के ‘सर्विस’, ‘स्मैश’, ‘डिफेंस’ और ‘लिफ्टिंग’ की बारीकियों को विशेषज्ञों ने गौर से देखा। मैदान पर उनकी पोज़िशनिंग और टीम वर्क को भी परखा गया, क्योंकि वॉलीबॉल जैसे टीम गेम में सामंजस्य ही जीत की पहली शर्त है।

​एकलव्य केंद्र: जहाँ सरकार बनेगी खिलाड़ियों का अभिभावक

​जिन खिलाड़ियों का चयन इस कड़े ट्रायल के माध्यम से होगा, उन्हें बिहार सरकार अपनी ‘एकलव्य राज्य आवासीय खेल प्रशिक्षण योजना’ के तहत गोद लेगी। यह योजना उन बच्चों के लिए वरदान है जो आर्थिक अभाव के कारण अपनी प्रतिभा को दबा लेते हैं। चयनित खिलाड़ियों को निम्नलिखित सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जाएंगी:

  1. आवासीय सुविधा: खिलाड़ियों के रहने के लिए आधुनिक छात्रावास की व्यवस्था होगी, ताकि वे बिना किसी घर की चिंता के केवल अपने अभ्यास पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
  2. पौष्टिक आहार: खेल के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। डाइट चार्ट के अनुसार खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता वाला भोजन दिया जाएगा।
  3. खेल उपकरण और किट: जूते, जर्सी से लेकर आधुनिक खेल उपकरण तक, सब कुछ सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।
  4. शिक्षा और प्रशिक्षण: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खिलाड़ियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शिक्षण की व्यवस्था भी परिसर में ही होगी। साथ ही, पटना से प्रतिनियुक्त योग्य प्रशिक्षकों द्वारा उन्हें वॉलीबॉल की अंतरराष्ट्रीय बारीकियां सिखाई जाएंगी।

​विशेषज्ञों की पैनी नजर और प्रशासनिक संजीदगी

​किसी भी चयन प्रक्रिया की सफलता उसके निर्णायक मंडल पर निर्भर करती है। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण, पटना ने इस जिम्मेदारी के लिए अनुभवी विशेषज्ञों की एक टीम भागलपुर भेजी थी। कोच शुभम कुमार, आलोक कुमार पाण्डेय और कुमार हीरा की त्रिमूर्ति ने हर खिलाड़ी के प्रदर्शन का सूक्ष्म विश्लेषण किया। इन प्रशिक्षकों का अनुभव यह सुनिश्चित करेगा कि केवल वे ही बच्चे चुनें जाएं जिनमें भविष्य में राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करने की वास्तविक क्षमता हो।

​प्रशासनिक स्तर पर जय नारायण कुमार ने आयोजन की व्यवस्थाओं को इस तरह चाक-चौबंद रखा कि भीषण गर्मी के बावजूद खिलाड़ियों को कोई असुविधा न हो। सैंडीस कंपाउंड में पानी, मेडिकल किट और विश्राम की उचित व्यवस्था की गई थी, ताकि खिलाड़ी अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन कर सकें।

​बिहार के खेल परिदृश्य में बदलाव की बयार

​यह आयोजन बिहार के बदलते खेल परिदृश्य का एक हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने खेल नीति में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ जैसी योजनाओं ने युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित किया है। मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में विशिष्ट खेलों के लिए एकलव्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। भागलपुर में वॉलीबॉल का यह ट्रायल इसी श्रृंखला की एक कड़ी है।

​8 जिलों से आए खिलाड़ियों ने जिस तरह की प्रतिस्पर्धा दिखाई, उससे यह स्पष्ट है कि ग्रामीण अंचलों में भी अब खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। अभिभावक भी अब अपने बच्चों को खेल के मैदान तक भेजने में संकोच नहीं कर रहे हैं। उन्हें यह भरोसा होने लगा है कि अगर उनका बच्चा प्रतिभाशाली है, तो सरकार उसका हाथ थामने के लिए तैयार है।

​भागलपुर: बिहार का उभरता स्पोर्ट्स हब

​भागलपुर की भौगोलिक स्थिति और यहाँ के युवाओं का खेलों के प्रति रुझान इसे बिहार का एक प्रमुख खेल केंद्र (Sports Hub) बना रहा है। सैंडीस कंपाउंड जैसे मैदानों का आधुनिकीकरण और नियमित अंतराल पर होने वाले राज्य स्तरीय ट्रायल जिले की खेल संस्कृति को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। वॉलीबॉल के साथ-साथ यहाँ एथलेटिक्स, फुटबॉल और क्रिकेट की भी बेहतरीन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

​चयन प्रतियोगिता के समापन पर जिला खेल पदाधिकारी ने उम्मीद जताई कि भागलपुर के इस ट्रायल से निकलने वाले खिलाड़ी भविष्य में न केवल राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे, बल्कि नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर भी बिहार का परचम लहराएंगे।

​निष्कर्ष: सपनों की उड़ान को मिला नया आसमान

​भागलपुर में आयोजित यह चयन ट्रायल केवल खिलाड़ियों के नामांकन की एक प्रक्रिया मात्र नहीं थी, बल्कि यह बिहार के उन 80 नन्हे सपनों को पंख देने की कोशिश थी जो पसीने से लथपथ होकर पटरियों पर दौड़ रहे थे। जब सरकार आवास, भोजन, शिक्षा और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी उठाती है, तो एक खिलाड़ी का ध्यान केवल ‘जीत’ पर केंद्रित होता है।

​आने वाले दिनों में जब इन खिलाड़ियों की सूची सार्वजनिक होगी और वे एकलव्य केंद्रों में अपनी ट्रेनिंग शुरू करेंगे, तब सैंडीस कंपाउंड में बहाया गया उनका एक-एक बूंद पसीना सार्थक होगा। बिहार का खेल प्राधिकरण और भागलपुर प्रशासन जिस तरह से समन्वय बिठाकर काम कर रहे हैं, वह दिन दूर नहीं जब वॉलीबॉल के राष्ट्रीय मानचित्र पर बिहार का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। भविष्य की इस पौध को अब केवल सही खाद और पानी (प्रशिक्षण) की जरूरत है, जिसका जिम्मा सरकार ने अपने कंधों पर ले लिया है।

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